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154 साल पुराना है शहर की ऑफिसर्स कॉलोनी का स्तंभ

Wed, 25 May 2022 06:10 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2022 06:10 PM IST
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The pillar of the city's officers colony is 154 years old
शाहजहांपुर के छावनी क्षेत्र में प्रधान डाकघर वाले चौराहे के पास स्थापित ऐतिहासिक स्तंभ। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। प्रधान डाकघर और जीएफ कॉलेज जाने वाली रोड पर स्थापित ऑफिसर्स कॉलोनी का स्तंभ अपने अंदर इतिहास को समेटे हैं। 154 साल पुराना 20 फुट ऊंचा स्तंभ आज भी पहले की तरह सीना ताने खड़ा हुआ है। इतिहासकार बताते हैं कि 1868 में शाहजहांपुर का सर्वे मेरठ मुख्य लाइन को कानपुर मुख्य लाइन को जोड़ने के संबंध में शुरू हुआ था। स्तंभ को बनाकर शहर की नपाई का काम शुरू किया था। पहले यह स्तंभ मिट्टी का बना था। भारी वर्षा के कारण यह स्तंभ ढहने के बाद कंक्रीट का बनाया गया था।
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एसएस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर व इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी की बड़ी उपलब्धि संपूर्ण भारत का महाज्यामितीय सर्वे कराना था। 1802 में कंपनी ने सर्वे का काम पूरा कराया। कंपनी को अंदाजा था कि पांच वर्षों में काम को पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन इसमें 70 वर्ष का लंबा समय लग गया। शाहजहांपुर में मेरठ से मुख्य लाइन को कानपुर से जोड़ने के संबंध में 1867-68 में सर्वे शुरू हुआ। इसके मिलान के लिए आफिसर्स कॉलोनी के सामने 20 फिट ऊंचा स्तंभ बनाया गया था।
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कई छोटे-छोटे पिलर भी लगाए गए थे। डॉ. खुराना बताते हैं कि 1879 में भारी वर्षा के दौरान मिट्टी का पिलर ढह गया। उसके बाद कंक्रीट का पिलर बनाया गया। इसमें सात अधिकारी और तमाम कर्मचारी लगाए गए थे। मिस्टर लेन टीम के प्रभारी थे। यह स्तंभ 27 डिग्री 52’’55 अक्षांश व 79 डिग्री 57’’16 देशांतर पर स्थित है। इस सर्वे में जिले के 2120 गांवों को शामिल किया गया। इसके लिए 16 इंच के पैमाने पर 3546 कागज की शीट्स लगाई गई।
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संसाधन के अभाव में हुआ था महाज्यामितीय सर्वे
जनपद के लिए महाज्यामितीय सर्वे अपने में काफी अनूठा था। इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि यह सर्वे उस समय हुआ, जब ज्यादा संसाधन उपलब्ध नहीं थे। यह इतना ज्यादा जरूरी काम था कि माउंट एवरेस्ट का नामकरण ही महाज्यामितीय सर्वे विभाग के दूसरे निदेशक सर जार्ज एवरेस्ट के नाम पर कर दिया गया था। देश, प्रदेश, जिले के नक्शे ही सर्वे की देन है।
आंकड़ों को गहराई से पढ़े बिना जनपद को नहीं समझा जा सकता। यह हमारी जनपदीय संपदा की विरासत है। दु:ख की बात है कि ऑफिसर्स कॉलोनी वाले स्तंभ के बारे में जनपद के बहुत कम लोग जानते हैं। यहां एक सूचना पट लगाकर इसके इतिहास को संरक्षित कर नई पीढ़ी को इसके बारे में बताया जाना चाहिए। -डॉ. विकास खुराना, इतिहासकार।

ऑफिसर्स कॉलोनी के सामने बने स्तंभ को संरक्षित करने व उसके आसपास सौंदर्यीकरण कराने के लिए प्रयास जारी है। आठ-नौ महीने पहले स्तंभ पर ग्रेनाइट पत्थर लगवाने के साथ पार्क बनवाने आदि का विचार किया गया था। उस समय कवायद आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब फिर से इस ओर ध्यान दिया जाएगा। - अवधेश दीक्षित, नामित सदस्य, छावनी परिषद
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