फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Special on World River Day: Streams of poison flowing into rivers from industrial and domestic waste

विश्व नदी दिवस पर विशेष : औद्योगिक व घरेलू कचरे से नदियों में बहतीं विष की धाराएं

Sun, 22 Sep 2024 03:28 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 22 Sep 2024 03:28 AM IST
विज्ञापन
Special on World River Day: Streams of poison flowing into rivers from industrial and domestic waste
गर्रा नदी में गिरता नाले का पानी। संवाद
आशीष त्रिपाठी
विज्ञापन


शाहजहांपुर। जीवनदायी नदियाें में औद्योगिक व घरेलू कचरे की बढ़ती मात्रा से इनकी धाराएं जहरीली हो गई हैं। एक शोध के मुताबिक, शहर की गर्रा नदी में क्रोमियम की मात्रा इतनी ज्यादा है कि इससे कैंसर होने का खतरा है। खन्नौत नदी का भी यही हाल है।
एसएस कॉलेज के रसायन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार दीक्षित ने बताया कि 2023 में गर्रा नदी के पानी की जांच की गई थी। इसमें नदी के शहर में घुसने, अजीजगंज पुल और आरसी मिशन क्षेत्र में खन्नौत के संगम स्थल पर जल को जांचा गया था। इसमें सामने आया कि गर्रा नदी में क्रोमियम तत्व की मात्रा काफी ज्यादा है। इसे अधिकतम .5 एमजी प्रति लीटर होना चाहिए, लेकिन यह 2.5 एमजी प्रति लीटर तक बढ़ गया है।
विज्ञापन


क्रोमियम की अधिक मात्रा कैंसर का कारण बनती है। यह शरीर के पाचन तंत्र व किडनी को भी खराब कर सकता है। पानी में सीओडी यानी केमिकल ऑक्सीजन डिमांड भी 10 एमजी प्रति लीटर की बजाय 216 एमजी प्रति लीटर तक पहुंच गई है। पानी में घुलित ऑक्सीजन जितनी ज्यादा होती है, उतना शुद्ध माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे 6 एमजी प्रति लीटर होना चाहिए, जो कि घटकर तीन एमजी प्रति लीटर तक हो गया है। ऐसे में पानी में स्नान करने से विभिन्न तरह के रोग हो सकते हैं। यहां तक कि इसमें नहाने वाले जानवरों को भी बीमारियां घेर सकती हैं। इसका पानी अगर जानवर भी पियेंगे तो उनके विकास में बाधा आ सकती है और बीमारियों पैदा हो सकती हैं। संवाद

-----

खत्म हो जाते हैं अच्छे बैक्टीरिया

-रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक सिंह बताते हैं कि पानी के प्रदूषण से जलीय जीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है। मछली मरने लगती हैं, अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते हैं। क्रोमियम बढ़ने का प्रमुख कारण औद्योगिक और घरेलू कूड़ा-कचरा होता है, जो पानी में क्रोमियम, लेड, आर्सेनिक, कॉपर, जिंक, आयरन जैसे भारी तत्वों की मात्रा को बढ़ाता है। बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. आदर्श पांडेय ने बताया, पानी में घुलित ऑक्सीजन के कम होने से नदियों के पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक और पॉलीथिन से हो रहा है। नदियों में जलीय जीव, शैवालों की संख्या काफी कम हुई है। पिछले दिनों बाढ़ आने से भी काफी कचरा नदियों में सिमट गया है।


----

जलसंपदा से समृद्ध है शाहजहांपुर

इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि खन्नौत नदी अनेक जलीय जीवों मछलियों, कछुओं की अनेक प्रजातियों का आशियाना थी। अंग्रेजी शासनकाल में इसमें समृद्ध जलीय जीवन के साक्ष्य मिलते हैं। इसके किनारे फैले जंगलों में जैव विविधता और जंगली जीवों की बहुतायत थी। जिले में गोमती, गंगा, गर्रा, खन्नौत, रामगंगा, बहगुल जैसी बड़ी नदियों का प्रवाह है। इसके अलावा कठिना, झुकना, भैंसी, सुखेता, कटना, कैमुआ, भक्षी, गरई, सोत, अरिल जैसी सहायक नदियां भी बहती हैं। बड़ी नदियां जहां प्रदूषण का शिकार हैं, वहीं छोटी नदियां अब नाले में बदलती जा रही हैं। बरसात में जरूर छोटी नदियाें में पानी बढ़ता है, लेकिन अधिकतर समय ये सूखी रहती हैं। गर्रा नदी में तो अंग्रेजों के समय में व्यावसायिक नाव चलती थीं।

---

गर्रा नदी में गिरता नाले का पानी। संवाद

गर्रा नदी में गिरता नाले का पानी। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed