शाहजहांपुर में बाढ़ से हाहाकार: रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 76 सेंटीमीटर ऊपर, तीन दर्जन गांव जलमग्न
रामगंगा और बहगुल नदियों का जलस्तर बढ़ने से अल्हागंज के करीब तीन दर्जन गांवों में बाढ़ की गंभीर स्थिति है। घरों-रास्तों पर पानी भरा है और फसलें डूब चुकी हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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रामगंगा और बहगुल नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। शुक्रवार सुबह अल्हागंज के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार के मुकाबले करीब 20 सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान से 76 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। इससे क्षेत्र के करीब तीन दर्जन गांव प्रभावित हैं। कई गांवों में लोगों के घरों तक पानी पहुंच गया है, जबकि गलियों और रास्तों पर घुटनों तक पानी भरा है।
कसारी कलां, कसारी खुर्द, कुंडरी, मंझरा, उइला और थाथरमई समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। पानी नगर के पास याकूबपुर तिराहे तक पहुंच गया है। घरों में पानी भरने से लोगों के सामने खाने-पीने, सोने-बैठने और आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है। कई परिवार गांव के बाहर सड़क किनारे पन्नी तानकर रहने को मजबूर हैं।
कसारी गांव को जाने वाली सड़क पर करीब 300 मीटर हिस्से में तेज बहाव के साथ पानी सड़क के ऊपर से गुजर रहा है। तिकोलाघाट समेत कई गांवों के रास्ते भी जलमग्न हैं। तेज बहाव के कारण लोग नाव और मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं। खेतों में पहले से भरा पानी बढ़ने के कारण कई एकड़ फसल पूरी तरह डूब गई है।
बाढ़ के बीच बीमार लोगों, बच्चों और पशुओं को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। मड़ैया गुजरान निवासी जगदीश और चितरऊ निवासी बलबीर व रघुनंदन ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में इतनी विकराल बाढ़ नहीं आई। इस बार फसल के साथ घरों में रखा सामान भी खराब होने का डर है। पुलिस प्रभावित गांवों में एनाउंस कर लोगों को पानी से दूर रहने और सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील कर रही है। प्रशासन की टीमें भी प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रही हैं।
तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्र की लगातार निगरानी कराई जा रही है। आवागमन के लिए नाव और मोटरबोट की व्यवस्था की गई है। प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है।