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Shahjahanpur News: बाढ़ से घिरे गांव... ग्रामीणों के सामने भोजन और पशुओं के चारे का संकट
Fri, 20 Sep 2024 04:22 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 20 Sep 2024 04:22 AM IST
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जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर गंगा की बाढ़ के बीच निकलती बैलगाड़ी। स्रोत: जागरुक पाठक
मिर्जापुर। गंगा की बाढ़ का पानी क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांवों की आबादी की तरफ बढ़ने से ग्रामीण अपनी अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भयभीत हैं। आजादनगर गांव के कई घरों में पानी भर जाने से वहां चूल्हे जलना कठिन हो गया है। कई परिवार छतों पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने से बच्चे स्कूल भी नहीं जा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गंगा के तटवर्ती गांवों के खेत जलमग्न होने से धान, गन्ना, उर्द, तिल, मक्का आदि फसलें डूब गई हैं। जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे पर फर्रुखाबाद जिले की सीमा में चौरा ढाई गांव से लेकर बारहमासी आश्रम तक एक किमी दायरे में तीन से चार फुट पानी भरा होने से हाईवे पर आवागमन छठे दिन भी ठप रहा। हालांकि, वहां से पुलिस के हटने पर ग्रामीण खतरे से बेपरवाह होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली, बैलगाड़ी और नाव से स्टेट हाईवे पार कर रहे हैं। क्षेत्र के आजादनगर गांव की गलियों से लेकर शामीर, साबिर, ईशाक, लईक आदि के घरों में पानी भर गया है। पैलानी उत्तरी, कटैलानगला, पंखियानगला और इस्लामनगर भी बाढ़ से चौतरफा घिर गए हैं। इससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ जानवरों के चारे की समस्या हो गई है। संवाद
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गंगा में आई बाढ़ से मिर्जापुर क्षेत्र के आजादनगर गांव के चार-पांच घरों के अंदर पानी भर गया है। इसे देखते प्रभावित परिवारों को वहां के ग्राम प्रधान के माध्यम से भोजन के पैकेट सुलभ कराए गए हैं। अब गंगा व रामगंगा में पानी कम होने लगा है, फिर भी नदियों के आसपास के सभी गांवों पर नजर रखी जा रही है। -चित्रा निर्वाल, एसडीएम, कलान
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रामगंगा के कटान से संकट में पड़ा कसारी गांव का अस्तित्व
जलालाबाद। रामगंगा से हो रहे भूमि कटान से कसारी बुजुर्ग गांव का अस्तित्व एक बार फिर खतरे में पड़ गया है। गांव से पश्चिम लगभग 200 मीटर पहले बहगुल और रामगंगा एक साथ मिलकर कटान करती हुई तेजी से गांव की तरफ बढ़ रही हैं। इस समय यह नदी गांव से बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर है।
राजस्व अभिलेखों में अल्लादादपुर बैहारी ग्राम पंचायत के नाम से दर्ज इस गांव का दो दशक पहले भी बाढ़ से हुए कटान से अस्तित्व मिट चुका है। बाद में इस गांव के लोग जिस जगह जाकर बसे, उस गांव का नाम कसारी बुजुर्ग पड़ गया। गांव के रघुवीर, टीकम सिंह, आशाराम आदि ने बताया कि वर्ष 2010 में आई भयंकर बाढ़ में दोबारा पूरा गांव तबाह हो गया। इसके बाद यहां के लोग दो जगह बस गए और दूसरे गांव का नाम कसारी खुर्द हा गया। इन दोनों गांवों के बीच की दूरी लगभग 500 मीटर है। कसारी बुजुर्ग के पूरब से भी नदी का पानी इन दिनों तेजी से बह रहा है, जिससे दोनों गांवों के बीच क़रीब 200 मीटर संपर्क मार्ग कट गया है। कसारी खुर्द गांव कोला रोड से लगभग 20 मीटर दूर है। कोला रोड से गांव को जोड़ने वाला कच्चा संपर्क मार्ग भी कटान की भेंट चढ़ गया। अब दोनों गांव आने जाने का सहारा नाव बन गई है। कसारी खुर्द की बस्ती में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। ग्रामीण पश्चिम दिशा से कटान करती हुई गांव की तरफ बढ़ रही रामगंगा से ज्यादा खतरा बता रहे हैं। इन गांवों की कई बीघा जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। संवाद
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ग्रामीणों ने डीएम से तटबंध व रास्ता बनवाने की लगाई गुहार
बुधवार को कसारी का हाल जानने पहुंचे डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह से ग्राम प्रधान समेत तमाम ग्रामीणों ने रामगंगा नदी का कटान रोकने के लिए गांव के पास तटबंध और दोनो गांवों के संपर्क मार्गों पर पुलिया बनवाने की मांग की। डीएम ने ग्रामीणों को बाढ़ का प्रकोप कम होने पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजकर सर्वे कराने का आश्वासन दिया है।
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रामगंगा की बाढ़ से जूझ रहे जलालाबाद क्षेत्र के कई गांव
जलालाबाद। रामगंगा की बाढ़ का पानी बुधवार रात से स्थिर होने के बाद भी ग्रामीणों की समस्याएं बरकरार हैं। लोगों को आवागमन से लेकर घरेलू जरूरतें पूरी करने में दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। पालतू पशुओं के लिये हरे चारे का संकट बढ़ गया है।
छुट्टा पशु आसपास पानी भरा होने के कारण सड़कों पर शरण लिए हैं। गांव कसारी, शेरपुर चुरघुटी, मंगटोरा आदि के ग्रामीणों ने बताया कि बीती शाम से पानी में बढ़ोत्तरी नहीं हुई, लेकिन उसमें कमी भी नहीं आई है। कसारी खुर्द में ऊंचे स्थानों को छोड़कर अधिकांश गांव जलमग्न हैं। कई परिवारों के यहां खाना बनाने की भी जगह नहीं बची है। कई घरों में बच्चे या बुजुर्ग बीमार हैं। ग्रामीणों के अनुसार नाव की व्यवस्था के अलावा प्रशासन ने कोई राहत मुहैया नहीं कराई है। हालांकि, एसडीएम उत्सव आनंद का कहना है कि बाढ़ से घिरे आठ गांवों को नौ नाव उपलब्ध कराई गईं हैं। बताया कि सभी बाढ़ चौकियों के माध्यम से प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। एसडीएम के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को भी ऐसे गांवों में जाकर दवा वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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संकट में फंसे ग्रामीणों की बात
पानी भरा होने से गांव में कई तरह की दिक्कतें हो गईं हैं। हर जगह पानी होने से जानवरों को बांधने तक की जगह नहीं बची है। फसलें चौपट हो जाने से आने वाले समय में आजीविका का संकट हो जाएगा। बाढ़ से हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
-छंगे लाल, कसारी खुर्द
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हमारे गांव में हर साल बाढ़ आती है, लेकिन अधिकारी कोई ऐसा उपाय नहीं करते, जिससे गांव बाढ़ से सुरक्षित हो जाए। नदी से हुए कटान में काफी उपजाऊ जमीन चली गई। घरों में रखा राशन व अन्य घरेलू सामान भीगकर खराब होने की स्थिति में है।
-रामकृष्ण, कसारी बुजुर्ग
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संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने से बच्चे स्कूल भी नहीं जा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गंगा के तटवर्ती गांवों के खेत जलमग्न होने से धान, गन्ना, उर्द, तिल, मक्का आदि फसलें डूब गई हैं। जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे पर फर्रुखाबाद जिले की सीमा में चौरा ढाई गांव से लेकर बारहमासी आश्रम तक एक किमी दायरे में तीन से चार फुट पानी भरा होने से हाईवे पर आवागमन छठे दिन भी ठप रहा। हालांकि, वहां से पुलिस के हटने पर ग्रामीण खतरे से बेपरवाह होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली, बैलगाड़ी और नाव से स्टेट हाईवे पार कर रहे हैं। क्षेत्र के आजादनगर गांव की गलियों से लेकर शामीर, साबिर, ईशाक, लईक आदि के घरों में पानी भर गया है। पैलानी उत्तरी, कटैलानगला, पंखियानगला और इस्लामनगर भी बाढ़ से चौतरफा घिर गए हैं। इससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ जानवरों के चारे की समस्या हो गई है। संवाद
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गंगा में आई बाढ़ से मिर्जापुर क्षेत्र के आजादनगर गांव के चार-पांच घरों के अंदर पानी भर गया है। इसे देखते प्रभावित परिवारों को वहां के ग्राम प्रधान के माध्यम से भोजन के पैकेट सुलभ कराए गए हैं। अब गंगा व रामगंगा में पानी कम होने लगा है, फिर भी नदियों के आसपास के सभी गांवों पर नजर रखी जा रही है। -चित्रा निर्वाल, एसडीएम, कलान
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रामगंगा के कटान से संकट में पड़ा कसारी गांव का अस्तित्व
जलालाबाद। रामगंगा से हो रहे भूमि कटान से कसारी बुजुर्ग गांव का अस्तित्व एक बार फिर खतरे में पड़ गया है। गांव से पश्चिम लगभग 200 मीटर पहले बहगुल और रामगंगा एक साथ मिलकर कटान करती हुई तेजी से गांव की तरफ बढ़ रही हैं। इस समय यह नदी गांव से बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर है।
राजस्व अभिलेखों में अल्लादादपुर बैहारी ग्राम पंचायत के नाम से दर्ज इस गांव का दो दशक पहले भी बाढ़ से हुए कटान से अस्तित्व मिट चुका है। बाद में इस गांव के लोग जिस जगह जाकर बसे, उस गांव का नाम कसारी बुजुर्ग पड़ गया। गांव के रघुवीर, टीकम सिंह, आशाराम आदि ने बताया कि वर्ष 2010 में आई भयंकर बाढ़ में दोबारा पूरा गांव तबाह हो गया। इसके बाद यहां के लोग दो जगह बस गए और दूसरे गांव का नाम कसारी खुर्द हा गया। इन दोनों गांवों के बीच की दूरी लगभग 500 मीटर है। कसारी बुजुर्ग के पूरब से भी नदी का पानी इन दिनों तेजी से बह रहा है, जिससे दोनों गांवों के बीच क़रीब 200 मीटर संपर्क मार्ग कट गया है। कसारी खुर्द गांव कोला रोड से लगभग 20 मीटर दूर है। कोला रोड से गांव को जोड़ने वाला कच्चा संपर्क मार्ग भी कटान की भेंट चढ़ गया। अब दोनों गांव आने जाने का सहारा नाव बन गई है। कसारी खुर्द की बस्ती में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। ग्रामीण पश्चिम दिशा से कटान करती हुई गांव की तरफ बढ़ रही रामगंगा से ज्यादा खतरा बता रहे हैं। इन गांवों की कई बीघा जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। संवाद
ग्रामीणों ने डीएम से तटबंध व रास्ता बनवाने की लगाई गुहार
बुधवार को कसारी का हाल जानने पहुंचे डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह से ग्राम प्रधान समेत तमाम ग्रामीणों ने रामगंगा नदी का कटान रोकने के लिए गांव के पास तटबंध और दोनो गांवों के संपर्क मार्गों पर पुलिया बनवाने की मांग की। डीएम ने ग्रामीणों को बाढ़ का प्रकोप कम होने पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजकर सर्वे कराने का आश्वासन दिया है।
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रामगंगा की बाढ़ से जूझ रहे जलालाबाद क्षेत्र के कई गांव
जलालाबाद। रामगंगा की बाढ़ का पानी बुधवार रात से स्थिर होने के बाद भी ग्रामीणों की समस्याएं बरकरार हैं। लोगों को आवागमन से लेकर घरेलू जरूरतें पूरी करने में दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। पालतू पशुओं के लिये हरे चारे का संकट बढ़ गया है।
छुट्टा पशु आसपास पानी भरा होने के कारण सड़कों पर शरण लिए हैं। गांव कसारी, शेरपुर चुरघुटी, मंगटोरा आदि के ग्रामीणों ने बताया कि बीती शाम से पानी में बढ़ोत्तरी नहीं हुई, लेकिन उसमें कमी भी नहीं आई है। कसारी खुर्द में ऊंचे स्थानों को छोड़कर अधिकांश गांव जलमग्न हैं। कई परिवारों के यहां खाना बनाने की भी जगह नहीं बची है। कई घरों में बच्चे या बुजुर्ग बीमार हैं। ग्रामीणों के अनुसार नाव की व्यवस्था के अलावा प्रशासन ने कोई राहत मुहैया नहीं कराई है। हालांकि, एसडीएम उत्सव आनंद का कहना है कि बाढ़ से घिरे आठ गांवों को नौ नाव उपलब्ध कराई गईं हैं। बताया कि सभी बाढ़ चौकियों के माध्यम से प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। एसडीएम के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को भी ऐसे गांवों में जाकर दवा वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
संकट में फंसे ग्रामीणों की बात
पानी भरा होने से गांव में कई तरह की दिक्कतें हो गईं हैं। हर जगह पानी होने से जानवरों को बांधने तक की जगह नहीं बची है। फसलें चौपट हो जाने से आने वाले समय में आजीविका का संकट हो जाएगा। बाढ़ से हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
-छंगे लाल, कसारी खुर्द
हमारे गांव में हर साल बाढ़ आती है, लेकिन अधिकारी कोई ऐसा उपाय नहीं करते, जिससे गांव बाढ़ से सुरक्षित हो जाए। नदी से हुए कटान में काफी उपजाऊ जमीन चली गई। घरों में रखा राशन व अन्य घरेलू सामान भीगकर खराब होने की स्थिति में है।
-रामकृष्ण, कसारी बुजुर्ग
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जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर गंगा की बाढ़ के बीच निकलती बैलगाड़ी। स्रोत: जागरुक पाठक

जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर गंगा की बाढ़ के बीच निकलती बैलगाड़ी। स्रोत: जागरुक पाठक

जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर गंगा की बाढ़ के बीच निकलती बैलगाड़ी। स्रोत: जागरुक पाठक

जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर गंगा की बाढ़ के बीच निकलती बैलगाड़ी। स्रोत: जागरुक पाठक