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Shahjahanpur News: घाटों पर कूड़े के ढेर... नदियों में गिर रहा नाले का गंदा पानी
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ख्वाजा फिरोज कॉलोनी के पास गर्रा नदी के किनारे लगा कूड़े का ढेर। संवाद
शाहजहांपुर। अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस के बहाने समुद्र तटों की सफाई पर जोर दिया जाता है, लेकिन समुद्र तक पहुंचने वाली नदियों को प्रदूषण से बचाने की चुनौती स्थानीय स्तर पर भी है। शाहजहांपुर से होकर गुजरने वाली खन्नौत और गर्रा नदियां लंबे समय से कूड़े और प्रदूषित पानी की मार झेल रही हैं। शहर के कई घाटों पर कूड़े के ढेर और नालों का गंदा पानी नदी में पहुंचने से पर्यावरण के साथ खेती और आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस 19 सितंबर को मनाया जाता है। एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि खन्नौत नदी के शहर में पीपल घाट, धोबी घाट, बंका घाट और बिसरात घाट हैं। कभी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र रहे इन घाटों की स्थिति अब खराब है। लालपुल मोक्षधाम और बंका घाट के आसपास कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। बिसरात घाट पर हनुमान प्रतिमा बनने के बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन आगे फिर गंदगी दिखाई देती है।
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सात नालों को किया जा रहा टैप
नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी के अनुसार जिले में 28 बड़े नाले हैं। इनमें सात नालों को नगर निगम की ओर से टैप (रास्ते में रोकर एसटीपी तक पहुंचाना) कर एसटीपी (सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि चार नालों पर बायोरेमेडिएशन की प्रक्रिया चल रही है। शेष नालों को भी टैप करने की प्रक्रिया चल रही है।
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फसलों तक पहुंच रहा दूषित पानी
जिला कृषि अधिकारी विकास किशोर ने बताया कि नदियों के किनारे प्रदूषित पानी से होने वाली जायद की फसलों पर असर पड़ रहा है। औद्योगिक प्रदूषण इसका बड़ा कारण है। नाइट्रोजन, पोटेशियम, जिंक और फास्फोरस की अधिकता फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती है। हैवी मेटल फसलों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। नदी किनारे खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा और मक्का जैसी फसलें होती हैं। प्रदूषित पानी से फसल की सिंचाई होने से इसका दुष्प्रभाव मानवों तक पहुंचता है।
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खन्नौत नदी किनारे बन रहे रिवर फ्रंट
हनुमतधाम से पक्के पुल तक बाईं ओर रिवर फ्रंट का निर्माण वर्ष मार्च 2024 में शुरू हुआ था। करीब 900 मीटर लंबा रिवर फ्रंट बनाया जा रहा है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत लोधीपुर में खन्नौत नदी पर रिवर फ्रंट बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। करीब 300 मीटर लंबा छठ घाट रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा।
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बिना शोधन औद्योगिक कचरा नदी में डालने की शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। नदी का प्रदूषण रोकने के लिए नालों का शोधन, औद्योगिक अपशिष्ट का ट्रीटमेंट और कचरे की रीसाइक्लिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाना जरूरी है।
-अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस 19 सितंबर को मनाया जाता है। एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि खन्नौत नदी के शहर में पीपल घाट, धोबी घाट, बंका घाट और बिसरात घाट हैं। कभी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र रहे इन घाटों की स्थिति अब खराब है। लालपुल मोक्षधाम और बंका घाट के आसपास कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। बिसरात घाट पर हनुमान प्रतिमा बनने के बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन आगे फिर गंदगी दिखाई देती है।
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सात नालों को किया जा रहा टैप
नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी के अनुसार जिले में 28 बड़े नाले हैं। इनमें सात नालों को नगर निगम की ओर से टैप (रास्ते में रोकर एसटीपी तक पहुंचाना) कर एसटीपी (सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि चार नालों पर बायोरेमेडिएशन की प्रक्रिया चल रही है। शेष नालों को भी टैप करने की प्रक्रिया चल रही है।
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फसलों तक पहुंच रहा दूषित पानी
जिला कृषि अधिकारी विकास किशोर ने बताया कि नदियों के किनारे प्रदूषित पानी से होने वाली जायद की फसलों पर असर पड़ रहा है। औद्योगिक प्रदूषण इसका बड़ा कारण है। नाइट्रोजन, पोटेशियम, जिंक और फास्फोरस की अधिकता फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती है। हैवी मेटल फसलों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। नदी किनारे खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा और मक्का जैसी फसलें होती हैं। प्रदूषित पानी से फसल की सिंचाई होने से इसका दुष्प्रभाव मानवों तक पहुंचता है।
खन्नौत नदी किनारे बन रहे रिवर फ्रंट
हनुमतधाम से पक्के पुल तक बाईं ओर रिवर फ्रंट का निर्माण वर्ष मार्च 2024 में शुरू हुआ था। करीब 900 मीटर लंबा रिवर फ्रंट बनाया जा रहा है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत लोधीपुर में खन्नौत नदी पर रिवर फ्रंट बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। करीब 300 मीटर लंबा छठ घाट रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा।
बिना शोधन औद्योगिक कचरा नदी में डालने की शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। नदी का प्रदूषण रोकने के लिए नालों का शोधन, औद्योगिक अपशिष्ट का ट्रीटमेंट और कचरे की रीसाइक्लिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाना जरूरी है।
-अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व

ख्वाजा फिरोज कॉलोनी के पास गर्रा नदी के किनारे लगा कूड़े का ढेर। संवाद

ख्वाजा फिरोज कॉलोनी के पास गर्रा नदी के किनारे लगा कूड़े का ढेर। संवाद