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Shahjahanpur News: राजा परीक्षित के मृत्यु भय को दूर करने का सुनाया प्रसंग
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कुर्रियाकलां के श्री राधा-कृष्ण मंदिर में कथा सुनाते कथा व्यास। संवाद
कुर्रियाकलां। गांव के बड़े अड्डा स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को कथा व्यास पंडित सुधाकर पांडेय ने सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मृत्यु भय दूर करने का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि एक राजा शिकार खेलते हुए जंगल में भटक गया। एक कुटिया के मालिक से एक रात ठहरने की अनुमति के बाद सुबह होने पर वह उस दुर्गंध युक्त कुटिया छोड़कर जाने को तैयार नहीं हुआ। तब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित से पूछा कि क्या उस राजा ने सही किया?
परीक्षित ने कहा कि कैसा मूर्ख राजा है जो अपनी प्रतिज्ञा अनुसार नियत समय से अधिक रहना चाहता है। तब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित से कहा आप भी व्यर्थ मृत्यु शोक कर रहे हैं और सर्पदंश के बाद भी शरीर त्यागकर मुक्त होना नहीं चाहते। इससे परीक्षित का ज्ञान जागृत हुआ और वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होने को तैयार हो गए। कथा के विश्राम पर यजमान प्रशांत चौहान ने सपत्नीक भागवत कथा की आरती उतारी। प्रसाद वितरण में मोनू चौहान का सहयोग रहा। संवाद
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उन्होंने कहा कि एक राजा शिकार खेलते हुए जंगल में भटक गया। एक कुटिया के मालिक से एक रात ठहरने की अनुमति के बाद सुबह होने पर वह उस दुर्गंध युक्त कुटिया छोड़कर जाने को तैयार नहीं हुआ। तब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित से पूछा कि क्या उस राजा ने सही किया?
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परीक्षित ने कहा कि कैसा मूर्ख राजा है जो अपनी प्रतिज्ञा अनुसार नियत समय से अधिक रहना चाहता है। तब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित से कहा आप भी व्यर्थ मृत्यु शोक कर रहे हैं और सर्पदंश के बाद भी शरीर त्यागकर मुक्त होना नहीं चाहते। इससे परीक्षित का ज्ञान जागृत हुआ और वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होने को तैयार हो गए। कथा के विश्राम पर यजमान प्रशांत चौहान ने सपत्नीक भागवत कथा की आरती उतारी। प्रसाद वितरण में मोनू चौहान का सहयोग रहा। संवाद
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