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Shahjahanpur News: धूम्रपान से फेफड़ों में कैंसर के मरीज बढ़े
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शाहजहांपुर। सिगरेट और बीड़ी पीने के कारण फेफड़े के कैंसर के मरीज बढ़े हैं। 90 प्रतिशत धूम्रपान करने वाले लोगों को कैंसर जद में ले रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक सप्ताह चार से पांच संदिग्ध रोगी आते हैं। रोग की जांच में पुष्टि होने पर लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
धूम्रपान और वायु प्रदूषण से अधिकतर लोगों को फेफड़े का कैंसर हो रहा है। डॉक्टर के अनुसार, वर्तमान में फेफड़ों में कैंसर 50 से ऊपर उम्र वाले लोगों को अधिक हो रहा है।
सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, ई-सिगरेट या तंबाकू के धुएं में कई ऐसे रसायन होते हैं, जिसकी वजह से फेफड़ों में कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। ये रसायन सीधे फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ लोगाें को बिना धूम्रपान के भी रोग चपेट में ले लेता है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग में प्रत्येक सप्ताह चार से पांच मरीज आते हैं। यहां उपचार की व्यवस्था न होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
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ये हैं लक्षण
-सीने में तेज दर्द, खांसी में खून, सांस फूलना। सांस लेने पर सीटी जैसी आवाज आना या आवाज का बैठना, वजन घटना।
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फेफड़े के कैंसर से बचने के लिए लोगों को धूम्रपान नहीं करना चाहिए। धुएं से बचाव कर काफी हद तक बचा जा सकता है। मरीज के आने पर सीटी स्कैन और बायोप्सी कराने पर रोग की पुष्टि होने पर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
- डॉ.अंकिता वर्मा, विभागाध्यक्ष-चेस्ट रोग, राजकीय मेडिकल काॅलेज
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कैंसरथेरेपी को जल्द ही शुरू करने जा रहे हैं। फेफड़े के कैंसर के उपचार की सुविधा भविष्य में मिल सकती है।
- डॉ.एमपी गंगवार, चिकित्सा अधीक्षक
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धूम्रपान और वायु प्रदूषण से अधिकतर लोगों को फेफड़े का कैंसर हो रहा है। डॉक्टर के अनुसार, वर्तमान में फेफड़ों में कैंसर 50 से ऊपर उम्र वाले लोगों को अधिक हो रहा है।
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सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, ई-सिगरेट या तंबाकू के धुएं में कई ऐसे रसायन होते हैं, जिसकी वजह से फेफड़ों में कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। ये रसायन सीधे फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ लोगाें को बिना धूम्रपान के भी रोग चपेट में ले लेता है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग में प्रत्येक सप्ताह चार से पांच मरीज आते हैं। यहां उपचार की व्यवस्था न होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
ये हैं लक्षण
-सीने में तेज दर्द, खांसी में खून, सांस फूलना। सांस लेने पर सीटी जैसी आवाज आना या आवाज का बैठना, वजन घटना।
फेफड़े के कैंसर से बचने के लिए लोगों को धूम्रपान नहीं करना चाहिए। धुएं से बचाव कर काफी हद तक बचा जा सकता है। मरीज के आने पर सीटी स्कैन और बायोप्सी कराने पर रोग की पुष्टि होने पर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
- डॉ.अंकिता वर्मा, विभागाध्यक्ष-चेस्ट रोग, राजकीय मेडिकल काॅलेज
कैंसरथेरेपी को जल्द ही शुरू करने जा रहे हैं। फेफड़े के कैंसर के उपचार की सुविधा भविष्य में मिल सकती है।
- डॉ.एमपी गंगवार, चिकित्सा अधीक्षक