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Shahjahanpur News: आर्गेनो डीकंपोजर से नरई सड़ाकर पर्यावरण और मृदा उर्वरता बचाएं

Fri, 13 Oct 2023 12:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 13 Oct 2023 12:03 AM IST
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Save environment and soil fertility by decomposing grass with Organo decomposer
निदेशक डॉ. सुधीर शुक्ला। संस्था
शाहजहांपुर। किसान कंबाइन या हार्वेस्टर से धान की कटाई के बाद फसल अवशेष (नरई) को खेत मे ही जला देते है, जो कि गलत है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक संरचना और सूक्ष्म जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं भी होती रहती हैं। गन्ना शोध परिषद के निदेशक डाॅ. सुधीर शुक्ल ने आज यहां बैठक के दौरान यह जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि उप्र गन्ना शोध परिषद में फसलों के अवशेष जैसे नरई, गन्ने की सूखी पत्तियां, पुआल इत्यादि को खेत में ही सड़ाने के लिए जीवाणु कल्चर आर्गेनो डीकंपोजर विकसित किया गया है। इससे मात्र 30 से 45 दिनों में ही फसलों के अवशेष खेत में ही सड़ जाते हैं। इससे मृदा के कार्बनिक स्तर में वृद्धि के साथ-साथ लाभदायक जीवाणुओं की संख्या में भी वृद्धि होती है।
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निदेशक ने इसके प्रयोग के संबंध में बताया कि आर्गेनो डीकम्पोजर को 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 100 किग्रा कंपोस्ट खाद और प्रेसमड में मिलाकर पूरे खेत में पहले प्रयोग करते हैं। फिर अगले दिन सिंचाई करने के पश्चात 40 किग्रा यूरिया और 50 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट प्रति हेक्टयेर की दर से खेत में टॉप ड्रेसिंग करने के पश्चात पर्याप्त नमी की दशा में ट्रैक्टर चालित डिस्क हैरो से पूरे खेत की जुताई कर दी जाती है।उन्होंने कहा कि इससे खेत की मिट्टी ऊपर और फसल अवशेष नीचे दब जाते हैं। बाद में पूरे खेत की सिंचाई कर दी जाती है। आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अंतराल पर पर्याप्त नमी की दशा में दो से तीन जोताई करके सिंचाई करते रहना चाहिए। इस प्रकार 30-45 दिन में नरई अथवा गन्ने की सूखी पत्तियां सड़कर कंपोस्ट खाद का काम करने लगती हैं।
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शोध परिषद द्वारा विकसित आर्गेनोडीकम्पोजर मृदा संरचना तथा मृदा की जलधारण क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने में कृषकों के लिए बहुत ही उपयोगी है। प्रसार अधिकारी एसके पाठक ने बताया कि इसके उपयोग से हम नरई को खेत मे सड़ाकर पर्यावरण प्रदूषण को रोकने मे मददगार साबित हो सकते है।



ऐसे प्राप्त करें डीकंपोजर
यह जीवाणु कल्चर शोध परिषद से किसी भी कार्यदिवस में प्राप्त किया जा सकता है। इसके संबंध में अधिक जानकारी के लिए शोध परिषद की हेल्पलाइन 05842-222509 और वैज्ञानिक अधिकारी डाॅ. एसके विश्वकर्मा के मोबाइल नंबर- 6389025313 पर संपर्क कर सकते हैं।
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