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पत्ती लपेटक सूड़ी का प्रकोप धान पर

Wed, 16 Sep 2015 11:07 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Wed, 16 Sep 2015 11:07 PM IST
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Sudi Lpetk outbreak of leaf on rice
खरीफ सीजन में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की पौध कुम्हलाने से परेशान किसानों का प्रकृति भी साथ नहीं दे रही है। दरअसल, धान के पौधों में पत्ती लपेटक सूंड़ी कीट का प्रकोप होने लगा है। जिले की विभिन्न तहसीलों में कृषि प्रसार विभाग द्वारा फसली सर्वे किए जाने से यह तथ्य सामने आया है। अधिकारियों ने किसान भाइयों को सूंड़ी का प्रकोप थामने के लिए कृषि रक्षा रसायन अपनाने के बजाय प्राकृतिक उपचार को वरीयता देने की सलाह दी है।
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रबी सीजन में बेमौसम बारिश से गेहूं फसल की बरबादी को जिले के किसान भुला भी नहीं पाए कि खरीफ सीजन में भी उन्हें मानसून की लेटलतीफी और दगाबाजी परेशान करने लगी है। हालांकि, जिले की विभिन्न तहसीलों में 181 नहरों को संजाल बिछा होने के साथ चार सौ से अधिक राजकीय नलकूप चालू हालत में हैं। इसके बावजूद मुख्य शारदा नहर के हेड पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से तमाम नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा।
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सिंचाई के लिए नहरों का विकल्प बने राजकीय नलकूप भी बिजली कटौती और लाइन फाल्ट के कारण अपनी क्षमता के अनुसार नहीं चल पा रहे। अधिक जोत वाले संपन्न फॉर्मर निजी बोरिंग से सिंचाई की आवश्यकता पूरी कर रहे हैं, लेकिन कम जोत वाले अधिसंख्य लघु-सीमांत किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने से पीली पड़ने लगी है। ऐसे में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं।
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पुवायां और तिलहर तहसील में देखा गया प्रकोप
कृषि प्रसार विभाग द्वारा सभी तहसीलों में रैंडम फसली सर्वे कराए जाने पर पता चला है कि जिले की पुवायां तहसील के खुटार ब्लॉक और तिलहर क्षेत्र के जैतीपुर, खुदागंज क्षेत्र में धान पर सूंड़ी का हमला ज्यादा हुआ है। खास यह है कि इन दोनों तहसीलों में सिंचाई के पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद धान पौध की पत्तियां पीली पड़ रही हैं।

पत्तियों का क्लोरोफिल चाट जाती है धान की सूंड़ी
धान के पौधों पर आश्रित रहने वाली हरे-पीले रंग वाले शरीर की सूंड़ियों का सिर गहरे भूरे रंग का होता है। करीब दो से ढाई सेमी लंबी यह सूंड़ियां पत्तियों के दोनों किनारों को जोड़कर नलीनुमा संरचना बनाकर उसी में अपना जीवन चक्र पूरा करती हैं। सूंड़ियां पत्तियों की नली में रहकर हरे पदार्थ को खुरचकर खाती हैं। इससे प्रभावित पौधों की पत्तियों पर सफेद रंग की पारदर्शक धारियां उभर आती हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे के दौरान पौधों पर धारियां देखे जाने से सूंड़ी का प्रकोप सामने आया।

इस तरह करें पत्ती लपेटक सूंड़ी का प्राकृतिक उपचार
खेत की चौड़ाई वाले हिस्से के दोनों छोर पर दो किसान रस्सा पकड़कर धान पौधों की वर्तमान ऊंचाई से 10-15 सेमी रस्सा लाकर एक साथ लंबाई की दिशा में बढ़ें। इससे पौधों पर पनपने वाली सूंड़ियां झड़कर नीचे गिर जाएंगी और उन्हें मित्र कीट में शुमार मकड़ियां अपना निवाला बना लेंगी।


विकल्प के तौर पर अपनाएं कृषि रक्षा रसायन
उप निदेशक कृषि प्रसार एवं प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. राधा कृष्ण यादव के अनुसार यदि किन्हीं कारणों से धान की सूंड़ी का रस्सा अथवा बांस विधि से उपचार संभव नहीं हो तो कृषि रक्षा रसायनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 25 प्रतिशत तीव्रता वाले क्यूनालफास की सवा लीटर मात्रा अथवा 36 प्रतिशत सांद्रता वाले मोनो क्रोटोफास की एक लीटर मात्रा 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए।
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