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उपडाकघर घोटाला : ठगे गए जमाकर्ताओं ने जांच के दौरान किया हंगामा
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मंगलवार को अल्हागंज डाकघर पहुंचे खातेदार। संवाद
अल्हागंज। उपडाकघर में जमाकर्ताओं की लाखों की रकम के घोटाले की मंगलवार को डाक निरीक्षक अमर पाल ने यहां आकर फिर जांच की। हालांकि, वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद से डाकघर को इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं मिलने से कंप्यूटरों में दर्ज डाटा की जांच में दिक्कत आ रही है। इस बीच, तमाम जमाकर्ताओं ने डाकघर जाकर जमा रकम की वापसी के लिए देर तक हंगामा किया।
अभी तक घोटाले की परतें केवल जमाकर्ताओं के जरिये खुल रही हैं, किंतु दो दिन बीत जाने के बावजूद विभागीय जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। इसलिए मेहनत की कमाई डाक योजनाओं में निवेश करने वाले लोग गहरे असमंजस और मानसिक तनाव में हैं।
कनेक्टिविटी बाधित रहने से लोग यह भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहे कि उनकी जमा राशि डाकघर में दर्ज है या नहीं। यही जानने के लिए सुबह से डाकघर पर इकट्ठा लोगों को घंटों बाद भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो वे हंगामा करने लगे।
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जमाकर्ताओं ने तत्कालीन उप डाकपाल को ठहराया दोषी
जांच करने आए डाक निरीक्षक के सामने हंगामा कर रहे उपभोक्ताओं ने तत्कालीन उप डाकपाल को वित्तीय घोटाले के लिए दोषी ठहराया। उनका कहना था कि तत्कालीन उपडाकपाल स्वयं उनसे पोस्टमैन को नकद धनराशि देने की बात कहते थे। यह आश्वासन भी देते थे कि दी गई धनराशि वह बाद में डाकघर के खाते में जमा करा देंगे। जमाकर्ताओं के इस आरोप पर डाक निरीक्षक कुछ कहने के बजाय खामोश बने रहे।
डाकघर में कर्मचारी के क्यूआर कोड से खड़े हुए सवाल
हंगामा होने के दौरान कुछ उपभोक्ताओं ने डाकघर के दरवाजे पर आरोपी कर्मचारी का क्यूआर कोड वाला स्कैनर लगा देख सवाल खड़े किए। लोग जानना चाह रहे थे कि आखिर डाकघर में वहां कार्यरत कर्मचारी का निजी स्कैनर क्यों लगाया गया। डाक निरीक्षक भी इसका तत्काल कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके और जांच में तल्लीन रहे।
शिकायतों की भरमार-जवाबदेही शून्य
हरदोई जिले के बड़ागांव निवासी पुत्तन लाल के अनुसार उनके खाते में सात किस्तों की इंट्री नहीं की गई है, जबकि पासबुक में सभी किस्तें मोहर सहित दर्ज हैं। पासबुक में 4.80 लाख रुपये होने चाहिए, 1.05 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा। ऐसे तमाम लोगों का डाकघर पर दिनभर जमावड़ा लगा रहा, जो अपनी जमा रकम का हिसाब मिलाने डाकघर गए थे। केशव तिवारी का कहना है कि उन्होंने अपनी रकम कभी निजी हाथों में नहीं सौंपी। हमेशा सरकार की योजनाओं में जमा किया। अब डाक विभाग रकम के बारे में बताने की स्थिति में नहीं है। माना जा रहा है कि अभी बाहर के कई ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने शिकायत नहीं की है। डाक विभाग के कर्मचारी भी मानते हैं कि जांच आगे बढ़ने पर शिकायतें भी बढ़ सकती हैं।
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डाक निरीक्षक के स्तर से अभी तक हुई जांच की पुलिस को कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। डाक विभाग के जांच के बाद ही इस मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-ओम प्रकाश, थाना प्रभारी, अल्हागंज
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अभी तक घोटाले की परतें केवल जमाकर्ताओं के जरिये खुल रही हैं, किंतु दो दिन बीत जाने के बावजूद विभागीय जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। इसलिए मेहनत की कमाई डाक योजनाओं में निवेश करने वाले लोग गहरे असमंजस और मानसिक तनाव में हैं।
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कनेक्टिविटी बाधित रहने से लोग यह भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहे कि उनकी जमा राशि डाकघर में दर्ज है या नहीं। यही जानने के लिए सुबह से डाकघर पर इकट्ठा लोगों को घंटों बाद भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो वे हंगामा करने लगे।
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जमाकर्ताओं ने तत्कालीन उप डाकपाल को ठहराया दोषी
जांच करने आए डाक निरीक्षक के सामने हंगामा कर रहे उपभोक्ताओं ने तत्कालीन उप डाकपाल को वित्तीय घोटाले के लिए दोषी ठहराया। उनका कहना था कि तत्कालीन उपडाकपाल स्वयं उनसे पोस्टमैन को नकद धनराशि देने की बात कहते थे। यह आश्वासन भी देते थे कि दी गई धनराशि वह बाद में डाकघर के खाते में जमा करा देंगे। जमाकर्ताओं के इस आरोप पर डाक निरीक्षक कुछ कहने के बजाय खामोश बने रहे।
डाकघर में कर्मचारी के क्यूआर कोड से खड़े हुए सवाल
हंगामा होने के दौरान कुछ उपभोक्ताओं ने डाकघर के दरवाजे पर आरोपी कर्मचारी का क्यूआर कोड वाला स्कैनर लगा देख सवाल खड़े किए। लोग जानना चाह रहे थे कि आखिर डाकघर में वहां कार्यरत कर्मचारी का निजी स्कैनर क्यों लगाया गया। डाक निरीक्षक भी इसका तत्काल कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके और जांच में तल्लीन रहे।
शिकायतों की भरमार-जवाबदेही शून्य
हरदोई जिले के बड़ागांव निवासी पुत्तन लाल के अनुसार उनके खाते में सात किस्तों की इंट्री नहीं की गई है, जबकि पासबुक में सभी किस्तें मोहर सहित दर्ज हैं। पासबुक में 4.80 लाख रुपये होने चाहिए, 1.05 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा। ऐसे तमाम लोगों का डाकघर पर दिनभर जमावड़ा लगा रहा, जो अपनी जमा रकम का हिसाब मिलाने डाकघर गए थे। केशव तिवारी का कहना है कि उन्होंने अपनी रकम कभी निजी हाथों में नहीं सौंपी। हमेशा सरकार की योजनाओं में जमा किया। अब डाक विभाग रकम के बारे में बताने की स्थिति में नहीं है। माना जा रहा है कि अभी बाहर के कई ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने शिकायत नहीं की है। डाक विभाग के कर्मचारी भी मानते हैं कि जांच आगे बढ़ने पर शिकायतें भी बढ़ सकती हैं।
डाक निरीक्षक के स्तर से अभी तक हुई जांच की पुलिस को कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। डाक विभाग के जांच के बाद ही इस मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-ओम प्रकाश, थाना प्रभारी, अल्हागंज