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पुलिस को निष्पक्षता से कार्य करने के लिए नहीं मिल रहा बेहतर राजनीतिक वातावरण : प्रो. बलराज
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शाहजहांपुर। एसएस लॉ कॉलेज में मंगलवार को आपराधिक न्याय प्रणाली में पुलिस की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें पुलिस की कार्यशैली को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय सेमिनार के मुख्य अतिथि राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो. बलराज सिंह चौहान ने कहा कि पुलिस को निष्पक्षता से कार्य करने के लिए बेहतर राजनीतिक वातावरण की जरूरत है। अगर पुलिस की कार्यशैली में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप न किया जाए, तो पुलिस अपराधियों से निपटने के लिए सक्षम है। बोले कि विकास के साथ पुलिस से हमारी अपेक्षाएं बढ़ रही है, लेकिन करोना काल में पुलिस की एक नई कार्यशैली देखने को मिली। वह जनहित छवि वाली पुलिस ने अपनी नई भूमिका अदा करते हुए जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में विधि संकाय अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने कहा कि पुलिस के प्रति समाज की जो छवि है, वह अनुकूल नहीं है। लंबे समय से पुलिस की कार्यप्रणाली देखने पर ज्ञात होता है कि जनता की भावनाओं से जुड़े अपराधों के निष्पादन में पुलिस तत्परता नहीं दिखाती और उन्हें मामूली से अपराध कह कर लंबित कर देती है, इस प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. वीके सिंह ने कहा कि किसी भी देश में पुलिस को एक महत्वपूर्ण राज्य अंग के रूप में माना जाता है, जिनको राज्य द्वारा मुख्य जिम्मेदारी राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखना, राज्य द्वारा पारित कानूनों का पालन कराना, राज्य और नागरिकों की संपत्ति की रक्षा करने का दायित्व, आतंकवाद से निपटने का काम दिया गया है।
सेमिनार में ई-स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक शैलेंद्र सिंह, एसएस कॉलेज के सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा, प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा, अंशुमान मैसी, डॉ. अभिषेक तिवारी, आशुतोष तिवारी, डॉ. नलनीश चंद्र सिंह, डॉ. हरिचरण सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय सेमिनार के मुख्य अतिथि राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो. बलराज सिंह चौहान ने कहा कि पुलिस को निष्पक्षता से कार्य करने के लिए बेहतर राजनीतिक वातावरण की जरूरत है। अगर पुलिस की कार्यशैली में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप न किया जाए, तो पुलिस अपराधियों से निपटने के लिए सक्षम है। बोले कि विकास के साथ पुलिस से हमारी अपेक्षाएं बढ़ रही है, लेकिन करोना काल में पुलिस की एक नई कार्यशैली देखने को मिली। वह जनहित छवि वाली पुलिस ने अपनी नई भूमिका अदा करते हुए जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।
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महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में विधि संकाय अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने कहा कि पुलिस के प्रति समाज की जो छवि है, वह अनुकूल नहीं है। लंबे समय से पुलिस की कार्यप्रणाली देखने पर ज्ञात होता है कि जनता की भावनाओं से जुड़े अपराधों के निष्पादन में पुलिस तत्परता नहीं दिखाती और उन्हें मामूली से अपराध कह कर लंबित कर देती है, इस प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. वीके सिंह ने कहा कि किसी भी देश में पुलिस को एक महत्वपूर्ण राज्य अंग के रूप में माना जाता है, जिनको राज्य द्वारा मुख्य जिम्मेदारी राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखना, राज्य द्वारा पारित कानूनों का पालन कराना, राज्य और नागरिकों की संपत्ति की रक्षा करने का दायित्व, आतंकवाद से निपटने का काम दिया गया है।
सेमिनार में ई-स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक शैलेंद्र सिंह, एसएस कॉलेज के सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा, प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा, अंशुमान मैसी, डॉ. अभिषेक तिवारी, आशुतोष तिवारी, डॉ. नलनीश चंद्र सिंह, डॉ. हरिचरण सिंह यादव आदि मौजूद रहे।