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रोजा-बनतारा के बीच दोहरीकरण का काम पूरा, आज से होगा स्पीड ट्रायल
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दोहरीकरण कार्य के दौरान रोजा में बनाया गया नया प्लेटफार्म
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। रोजा-बनतारा के बीच रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण का काम पूरा हो चुका है। अब 14 दिसंबर से दोनों स्टेशनों के बीच स्पीड ट्रायल किया जाएगा। इसको लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। स्पीड ट्रायल के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू किए जाने की संस्तुति की जाएगी।
पहले रोजा से सीतापुर के बीच सिग्नल लाइन पड़ी थी। इसके दोहरीकरण का काम किया जा रहा है। पहले और दूसरे चरण का काम पूरा हो चुका था। अब तीसरे चरण के तहत रोजा से बरतारा तक दोहरीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। इसके बाद चौथे चरण में नेरी से सीतापुर कैंट तक दोहरीकरण का कार्य होगा। दोहरीकरण होने के बाद गोरखपुर जाने वाली अधिकतर ट्रेनें इसी रूट से निकाली जाएंगी।
इस रूट से निकलने पर लगभग 100 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। वहीं यात्री भाड़ा भी कम होगा। रोजा-बरतारा के बीच दोहरकरण का लगभग पूरा हो गया है। 14 दिसंबर से रोजा और बरतारा के बीच ट्रेनों का स्पीड ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल 31 दिसंबर तक चलेगा। इसी बीच किसी भी दिन रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) निरीक्षण कर सकते हैं। सीआरएस निरीक्षण के बाद रेल संचालन को हरी झंडी मिल जाएगी।
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इससे समय भी कम लगेगा और डीजल की भी बचत होगी। वहीं लोको पायलटों को अधिक समय तक ड्यूटी करनी पड़ती थी, कई बार तो 10 घंटे से अधिक होने पर रोजा-सीतापुर ब्रांच लाइन पर लोको पायलट ट्रेन छोड़ कर चले जाते थे। लेकिन दोहरीलाइन होने पर कम समय में ट्रेन पहुंचेगी।
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पहले रोजा से सीतापुर के बीच सिग्नल लाइन पड़ी थी। इसके दोहरीकरण का काम किया जा रहा है। पहले और दूसरे चरण का काम पूरा हो चुका था। अब तीसरे चरण के तहत रोजा से बरतारा तक दोहरीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। इसके बाद चौथे चरण में नेरी से सीतापुर कैंट तक दोहरीकरण का कार्य होगा। दोहरीकरण होने के बाद गोरखपुर जाने वाली अधिकतर ट्रेनें इसी रूट से निकाली जाएंगी।
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इस रूट से निकलने पर लगभग 100 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। वहीं यात्री भाड़ा भी कम होगा। रोजा-बरतारा के बीच दोहरकरण का लगभग पूरा हो गया है। 14 दिसंबर से रोजा और बरतारा के बीच ट्रेनों का स्पीड ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल 31 दिसंबर तक चलेगा। इसी बीच किसी भी दिन रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) निरीक्षण कर सकते हैं। सीआरएस निरीक्षण के बाद रेल संचालन को हरी झंडी मिल जाएगी।
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इससे समय भी कम लगेगा और डीजल की भी बचत होगी। वहीं लोको पायलटों को अधिक समय तक ड्यूटी करनी पड़ती थी, कई बार तो 10 घंटे से अधिक होने पर रोजा-सीतापुर ब्रांच लाइन पर लोको पायलट ट्रेन छोड़ कर चले जाते थे। लेकिन दोहरीलाइन होने पर कम समय में ट्रेन पहुंचेगी।