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Shahjahanpur News: फर्जी कंपनी तैयार कर 1.49 करोड़ की ठगी करने के तीन आरोपी गिरफ्तार

Thu, 01 Jan 2026 10:16 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jan 2026 10:16 PM IST
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Three accused arrested for defrauding people of 1.49 crore by creating a fake company.
मीरानपुर कटरा थाना पुलिस की गिरफ्त में ठगी के तीन आरोपी। स्रोत: मीडिया सेल
मीरानपुर कटरा (शाहजहांपुर)। कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी कंपनी बनाकर एक करोड़ 49 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस छह आरोपियों की तलाश कर रही है। गिरफ्तार दो लोग राजस्थान के रहने वाले हैं।
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मीरानपुर कटरा थाना क्षेत्र के मोहल्ला आतिशबाजान निवासी मोईद अली ने 31 दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मोहल्ले के शोएब अली ने उनसे कंपनी पंजीकृत कराकर अच्छी आमदनी का लालच दिया था। शोएब अली के कहने पर उसने अपना और अपने भाई फरीद अली के दस्तावेज खुदागंज के रहने वाले भूपेंद्र को उपलब्ध करा दिए। इसके बाद उसके व उसके भाई फरीद अली के नाम से फर्जी कूटरचित कागजात से प्लेटिनम राइट होम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई गई। कंपनी के नाम से कई बैंक खाते खोले गए।
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उसे 10 दिसंबर की रात कंपनी के काम से आतिशबाजान मोहल्ले के रहने वाले नागेंद्र के साथ दिल्ली जाने के लिए बोला। शोएब के साथी राजस्थान के भरतपुर के थाना गहनोली मोड़ के गांव खानूआ निवासी अजहरुद्दीन, अलवर के थाना विजय मंदिर के गांव जटियाना निवासी फरदीन व अजबउद्दीन उसे लेकर एक होटल में गए। फिर 15 दिसंबर को उनके खाते से 1.59 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया।
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ठगी का संदेह होने पर 21 दिसंबर को विरोध किया तो उसे धमकाया गया। आराेप है कि शोएब अली ने अपने साथियों की मदद से ठगी कर कई वाहन, हॉस्पिटल और अन्य संपत्ति बनाई है।
सीओ ज्योति यादव ने बताया कि पुलिस टीम ने बुधवार की रात दो बजे रोडवेज परिसर से नागेंद्र कुमार, अजहरुद्दीन और अजबउद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में शोएब अली, भूपेंद्र, फरदीन, अलीशा और दो अज्ञात लोगों की तलाश की जा रही है।

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साइबर अपराध में करते थे इस्तेमाल
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे योजनाबद्ध तरीके से आर्थिक रूप से जरूरतमंद व्यक्तियों की तलाश करते थे। उन्हें विश्वास में लेकर कंपनी पंजीकृत कराने के बहाने विभिन्न बैंकों में उन्हीं व्यक्तियों के नाम से उच्च सीमा (हाई लिमिट) के करंट/कॉरपोरेट खाते खुलवाते थे। बैंक खातों का प्रयोग साइबर अपराधों में लेन-देन के लिए किया जाता था। इसके बाद खातों की जानकारी अपने अन्य सहयोगियों से प्राप्त कर टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से अपने नेटवर्क में शामिल साथियों के साथ साझा कर दी जाती थी। इसके एवज में खातों के माध्यम से की गई लेन-देन की धनराशि का एक निश्चित प्रतिशत क्रिप्टो वॉलेट में यूएसडीटी के रूप में भुगतान प्राप्त होता था। इसे वे लोग आपस में बांट लेते थे।
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