{"_id":"7b44f8a5116a719d4c3412b23fb98bfd","slug":"supporters-including-former-minister-awadhesh-sftyara-arrest-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व मंत्री अवधेश समर्थकों समेत सफ्त्यारा में नजरबंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व मंत्री अवधेश समर्थकों समेत सफ्त्यारा में नजरबंद
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 11 Oct 2015 08:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला पंचायत के वार्ड 43 ददरौल तृतीय से चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा के भाजपा समर्थित भाई मुकेश वर्मा और राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा की पुत्रवधू पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना वर्मा के बीच चुनावी घमासान तेज होने के साथ सत्ता पक्ष पर पुलिस के जरिये विरोधियों पर अत्याचार की चुनाव प्रेक्षक और एसपी से शिकायत की गई है। पूर्व मंत्री व उनके समर्थकों ने पुलिस पर सत्ता पक्ष के दबाव में रैली के लिए परमीशन नहीं देने और जनसंपर्क से रोकने के लिए सफ्त्यारा गांव में घंटों नजरबंद रखने का आरोप लगाया है।
पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने भाई के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सफ्त्यारा गांव में समर्थकों की सभा बुलाई थी। इसके लिए प्रशासन से विधिवत अनुमति लेने को आवेदन किया था। सीओ सदर अनुराग दर्शन और कांट के प्रभारी निरीक्षक नगदू यादव ने आश्वस्त भी किया कि रैली के लिए सुबह दस बजे तक अनुमति दे दी जाएगी। इस आश्वासन पर उनके तमाम समर्थक सफ्त्यारा पहुंच गए, लेकिन बाद में पुलिस अफसरों ने सत्ता पक्ष के राज्यमंत्री के दबाव में रैली और मीटिंग करने की अनुमति देने से मना कर दिया।
पूर्व मंत्री के अनुसार गांव पहुंचे एएसपी से एक वाहन के साथ जनसंपर्क करने का इरादा जाहिर किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उनका नैतिक हक छीनकर दिनभर गांव में ही रोके रखा और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। इस दौरान सैकड़ों पुलिस वाले उन्हें और उनके समर्थकों को झूठे मुकदमे लादकर जेल भिजवाने की धमकी देते रहे। इस दौरान उन्हें और प्रत्याशी मुकेश वर्मा को कोई सुरक्षा नहीं दी गई, जबकि राज्यमंत्री और उनकी प्रत्याशी कई वाहनों से सरकारी कर्मचारियों के साथ भ्रमण कर क्षेत्र में वोट मांगते रहे।
विज्ञापन
पूर्व मंत्री के कार्यालय प्रतिनिधि सर्वेश वर्मा ने बताया कि मामले की शिकायत एसपी से की गई है और राज्य निर्वाचन आयोग से नियुक्त प्रेक्षक को भी दूरभाष पर सारे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, चुनाव प्रेक्षक सागर ने इस तरह का कोई मामला संज्ञान में लाए जाने से इनकार करते हुए कहा कि प्रत्याशियों की जायज शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आयोग को प्रेषित किया जा रहा है और इस प्रकरण में शिकायत मिलने पर भी उचित कदम उठाया जाएगा। उधर, कांट के प्रभारी निरीक्षक नगदू यादव का कहना है कि रैली की परमीशन किसी प्रत्याशी को नहीं दी गई, लेकिन पूर्व मंत्री और उनके समर्थकों को नजरबंद किए जाने की बात पूरी तरह निराधार है।
विज्ञापन
पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने भाई के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सफ्त्यारा गांव में समर्थकों की सभा बुलाई थी। इसके लिए प्रशासन से विधिवत अनुमति लेने को आवेदन किया था। सीओ सदर अनुराग दर्शन और कांट के प्रभारी निरीक्षक नगदू यादव ने आश्वस्त भी किया कि रैली के लिए सुबह दस बजे तक अनुमति दे दी जाएगी। इस आश्वासन पर उनके तमाम समर्थक सफ्त्यारा पहुंच गए, लेकिन बाद में पुलिस अफसरों ने सत्ता पक्ष के राज्यमंत्री के दबाव में रैली और मीटिंग करने की अनुमति देने से मना कर दिया।
विज्ञापन
पूर्व मंत्री के अनुसार गांव पहुंचे एएसपी से एक वाहन के साथ जनसंपर्क करने का इरादा जाहिर किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उनका नैतिक हक छीनकर दिनभर गांव में ही रोके रखा और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। इस दौरान सैकड़ों पुलिस वाले उन्हें और उनके समर्थकों को झूठे मुकदमे लादकर जेल भिजवाने की धमकी देते रहे। इस दौरान उन्हें और प्रत्याशी मुकेश वर्मा को कोई सुरक्षा नहीं दी गई, जबकि राज्यमंत्री और उनकी प्रत्याशी कई वाहनों से सरकारी कर्मचारियों के साथ भ्रमण कर क्षेत्र में वोट मांगते रहे।
विज्ञापन
पूर्व मंत्री के कार्यालय प्रतिनिधि सर्वेश वर्मा ने बताया कि मामले की शिकायत एसपी से की गई है और राज्य निर्वाचन आयोग से नियुक्त प्रेक्षक को भी दूरभाष पर सारे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, चुनाव प्रेक्षक सागर ने इस तरह का कोई मामला संज्ञान में लाए जाने से इनकार करते हुए कहा कि प्रत्याशियों की जायज शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आयोग को प्रेषित किया जा रहा है और इस प्रकरण में शिकायत मिलने पर भी उचित कदम उठाया जाएगा। उधर, कांट के प्रभारी निरीक्षक नगदू यादव का कहना है कि रैली की परमीशन किसी प्रत्याशी को नहीं दी गई, लेकिन पूर्व मंत्री और उनके समर्थकों को नजरबंद किए जाने की बात पूरी तरह निराधार है।