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Shahjahanpur News: श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का किया वर्णन
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पुवायां में कथा सुनते विधायक और अन्य श्रद्धालु। संवाद
पुवायां। जसवंत पैलेस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य रासबिहारी कौशिक ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया। विधायक चेतराम सहित आसपास के गांवों के कई श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। आचार्य ने कहा कि गुरु से कपट और मित्र से चोरी करने वाला निर्धन या कोढ़ी हो जाता है।
आचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा संदीपन गुरु के यहां एक साथ पढ़े। एक दिन गुरु माता ने दोनों को लकड़ी लेने जंगल भेजा और सुदामा को चने देते हुए कहा कि दोनों लोग मिलकर खा लेना। जंगल में सुदामा ने चने अकेले ही खा लिए। बाद में श्रीकृष्ण राजा बने और सुदामा बेहद गरीबी में जीवन-यापन करने लगे।
पत्नी ने सुदामा को श्रीकृष्ण के पास जाकर कुछ मांगकर लाने के लिए कहा और श्रीकृष्ण को भेंट देने के लिए तीन मुट्ठी चावल दिए। श्रीकृष्ण के यहां पहुंचकर सुदामा ने वहां का वैभव देखकर लज्जावश चावल श्रीकृष्ण को नहीं दिए तो भगवान कृष्ण ने उनसे चावल लेकर खाए और सुदामा को धन, वैभव प्रदान कर अपने लोक में स्थान भी दिया। कथा विश्राम के बाद आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। 21 नवंबर को भंडारे का आयोजन होगा।
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आचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा संदीपन गुरु के यहां एक साथ पढ़े। एक दिन गुरु माता ने दोनों को लकड़ी लेने जंगल भेजा और सुदामा को चने देते हुए कहा कि दोनों लोग मिलकर खा लेना। जंगल में सुदामा ने चने अकेले ही खा लिए। बाद में श्रीकृष्ण राजा बने और सुदामा बेहद गरीबी में जीवन-यापन करने लगे।
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पत्नी ने सुदामा को श्रीकृष्ण के पास जाकर कुछ मांगकर लाने के लिए कहा और श्रीकृष्ण को भेंट देने के लिए तीन मुट्ठी चावल दिए। श्रीकृष्ण के यहां पहुंचकर सुदामा ने वहां का वैभव देखकर लज्जावश चावल श्रीकृष्ण को नहीं दिए तो भगवान कृष्ण ने उनसे चावल लेकर खाए और सुदामा को धन, वैभव प्रदान कर अपने लोक में स्थान भी दिया। कथा विश्राम के बाद आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। 21 नवंबर को भंडारे का आयोजन होगा।
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