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Shahjahanpur News: सती ने सीता रूप में श्रीराम की ली परीक्षा
Thu, 03 Oct 2024 05:04 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 03 Oct 2024 05:04 AM IST
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शाहजहांपुर। ओसीएफ के रामलीला मंच से बुधवार को ऑर्डनेंस ड्रामेटिक क्लब के कलाकारों ने सीता के रूप में सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा लिए जाने व देवी पार्वती के कठोर तप और बाद में उसी तप के प्रभाव से भगवान शिव को पति के रूप में वरण करने आदि कई प्रसंगों का मंचन किया। मंच की आकर्षक पृष्ठभूमि के साथ नपे-तुले संवादों और कलाकारों के स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखा।
मंचन के शुरुआती दृश्य में ऋषि भारद्वाज-याज्ञवल्क्य के बीच संवाद होता है। बाद में दिखाया गया कि सती सीताजी का रूप रखकर किस प्रकार श्रीराम की परीक्षा लेती हैं और प्रभु श्रीराम उनको पहचान लेने पर माता कहकर बुलाते हैं। वन में अकेली देखकर यह भी पूछते हैं कि भोलेनाथ कहां हैं। सती अपनी त्रुटि पर पछतावा कर कैलाश चली जाती हैं। ध्यान योग से शिव जी देख चुके हैं कि सती ने सीता का रूप धारण किया। इसलिए वह सती को माता समान मानकर यह निर्णय करते हैं कि इस देह से उनका सती से मिलना नहीं होगा।
मंचन में दिखाया गया कि शिव जी द्वारा सती का त्याग करने के बाद दक्ष के घर पर यज्ञ का आयोजन होता है। राजा दक्ष इसमें शिव व सती को आमंत्रित नहीं करते, लेकिन पति की इच्छा के विरुद्ध सती चली जाती हैं। पति के अपमान से क्षुब्ध होकर सती के यज्ञ कुंड में समाकर शरीर त्याग करने का दृश्य प्रभावशाली रहा। दक्ष का विध्वंस, महादेव द्वारा कामदेव का नाश, सती परीक्षा, शिव विवाह आदि दृश्य भी आकर्षक रहे। इससे पूर्व, मेला महासचिव ऋषि, सचिव अमन सक्सेना, बी राजा मणि आदि ने देव स्वरूपों की झांकी मंच पर उतारकर मंचन आरंभ कराया।
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व्यवस्था में मंचन सचिव देवेश दीक्षित, संयुक्त सचिव एवं निर्देशक अंकित सक्सेना, सहायक निदेशक सुहेल मोहम्मद, प्रभारी महेंद्र दीक्षित, पर्यवेक्षक सुरक्षा राम मोहन अग्निहोत्री आदि का सहयोग रहा। मंचन में अंकित सक्सेना, रोहित सक्सेना , देवेंद्र पाल, रानी मिश्रा, अनामिका वर्मा आदि ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।
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मंचन के शुरुआती दृश्य में ऋषि भारद्वाज-याज्ञवल्क्य के बीच संवाद होता है। बाद में दिखाया गया कि सती सीताजी का रूप रखकर किस प्रकार श्रीराम की परीक्षा लेती हैं और प्रभु श्रीराम उनको पहचान लेने पर माता कहकर बुलाते हैं। वन में अकेली देखकर यह भी पूछते हैं कि भोलेनाथ कहां हैं। सती अपनी त्रुटि पर पछतावा कर कैलाश चली जाती हैं। ध्यान योग से शिव जी देख चुके हैं कि सती ने सीता का रूप धारण किया। इसलिए वह सती को माता समान मानकर यह निर्णय करते हैं कि इस देह से उनका सती से मिलना नहीं होगा।
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मंचन में दिखाया गया कि शिव जी द्वारा सती का त्याग करने के बाद दक्ष के घर पर यज्ञ का आयोजन होता है। राजा दक्ष इसमें शिव व सती को आमंत्रित नहीं करते, लेकिन पति की इच्छा के विरुद्ध सती चली जाती हैं। पति के अपमान से क्षुब्ध होकर सती के यज्ञ कुंड में समाकर शरीर त्याग करने का दृश्य प्रभावशाली रहा। दक्ष का विध्वंस, महादेव द्वारा कामदेव का नाश, सती परीक्षा, शिव विवाह आदि दृश्य भी आकर्षक रहे। इससे पूर्व, मेला महासचिव ऋषि, सचिव अमन सक्सेना, बी राजा मणि आदि ने देव स्वरूपों की झांकी मंच पर उतारकर मंचन आरंभ कराया।
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व्यवस्था में मंचन सचिव देवेश दीक्षित, संयुक्त सचिव एवं निर्देशक अंकित सक्सेना, सहायक निदेशक सुहेल मोहम्मद, प्रभारी महेंद्र दीक्षित, पर्यवेक्षक सुरक्षा राम मोहन अग्निहोत्री आदि का सहयोग रहा। मंचन में अंकित सक्सेना, रोहित सक्सेना , देवेंद्र पाल, रानी मिश्रा, अनामिका वर्मा आदि ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।