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Shahjahanpur News: दुकानदार पर सांड़ का हमला, इलाज के दौरान गई जान
Fri, 14 Mar 2025 12:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 14 Mar 2025 12:11 AM IST
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खुटार के गांव रूजहा कलां के रामकुमार का फाइल फोटो। स्रोत परिजन
खुटार। गांव रुजहांकलां के मोड़ के पास एक दुकानदार पर बृहस्पतिवार सुबह सांड़ ने हमला कर दिया। इलाज के लिए शाहजहांपुर ले जाते समय उनकी मौत हो गई। होली से पहले परिवार में मातम छा गया।
गांव रुजहा कलां निवासी 48 वर्षीय रामकुमार साइकिल मिस्त्री थे। उन्होंने गांव के मोड़ पर ही खोखा रखा हुआ था। बृहस्पतिवार को वह दुकान पर काम कर रहे थे। पूर्वाह्न लगभग साढ़े 11 बजे वह खोखे के पीछे गए तो वहां खड़े सांड़ ने रामकुमार पर हमला कर दिया। रामकुमार के चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और सांड़ को भगाया।
जानकारी पाकर परिजन भी मौके पर पहुंचे और 108 सेवा की एंबुलेंस से रामकुमार को सीएचसी में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद डाॅक्टर ने रामकुमार को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां पहुंचने से पहले ही रामकुमार की जान चली गई। सूचना पर उनकी पत्नी कुसुमा देवी, पुत्र नरेंद्र, अनिल, शिवा, हरपाल व पुत्री चांदनी पड़ीं।
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पकड़ने का दावा खोखला, हाईवे से गांव तक घूम रहे छुट्टा पशु
प्रशासन का दावा है कि छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में भेजा गया है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। हाईवे से लेकर गांवों तक पशुओं के झुंड घूम रहे हैं। किसान जान जोखिम में डालकर रातभर फसलों की रखवाली करते हैं।
खुटार से पुवायां मार्ग पर पशुओं का पहला झुंड श्रीराम खांडसारी मिल के पास अक्सर मिल जाएगा। इसमें 20 से 50 तक पशु रहते हैं। इसके बाद गांव रूजहा कलां के पास, रामपुर कलां के पास, लक्ष्मीपुर मोड़, गंगसरा, बितौनी और धारा के पास छुट्टा पशु हाईवे पर बैठे रहते हैं।
गांव रसवां कलां, राठ, कुभियां माफी, सिल्हुआ, रूजहा कलां, नरौठा सहित कई गांवों के पास पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। छुट्टा पशु जरा सी चूक होने पर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और कई सांड़ तो भगाए जाने पर हमलावर हो उठते हैं। ऐसे सांड़ों को किसान एकजुट होकर भगाते हैं, तब सांड़ आसपास के दूसरे गांवों में चले जाते हैं और वहां आतंक मचाते हैं।
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छुट्टा पशुओं के हमलों में हुईं मौतें
- 30 जून, 2024 में सिंधौली के मिश्रीपुर गांव निवासी संजय सिंह, 20 अगस्त 2024 को जलालाबाद के शाहपुर गांव निवासी चरन सिंह व 15 अक्तूबर 2024 में बंडा के पिपरा जप्ती गांव निवासी ओमप्रकाश की सांड़ के हमले में जान गई। वहीं, 18 दिसंबर 2024 में मदनापुर के बरखेड़ा जैपाल गांव के पास पशु से टकराकर कार सवार दंपती, उनके दो बच्चे समेत सात लोगों की मृत्यु हो गई थी। 13 जनवरी 2025 को मदनापुर के नरदरा गांव निवासी लज्जावती ने सांड़ के हमले में दम तोड़ा था। 19 जनवरी, 2025 में निगोही के घाटबोझ गांव निवासी लीलावती को सांड़ ने पटककर मार डाला था। 21 जनवरी, 2025 को निगोही के चकौरा गांव निवासी अजयवीर, तीन मार्च 2025 में तिलहर गांव सुनौरा अजमतपुर निवासी विनीता व आठ मार्च, 2025 में अल्हागंज के लालपुर इमलिया निवासी किसान सरुरेंद्र की फसल की रखवाली करते समय सांड़ के हमले में मौत हो गई थी।
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प्रकरण संज्ञान में आया है। मृतक का पंचनामा कराकर सहायता के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। छुट्टा पशुओं के लिए खुटार के खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए जाएंगे। पशुओं को संरक्षित कराया जाएगा।
संजय पांडे, एसडीएम पुवायां
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गांव रुजहा कलां निवासी 48 वर्षीय रामकुमार साइकिल मिस्त्री थे। उन्होंने गांव के मोड़ पर ही खोखा रखा हुआ था। बृहस्पतिवार को वह दुकान पर काम कर रहे थे। पूर्वाह्न लगभग साढ़े 11 बजे वह खोखे के पीछे गए तो वहां खड़े सांड़ ने रामकुमार पर हमला कर दिया। रामकुमार के चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और सांड़ को भगाया।
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जानकारी पाकर परिजन भी मौके पर पहुंचे और 108 सेवा की एंबुलेंस से रामकुमार को सीएचसी में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद डाॅक्टर ने रामकुमार को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां पहुंचने से पहले ही रामकुमार की जान चली गई। सूचना पर उनकी पत्नी कुसुमा देवी, पुत्र नरेंद्र, अनिल, शिवा, हरपाल व पुत्री चांदनी पड़ीं।
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पकड़ने का दावा खोखला, हाईवे से गांव तक घूम रहे छुट्टा पशु
प्रशासन का दावा है कि छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में भेजा गया है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। हाईवे से लेकर गांवों तक पशुओं के झुंड घूम रहे हैं। किसान जान जोखिम में डालकर रातभर फसलों की रखवाली करते हैं।
खुटार से पुवायां मार्ग पर पशुओं का पहला झुंड श्रीराम खांडसारी मिल के पास अक्सर मिल जाएगा। इसमें 20 से 50 तक पशु रहते हैं। इसके बाद गांव रूजहा कलां के पास, रामपुर कलां के पास, लक्ष्मीपुर मोड़, गंगसरा, बितौनी और धारा के पास छुट्टा पशु हाईवे पर बैठे रहते हैं।
गांव रसवां कलां, राठ, कुभियां माफी, सिल्हुआ, रूजहा कलां, नरौठा सहित कई गांवों के पास पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। छुट्टा पशु जरा सी चूक होने पर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और कई सांड़ तो भगाए जाने पर हमलावर हो उठते हैं। ऐसे सांड़ों को किसान एकजुट होकर भगाते हैं, तब सांड़ आसपास के दूसरे गांवों में चले जाते हैं और वहां आतंक मचाते हैं।
छुट्टा पशुओं के हमलों में हुईं मौतें
- 30 जून, 2024 में सिंधौली के मिश्रीपुर गांव निवासी संजय सिंह, 20 अगस्त 2024 को जलालाबाद के शाहपुर गांव निवासी चरन सिंह व 15 अक्तूबर 2024 में बंडा के पिपरा जप्ती गांव निवासी ओमप्रकाश की सांड़ के हमले में जान गई। वहीं, 18 दिसंबर 2024 में मदनापुर के बरखेड़ा जैपाल गांव के पास पशु से टकराकर कार सवार दंपती, उनके दो बच्चे समेत सात लोगों की मृत्यु हो गई थी। 13 जनवरी 2025 को मदनापुर के नरदरा गांव निवासी लज्जावती ने सांड़ के हमले में दम तोड़ा था। 19 जनवरी, 2025 में निगोही के घाटबोझ गांव निवासी लीलावती को सांड़ ने पटककर मार डाला था। 21 जनवरी, 2025 को निगोही के चकौरा गांव निवासी अजयवीर, तीन मार्च 2025 में तिलहर गांव सुनौरा अजमतपुर निवासी विनीता व आठ मार्च, 2025 में अल्हागंज के लालपुर इमलिया निवासी किसान सरुरेंद्र की फसल की रखवाली करते समय सांड़ के हमले में मौत हो गई थी।
प्रकरण संज्ञान में आया है। मृतक का पंचनामा कराकर सहायता के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। छुट्टा पशुओं के लिए खुटार के खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए जाएंगे। पशुओं को संरक्षित कराया जाएगा।
संजय पांडे, एसडीएम पुवायां

खुटार के गांव रूजहा कलां के रामकुमार का फाइल फोटो। स्रोत परिजन