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Shahjahanpur News: केंद्रों के सामने धान के लगे ढेर... खरीद या हो रहा खेल
Wed, 23 Oct 2024 02:34 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 23 Oct 2024 02:34 AM IST
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पुवायां मंडी में लगे धान के ढेर। संवाद
पुवायां। मंडी में लगे आरएफसी के केंद्रों के सामने धान के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन किसानों का अता-पता नहीं है। 22 दिन बीतने के बाद भी किसी भी जगह एक हजार क्विंटल धान नहीं खरीदा गया है। ऐसे में खरीद में खेल होने के आसार हैं।
मंडी में आरएफसी के दस केंद्र स्वीकृत हैं। कोटेदारों को मिट्टी मिला गेहूं भेजे जाने के मामले में कर्मचारियों के निलंबन के चलते सेंटर संख्या दो, तीन, छह और सात बंद हैं। बाकी केंद्रों के सामने धान के ढेर लगे हैं, जो एक-दूसरे में मिल भी गए हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर किसानों ने धान के ढेर सूखने के लिए लगा रखे हैं तो वे अपना धान दूसरे के ढेर में क्यों मिलने दे रहे हैं। एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू होने के 22 दिन बाद भी एक भी केंद्र ऐसा नहीं है, जिस पर एक हजार क्विंटल धान की तौल हुई हो।
22 अक्तूबर तक आरएफसी के केंद्र संख्या एक पर 900 क्विंटल, चार पर 917 क्विंटल, पांच पर 751 क्विंटल, आठ पर 850 क्विंटल, नौ पर 739 क्विंटल, दस पर 832 क्विंटल धान खरीदा गया है। जबकि, प्रति केंद्र पर खरीद का लक्ष्य 31 हजार क्विंटल है। हर वर्ष आरएफसी के केंद्र खरीद में सबसे आगे रहते हैं। ऐसे में लक्ष्य कैसे पूरा होगा। साफ है कि आढ़तों और राइस मिलों पर खरीदे गए धान से लक्ष्य पूरा करने की तैयारी की गई है।
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धान कटे 15 दिन बीते तो क्यों खत्म नहीं हुई नमी
एएमओ रंजना सिंह का कहना है कि धान की तौल 17 प्रतिशत नमी पर होती है, लेकिन 20 से 21 प्रतिशत नमी आ रही है। इस कारण खरीद पीछे चल रही है। धरातल पर स्थिति यह है कि पुवायां तहसील में अब कहीं भी धान कटना शेष नहीं है। धान कटने के बाद खेतों में आलू की बोआई तक हो चुकी है। गेहूं के लिए खेत तैयार हो चुके हैं। धान कटे हुए कई दिन बीतने के बाद भी धान में ज्यादा नमी कैसे आ रही है। बता दें कि ज्यादा दिन नमी में धान रखा जाएगा, तो वह सड़ने लगेगा और काला पड़ जाएगा। ऐसे में किसान धान को तत्काल ही बेच देते हैं। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडे मंगलवार को भी पुवायां मंडी पहुंचे और केंद्रों का निरीक्षण किया, लेकिन धान के ढेर लगाए किसानों के बारे में जानकारी की जरूरत नहीं समझी। अधिकारी निरीक्षण के नाम पर सेंटर प्रभारियों से ही बात कर चले जाते हैं।
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नवंबर और दिसंबर में लक्ष्य हो जाएगा पूरा
पुवायां क्षेत्र में तमाम किसान अपना धान राइस मिलों और आढ़तों पर बेच चुके हैं। राइस मिल मालिक किसानों का पंजीकरण करा चुके हैं और खेती के कागजात, आधार कार्ड, बैंक खातों की जानकारी जमा कराए जा रहे हैं। जब किसानों ने धान सेंटर पर बिक्री न कर मिलों और आढ़तों पर बेचा है तो उनसे कागजात क्यों जमा कराए जा रहे हैं? किसानों के अनुसार, उनसे उधार में धान खरीदा गया है, कागजात भी लिए गए हैं और भुगतान कुछ दिन बाद करने की बात की जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि सेंटरों पर अंगूठा लगवाकर धान खरीद दिखाने की तैयारी चल रही है।
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पुवायां में केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। बड़े किसानों से संपर्क कर खरीद बढ़ाने को कहा गया है। जितना धान आया है, वह तोला जाएगा। कुछ किसान धान सूखने के लिए डाल कर चले जाते हैं, इस कारण ढेर लगे हैं।
राकेश मोहन पांडे, डिप्टी आरएमओ
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मंडी में आरएफसी के दस केंद्र स्वीकृत हैं। कोटेदारों को मिट्टी मिला गेहूं भेजे जाने के मामले में कर्मचारियों के निलंबन के चलते सेंटर संख्या दो, तीन, छह और सात बंद हैं। बाकी केंद्रों के सामने धान के ढेर लगे हैं, जो एक-दूसरे में मिल भी गए हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर किसानों ने धान के ढेर सूखने के लिए लगा रखे हैं तो वे अपना धान दूसरे के ढेर में क्यों मिलने दे रहे हैं। एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू होने के 22 दिन बाद भी एक भी केंद्र ऐसा नहीं है, जिस पर एक हजार क्विंटल धान की तौल हुई हो।
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22 अक्तूबर तक आरएफसी के केंद्र संख्या एक पर 900 क्विंटल, चार पर 917 क्विंटल, पांच पर 751 क्विंटल, आठ पर 850 क्विंटल, नौ पर 739 क्विंटल, दस पर 832 क्विंटल धान खरीदा गया है। जबकि, प्रति केंद्र पर खरीद का लक्ष्य 31 हजार क्विंटल है। हर वर्ष आरएफसी के केंद्र खरीद में सबसे आगे रहते हैं। ऐसे में लक्ष्य कैसे पूरा होगा। साफ है कि आढ़तों और राइस मिलों पर खरीदे गए धान से लक्ष्य पूरा करने की तैयारी की गई है।
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धान कटे 15 दिन बीते तो क्यों खत्म नहीं हुई नमी
एएमओ रंजना सिंह का कहना है कि धान की तौल 17 प्रतिशत नमी पर होती है, लेकिन 20 से 21 प्रतिशत नमी आ रही है। इस कारण खरीद पीछे चल रही है। धरातल पर स्थिति यह है कि पुवायां तहसील में अब कहीं भी धान कटना शेष नहीं है। धान कटने के बाद खेतों में आलू की बोआई तक हो चुकी है। गेहूं के लिए खेत तैयार हो चुके हैं। धान कटे हुए कई दिन बीतने के बाद भी धान में ज्यादा नमी कैसे आ रही है। बता दें कि ज्यादा दिन नमी में धान रखा जाएगा, तो वह सड़ने लगेगा और काला पड़ जाएगा। ऐसे में किसान धान को तत्काल ही बेच देते हैं। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडे मंगलवार को भी पुवायां मंडी पहुंचे और केंद्रों का निरीक्षण किया, लेकिन धान के ढेर लगाए किसानों के बारे में जानकारी की जरूरत नहीं समझी। अधिकारी निरीक्षण के नाम पर सेंटर प्रभारियों से ही बात कर चले जाते हैं।
नवंबर और दिसंबर में लक्ष्य हो जाएगा पूरा
पुवायां क्षेत्र में तमाम किसान अपना धान राइस मिलों और आढ़तों पर बेच चुके हैं। राइस मिल मालिक किसानों का पंजीकरण करा चुके हैं और खेती के कागजात, आधार कार्ड, बैंक खातों की जानकारी जमा कराए जा रहे हैं। जब किसानों ने धान सेंटर पर बिक्री न कर मिलों और आढ़तों पर बेचा है तो उनसे कागजात क्यों जमा कराए जा रहे हैं? किसानों के अनुसार, उनसे उधार में धान खरीदा गया है, कागजात भी लिए गए हैं और भुगतान कुछ दिन बाद करने की बात की जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि सेंटरों पर अंगूठा लगवाकर धान खरीद दिखाने की तैयारी चल रही है।
पुवायां में केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। बड़े किसानों से संपर्क कर खरीद बढ़ाने को कहा गया है। जितना धान आया है, वह तोला जाएगा। कुछ किसान धान सूखने के लिए डाल कर चले जाते हैं, इस कारण ढेर लगे हैं।
राकेश मोहन पांडे, डिप्टी आरएमओ