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Shahjahanpur News: नाहिल में 60 बीघा सरकारी जमीन पर हो गया खेल

Sat, 17 Feb 2024 03:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 17 Feb 2024 03:19 AM IST
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The game took place on 60 bighas of government land in Nahil
नाहिल के पास बनी मार्केट। संवाद
पुवायां। नाहिल के पश्चिम जंगल झाड़ी की 60 बीघा सरकारी जमीन पर खेल हो गया। नियमों के विपरीत जाकर पट्टे कर दिए गए। कुछ पट्टों की बिक्री भी कर दी गई। शिकायत के बाद लेखपाल ने इसका निरस्तीकरण कराने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा है।
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यहां जंगल झाड़ी के नाम 510 बीघा सरकारी जमीन थी। तहसील पुवायां क्षेत्र में एकमुश्त सरकारी जमीन के मामले में यह दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। इससे ज्यादा सरकारी भूमि खुटार में राजकीय गोसदन सिमरा वीरान के पास है। नाहिल बिलसंडा रोड किनारे कुछ लोगों ने अपनी जमीन पर दुकानें बनाई थीं। बड़ा क्षेत्र मिलने के कारण दुकानें चल निकलीं तो इन दुकानों के आसपास जंगल-झाड़ी की जमीन पर लोगों की निगाहें टिक गईं। पट्टों की जमीनों की खरीद-फरोख्त होने लगी और तमाम लोगों ने वहां बड़ी बाजार बना दी। एक ही स्थान पर ज्यादा सरकारी भूमि के चलते 1980 के बाद यहां सहकारी चीनी मिल लगाने के लिए लोगों ने पैरवी की थी। बाद में सहकारी चीनी मिल गांव करनापुर में स्थापित कर दी गई। इसके बाद इस भूमि पर पीएसी की छावनी बटालियन बनाने के लिए 1996 में प्रयास हुए थे। पीएसी के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर जमीन को छावनी के उपयुक्त माना था, लेकिन किसी कारण छावनी बनाने का मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया।
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इसके बाद 450 बीघा जमीन को 1997 में राजकीय कृषि फार्म को दिया गया था। शेष 60 बीघा भूमि पर कई लोगों को पट्टे कर दिए। जबकि, जंगल झाड़ी की भूमि के पट्टे हो ही नहीं सकते। बावजूद नियमों के विपरीत पट्टे की जमीन भूमिधरी घोषित कर बिक्री कर दी गई। कई पट्टेदार काबिज भी हैं और कई ने अन्य लोगों को बेच दिए। अधिकारियों ने भी बिना जांच के जमीन के दाखिल-खारिज कर दिए। कई लोग अवैध कब्जा कर यहां अब दुकानें बना रहे हैं और अवैध रूप से प्लाॅटिंग कर बिक्री करने का प्रयास भी कर रहे हैं। लेखपाल उपेंद्र तिवारी ने बताया कि नाहिल की जंगल-झाड़ी जमीन पर पट्टों के निरस्तीकरण का प्रस्ताव अधिकारियों को भेज दिया गया है। एसडीएम संजय पांडे ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की बात कही है।
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नहीं मिल सकता भूमिधरी अधिकार
पूर्व शासकीय अधिवक्ता अरविंद मिश्रा ने बताया कि यूपी जेडए 1950 की धारा 132, परिवर्तित यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 77 के तहत जंगल, झाड़ी अथवा संरक्षित श्रेणी की भूमि पर पट्टा आदि नहीं हो सकता और किसी को भी कभी भी भूमिधरी अधिकार नहीं मिल सकता। यह भूमि आरक्षित है। इसको राजकीय कृषि फार्म आदि के लिए सरकार अपने में अधिसूचित कर जमीन संबंधित को दे सकती है। पेड़ आदि लगाने के लिए ग्रामसभा प्रस्ताव करती है और एसडीएम अनुमोदन कर जमीन आवंटन कर सकते हैं।

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जंगल झाड़ी की भूमि पर पट्टे नहीं हो सकते। नाहिल का मामला संज्ञान में नहीं हैं। वहां जमीन वन विभाग को भी दिए जाने की तैयारी है। लेखपाल ने पट्टा निरस्तीकरण की रिपोर्ट कब भेजी है, इसकी जानकारी की जाएगी। -मनोज कुमार सिंह, तहसीलदार पुवायां
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जंगल झाड़ी की जमीन श्रेणी 6 (1) सुरक्षित श्रेणी की होती है। इसका पट्टा नहीं किया जा सकता। दाखिल खारिज भी नहीं हो सकती। अगर पट्टे हुए हैं तो गलत है।
-सुधीर त्रिवेदी, सदस्य, गवर्निंग बॉडी तहसील बार एसोसिएशन पुवायां
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