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सिंधौली ब्लॉक के तकनीकी सहायक से जवाब तलब
श्ााहजहांपुर ब्ययूराो
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:36 PM IST
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जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक अजय प्रकाश ने सोमवार को सिंधौली ब्लॉक के लोहिया ग्राम भूरखेड़ा का आकस्मिक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कई विकास कार्य अधूरे पाए। निरीक्षण में निर्माणाधीन आवासों के लिए दूसरी किश्त का प्राक्कलन तैयार करने में लापरवाही पाए जाने पर पीडी ने विकास खंड कार्यालय के तकनीकी सहायक को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
लोहिया गांव के नाते भूरखेड़ा में गरीब तबके के 28 परिवारों को योजना से जुड़े आवास स्वीकृत किए गए हैं। इस बीच, प्रशासन को शिकायत मिली कि कुछ लाभार्थियों को आवास की पहली किश्त की धनराशि उनके खातों में ट्रांससफर करने के बजाय वहां के एक असरदार व्यक्ति ने अपने खाते में जमा करा ली। इसीलिए लाभार्थियों को निर्माण कार्यों की जरूरत जरूरत के अनुसार धनराशि नहीं मिल पाई है।
इसकी जांच के लिए डीआरडीए के परियोजना निदेशक भूरखेड़ा पहुंचे। उन्होंने पाया कि सभी आवास अधूरे हैं और गांव में सोलर लाइटें भी नहीं लग सकी हैं। यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि गांव के आदर्श तालाब पर मानक के अनुरूप कई काम नहीं हो सके है। आवासों की पड़ताल से पता चला कि ब्लॉक स्तर की लापरवाही से दो-तीन लाभार्थियों को अभी तक आवास की दूसरी किश्त नहीं मिल पाई है।
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पीडी अजय प्रकाश के अनुसार लाभार्थियों से यह भी ज्ञात हुआ कि नोटबंदी के दौरान करेंसी की किल्लत होने पर उन्होंने ईंट भट्टों और हार्डवेयर व्यवसाइयों को आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान कर ईंट, सरिया, सीमेंट आदि सामग्री खरीदी है। आवासों की दूसरी किश्त के इस्टीमेंट बनाने में देरी के लिए संविदा सहायक अंकित को दोषी पाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही ग्राम प्रधान वरुणेंद्र सिंह को अवशेष कार्य शीघ्र पूरे कराने के निर्देश दिए हैं।
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लोहिया गांव के नाते भूरखेड़ा में गरीब तबके के 28 परिवारों को योजना से जुड़े आवास स्वीकृत किए गए हैं। इस बीच, प्रशासन को शिकायत मिली कि कुछ लाभार्थियों को आवास की पहली किश्त की धनराशि उनके खातों में ट्रांससफर करने के बजाय वहां के एक असरदार व्यक्ति ने अपने खाते में जमा करा ली। इसीलिए लाभार्थियों को निर्माण कार्यों की जरूरत जरूरत के अनुसार धनराशि नहीं मिल पाई है।
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इसकी जांच के लिए डीआरडीए के परियोजना निदेशक भूरखेड़ा पहुंचे। उन्होंने पाया कि सभी आवास अधूरे हैं और गांव में सोलर लाइटें भी नहीं लग सकी हैं। यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि गांव के आदर्श तालाब पर मानक के अनुरूप कई काम नहीं हो सके है। आवासों की पड़ताल से पता चला कि ब्लॉक स्तर की लापरवाही से दो-तीन लाभार्थियों को अभी तक आवास की दूसरी किश्त नहीं मिल पाई है।
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पीडी अजय प्रकाश के अनुसार लाभार्थियों से यह भी ज्ञात हुआ कि नोटबंदी के दौरान करेंसी की किल्लत होने पर उन्होंने ईंट भट्टों और हार्डवेयर व्यवसाइयों को आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान कर ईंट, सरिया, सीमेंट आदि सामग्री खरीदी है। आवासों की दूसरी किश्त के इस्टीमेंट बनाने में देरी के लिए संविदा सहायक अंकित को दोषी पाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही ग्राम प्रधान वरुणेंद्र सिंह को अवशेष कार्य शीघ्र पूरे कराने के निर्देश दिए हैं।