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Shahjahanpur News: गर्रा और रामगंगा के तटीय गांवों में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा
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केसीनगला में कटान करती रामगंगा का फ़ाइल फोटो।
शाहजहांपुर। गत वर्ष जुलाई में भारी वर्षा के बाद नदियों में आई बाढ़ से गर्रा और रामगंगा के किनारे बसे तमाम गांव टापू बन गए थे। ददरौल ब्लाक में बाढ़ प्रभावित भमौली गांव के लिए बनाई गई बचाव परियोजना शासन से स्वीकृत नहीं होने पर सिंचाई विभाग तटीय गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए पक्की ठोकरें बनाने के बजाय वहां सिर्फ कटान वाले हिस्सों में तारों के जाल में बालू की बोरियां लगाकर अस्थायी पैचवर्क करा रहा है। इस कारण तटीय गांवों पर बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है।
भमौली में पक्के तटबंध के बजाय बन रहीं कच्ची ठोकरें
कुर्रियाकलां। गत वर्ष जुलाई में गर्रा की बाढ़ से भमौली समेत चौहनापुर, हीरपुर, हुसैनपुर माधोपुर, फत्तेपुर, ताहरपुर, निकरा, डहरा, कुटरा, प्रहलादपुर आदि गांव जलमग्न हो गए थे। कटान होने से गुर्रा गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। इस गांव के लोग नदी से कुछ दूरी पर अपने खेतों में घर बनाकर रह रहे हैं। उस दौरान बाढ़ की विभीषिका देखने भमौली पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने ग्रामीणों की मांग पर पक्का तटबंध बनवाने का आश्वासन दिया। उनके निर्देश पर सिंचाइ्र विभाग के अधिशासी अभियंता ने सर्वे कराकर लगभग एक किमी लंबा तटबंध बनाने का निर्णय लिया, लेकिन अब वहां बालू की बोरियाें से कच्ची ठोकरें बनाई जा रही हैं। भमौली निवासी चमन शुक्ला के अनुसार वर्ष 2008 में भी कच्चा तटबंध बनाया गया, लेकिन वह बाढ़ का वेग संभाल नहीं सका। इसी गांव के मृदुल शुक्ला का कहना है कि उनका तीन एकड़ खेत गर्रा में कट चुका हैं और पक्का तटबंध नहीं बना तो नदी के किनारे का दस बीघा खेत भी बाढ़ में कट जाएगा। संवाद
ठोस काम कराने की आवश्यकता
तिलहर। गर्रा नदी में पिछले साल आई बाढ़ से खुदागंज ब्लॉक में रामेश्वरगंज गौंटिया से लेकर तिलहर ब्लाॅक में धन्यौरा गांव तक कोनी, पिंगरा पिंगरी, हटा बख्तियारपुर, गौंटिया, चक बरैंचा आदि गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से तमाम परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। धन्यौरा गांव में तमाम उपजाऊ जमीनें बाढ़ से कट गईं। इसके बावजूद बाढ़ से बरबादी रोकने को सिंचाई विभाग ने कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। धन्यौरा के पास नदी की धारा गांव के दूसरी ओर मोड़ने के लिए कटान वाले हिस्सों में सिर्फ बालू की बोरियों वाली वायर क्रेट लगाई जा रही हैं। ग्राम प्रधान रंजीत वर्मा के अनुसार गर्रा में गत वर्ष जैसी बाढ़ आई तो जाल समेत बोरियां बह जाएंगी। इसी गांव के संतोष कुमार कहते हैं कि पक्की ठोकरें ही बाढ़ से बचाव कर पाएंगी। संवाद
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रामगंगा की बाढ़ से केसीनगला गांव को बढ़ा खतरा
जैतीपुर। रामगंगा के किनारे बसे गांव केसीनगला वालों को बारिश का मौसम नजदीक आने के साथ बाढ़ का खतरा सताने लगा है। दो वर्ष पूर्व आई बाढ़ में कटान से गांव का एक मंदिर नदी में समा चुका है। पिछले वर्ष गांव के नजदीक रामगंगा बढ़ने से रोकने के लिए लगाए गए बैंबू क्रेट तेज धार में बह जाने से काफी कृषि भूमि कट चुकी है। इसके बावजूद गांव के नजदीक कटान रोकने को कारगर व्यवस्था अभी तक नहीं हो सकी है। संवाद
ग्रामीणों की बात
हर वर्ष रामगंगा गांव में कटान करती है। बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए, जिससे कि ग्रामीण अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें।
विजय प्रकाश यादव, केसीनगला (जैतीपुर)
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रामगंगा में पानी बढ़ने पर गांव के लोग रात में सो नहीं पाते। बाढ़ से हर वर्ष गांव का बहुत नुकसान होता है, लेकिन अधिकारी कामचलाऊ व्यवस्था करते हैं।
विमलेश कुमार, केसीनगला (जैतीपुर)
कई वर्ष से बाढ़ आने से आसपास के करीब एक दर्जन गांवों में तमाम लोगों की फसलें नष्ट हो जाती है। पक्की ठोकरें बनाए बगैर बाढ़ से राहत नहीं मिलेगी।
-बांके लाल वर्मा, धन्यौरा, (तिलहर)
बरसात शुरू होने के साथ ही गांव में बाढ़ को लेकर लोग चिंतित होने लगते हैं। पिछले साल बहुत नुकसान हुआ, फिर भी पक्की ठोकरें नहीं बनीं।
-रामकिशोर मिश्रा, धन्यौरा, (तिलहर)
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ददरौल ब्लॉक में भमौली समेत आसपास के गांवों को बाढ़ आपदा से बचाने के लिए परियोजना प्रस्तावित कर शासन को भेजी गई, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिल सकी। फिलहाल, नदियों के तटीय गांवों के कटान वाले हिस्सों में बालू की बोरियों और जियो बैग से पैचवर्क के काम तेजी से कराए जा रहे हैं। प्रयास है कि बारिश का दौर शुरू होने से पहले बाढ़ से बचाव के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं।
-नेहा वर्मा, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग
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भमौली में पक्के तटबंध के बजाय बन रहीं कच्ची ठोकरें
कुर्रियाकलां। गत वर्ष जुलाई में गर्रा की बाढ़ से भमौली समेत चौहनापुर, हीरपुर, हुसैनपुर माधोपुर, फत्तेपुर, ताहरपुर, निकरा, डहरा, कुटरा, प्रहलादपुर आदि गांव जलमग्न हो गए थे। कटान होने से गुर्रा गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। इस गांव के लोग नदी से कुछ दूरी पर अपने खेतों में घर बनाकर रह रहे हैं। उस दौरान बाढ़ की विभीषिका देखने भमौली पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने ग्रामीणों की मांग पर पक्का तटबंध बनवाने का आश्वासन दिया। उनके निर्देश पर सिंचाइ्र विभाग के अधिशासी अभियंता ने सर्वे कराकर लगभग एक किमी लंबा तटबंध बनाने का निर्णय लिया, लेकिन अब वहां बालू की बोरियाें से कच्ची ठोकरें बनाई जा रही हैं। भमौली निवासी चमन शुक्ला के अनुसार वर्ष 2008 में भी कच्चा तटबंध बनाया गया, लेकिन वह बाढ़ का वेग संभाल नहीं सका। इसी गांव के मृदुल शुक्ला का कहना है कि उनका तीन एकड़ खेत गर्रा में कट चुका हैं और पक्का तटबंध नहीं बना तो नदी के किनारे का दस बीघा खेत भी बाढ़ में कट जाएगा। संवाद
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ठोस काम कराने की आवश्यकता
तिलहर। गर्रा नदी में पिछले साल आई बाढ़ से खुदागंज ब्लॉक में रामेश्वरगंज गौंटिया से लेकर तिलहर ब्लाॅक में धन्यौरा गांव तक कोनी, पिंगरा पिंगरी, हटा बख्तियारपुर, गौंटिया, चक बरैंचा आदि गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से तमाम परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। धन्यौरा गांव में तमाम उपजाऊ जमीनें बाढ़ से कट गईं। इसके बावजूद बाढ़ से बरबादी रोकने को सिंचाई विभाग ने कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। धन्यौरा के पास नदी की धारा गांव के दूसरी ओर मोड़ने के लिए कटान वाले हिस्सों में सिर्फ बालू की बोरियों वाली वायर क्रेट लगाई जा रही हैं। ग्राम प्रधान रंजीत वर्मा के अनुसार गर्रा में गत वर्ष जैसी बाढ़ आई तो जाल समेत बोरियां बह जाएंगी। इसी गांव के संतोष कुमार कहते हैं कि पक्की ठोकरें ही बाढ़ से बचाव कर पाएंगी। संवाद
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रामगंगा की बाढ़ से केसीनगला गांव को बढ़ा खतरा
जैतीपुर। रामगंगा के किनारे बसे गांव केसीनगला वालों को बारिश का मौसम नजदीक आने के साथ बाढ़ का खतरा सताने लगा है। दो वर्ष पूर्व आई बाढ़ में कटान से गांव का एक मंदिर नदी में समा चुका है। पिछले वर्ष गांव के नजदीक रामगंगा बढ़ने से रोकने के लिए लगाए गए बैंबू क्रेट तेज धार में बह जाने से काफी कृषि भूमि कट चुकी है। इसके बावजूद गांव के नजदीक कटान रोकने को कारगर व्यवस्था अभी तक नहीं हो सकी है। संवाद
ग्रामीणों की बात
हर वर्ष रामगंगा गांव में कटान करती है। बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए, जिससे कि ग्रामीण अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें।
विजय प्रकाश यादव, केसीनगला (जैतीपुर)
रामगंगा में पानी बढ़ने पर गांव के लोग रात में सो नहीं पाते। बाढ़ से हर वर्ष गांव का बहुत नुकसान होता है, लेकिन अधिकारी कामचलाऊ व्यवस्था करते हैं।
विमलेश कुमार, केसीनगला (जैतीपुर)
कई वर्ष से बाढ़ आने से आसपास के करीब एक दर्जन गांवों में तमाम लोगों की फसलें नष्ट हो जाती है। पक्की ठोकरें बनाए बगैर बाढ़ से राहत नहीं मिलेगी।
-बांके लाल वर्मा, धन्यौरा, (तिलहर)
बरसात शुरू होने के साथ ही गांव में बाढ़ को लेकर लोग चिंतित होने लगते हैं। पिछले साल बहुत नुकसान हुआ, फिर भी पक्की ठोकरें नहीं बनीं।
-रामकिशोर मिश्रा, धन्यौरा, (तिलहर)
ददरौल ब्लॉक में भमौली समेत आसपास के गांवों को बाढ़ आपदा से बचाने के लिए परियोजना प्रस्तावित कर शासन को भेजी गई, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिल सकी। फिलहाल, नदियों के तटीय गांवों के कटान वाले हिस्सों में बालू की बोरियों और जियो बैग से पैचवर्क के काम तेजी से कराए जा रहे हैं। प्रयास है कि बारिश का दौर शुरू होने से पहले बाढ़ से बचाव के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं।
-नेहा वर्मा, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग

केसीनगला में कटान करती रामगंगा का फ़ाइल फोटो।

केसीनगला में कटान करती रामगंगा का फ़ाइल फोटो।

केसीनगला में कटान करती रामगंगा का फ़ाइल फोटो।

केसीनगला में कटान करती रामगंगा का फ़ाइल फोटो।

केसीनगला में कटान करती रामगंगा का फ़ाइल फोटो।