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Shahjahanpur News: कुंभकरण और अहिरावण के वध का मंचन

Sun, 19 Oct 2025 11:11 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 19 Oct 2025 11:11 PM IST
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The slaying of Kumbhakaran and Ahiravana was staged.
तिलहर रामलीला में कुंभकरण वध और अहिरावण वध की लीला करते कलाकार। संवाद
तिलहर। श्री जनता रामलीला समिति की ओर से पोटरगंज के मैदान पर चल रही रामलीला में रविवार को अयोध्या से आई श्री किशोरी आदर्श रामलीला मंडली के कलाकारों ने कुंभकरण और अहिरावण के वध का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने जैसे ही दोनों असुरों का संहार कर उन्हें धराशाई किया, श्रद्धालुओं से खचाखच भरा मैदान भगवान के जयघोष से गूंज उठा। कलाकारों के अभिनय और प्रभावी संवाद शैली ने रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। दर्शक देर रात तक मंचन का आनंद लेते रहे। इस दौरान समिति के संरक्षक देवेंद्र गुप्ता, प्रबंधक कमलेश गुप्ता, अध्यक्ष नीरज गुप्ता, महामंत्री पंकज गुप्ता, कोषाध्यक्ष नीलेश गुप्ता आदि व्यवस्थाओं में लगे रहे। संवाद
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श्रीराम के वनगमन करने पर बिलख उठे महाराजा दशरथ
बंडा। रामलीला के सातवें दिन रविवार को नाट्य मंडली के कलाकारों ने भगवान श्रीराम के वन गमन करने के प्रसंग का मंचन किया। कलाकारों ने दिखाया कि श्रीराम का विवाह होने के बाद महाराजा दशरथ ने उन्हें राजा बनाने को विचार किया। उन्होंने मंत्री सुमंत को बुलाकर श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी करने का आदेश दिया। मंथरा को यह सूचना मिली तो उसने कैकई के कान भर दिए। कैकई ने दशरथ से अपने पुराने दो वरदान के तहत पुत्र भरत का राजतिलक करने और श्रीराम को 14 वर्ष का वनगमन मांगा। यह सूचना भगवान श्रीराम को मिलते ही वह वन गमन के लिए तत्पर हो गए। उनके साथ सीता जी और लक्ष्मण भी वन जाने लगे तो राजा दशरथ फूट-फूट कर रोने लगे और पूरी अयोध्या नगरी में शोक छा गया। दर्शकों ने दशरथ बने जीतू भाई के अभिनय की सराहना की। सत्यप्रकाश ने कैकई का अभिनय कर प्रशंसा बटोरी। संवाद
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भगवान श्रीकृष्ण से रुक्मिणी के विवाह का सुनाया प्रसंग

जैतीपुर। गढ़िया रंगीन के शिव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को कथावाचक देवकीनंदन ने भगवान श्रीकृष्ण के रुक्मिणी से विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं, किंतु उनके भाई रुक्मी भगवान श्रीकृष्ण की बुआ के पुत्र शिशुपाल से उनका विवाह करना चाहते थे। इस पर रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर सारी बात बताई और उनसे अपना हरण करने का आग्रह किया। तत्पश्चात, भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का सुझाव मानते हुए उनका हरण कर उनसे विवाह किया। कथा श्रवण में मोहित पाठक, अवनीश यादव, नत्थू गुप्ता, मंगल सैनी, रोहित सिंह, मनोज गुप्ता आदि श्रद्धालु शामिल रहे। संवाद
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