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Shahjahanpur News: मूक-बधिर की सुनवाई में सिस्टम लाचार

Mon, 27 Mar 2023 01:21 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Mon, 27 Mar 2023 01:21 AM IST
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System helpless in hearing of deaf and dumb
शाहजहांपुर। सुनने और बोलने में अक्षम लोगों की जांच की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। इसके चलते मूक-बधिरों के दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहे। महानगर बनने के बाद भी जांच के लिए मूक-बधिरों को लखनऊ तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। जांच की सुविधा देने के लिए स्थानीय स्तर पर कई बार मामला उठ चुका है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है। दिव्यांगों के प्रमाणपत्र जारी करने के लिए सोमवार को पुराने जिला अस्पताल में डॉक्टरों का बोर्ड बैठता है। जहां पर पहले आने वाले 100 लोगों को टोकन देकर उनकी जांच कर दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। वहीं, दूसरी ओर सुनने और बोलने में अक्षम लोगों की जांच की कोई सुविधा नहीं है। वे अपना प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर रहते हैं। नतीजन, उन्हें केजीएमसी, लखनऊ में जांच कराने की सलाह दी जाती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि नाक, कान आदि में दिक्कत होने पर उसकी जांच करा दी जाती है, लेकिन बोलने में अक्षम व्यक्ति को लखनऊ भेजा जाता है। बोलने में अक्षम व्यक्ति की जांच के लिए यहां सुविधा नहीं है।
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भाजपा नेता ने प्रभारी मंत्री के सामने उठाया था मुद्दा
भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय सदस्य अनुज वर्मा ने प्रभारी मंत्री नरेंद्र कश्यप को पत्र देकर मामले को उठाया था। पत्र में बताया कि मूकबधिरों की जांच की व्यवस्था जिले में नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे जिले में जांच कराने जाना होता हे। उन्होंने जांच की व्यवस्था कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में सुनील सैनी, संदीप शर्मा, लाल सिंह यादव, प्रभात वर्मा आदि शामिल रहे।
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करीब एक हजार होंगे मूकबधिर
एसोसिएशन ऑफ द डेफ वेलफेयर के महासचिव अमन सक्सेना बोल नहीं सकते हैं। लेकिन, वह व्हाट्सएप पर मेसेज का जवाब अवश्य दे देते हैं। अमन के अनुसार, जिले में करीब एक हजार मूक-बधिर होंगे। दिव्यांग प्रमाणपत्र की जांच के लिए उन्हें लखनऊ या दूसरे जिलों में जाना पड़ता है।
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-जिले में आडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है, जिसके चलते मूक-बधिरों की जांच नहीं हो पाती है। यह मामला पहले भी कई बार उठाया जा चुका है। प्रयास है कि जल्द ही जांच की व्यवस्था कराई जाए। -डॉ.आरके गौतम, सीएमओ
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