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डीजल-पेट्रोल में गिरावट के बावजूद नहीं घटा किराया
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 27 Feb 2015 11:54 PM IST
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इसे संयोग ही कहेंगे कि केंद्र में मोदी राज की शुरुआत होने के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। तब से कई बार पेट्रोल-डीजल के दाम घटे, लेकिन रेलवे और रोडवेज बसों की किराया दरों में कोई कमी नहीं आई। पिछले सात माह की पेट्रोलियम दरों पर निगाह डालें तो कीमतें 20 फीसदी कम हो चुकी हैं, लेकिन आम लोगों को सरकारी परिवहन सेवाओं से इसका प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल रहा।
गत वर्ष जुलाई मेें पेट्रोल 80.99 रुपये और डीजल 64.48 रुपये प्रति लीटर बिका। तब से कई बार पेट्रोलियम कीमतों का ग्राफ गिर चुका है। अब पेट्रोल 62.97 रुपये और डीजल 50.95 रुपये बिक रहा है। इस तरह पेट्रोल में 22.24 प्रतिशत और डीजल के भाव में 20.98 प्रतिशत की कमी आ गई। अब भी सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर करने वालों को सालभर पुराना किराया ही देना पड़ रहा है।
पेट्रोलियम की घटती कीमतेें: एक नजर
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दिनांक पेट्रोल डीजल
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31 जुलाई 2014 80.99 64.48
02 अगस्त 2014 79.82 64.48
16 अगस्त 2014 77.57 64.48
31 अगस्त 2014 75.65 64.48
19 अक्तूबर 2014 73.71 60.95
एक नवंबर 2014 71.20 58.58
एक दिसंबर 2014 70.24 57.71
16 दिसंबर 2014 68.16 55.65
17 जनवरी 2015 65.60 53.30
04 फरवरी 2015 62.97 50.95
(कीमतें रुपये प्रति लीटर हैं)
बरेली से सीतापुर तक 100 रुपये की बचत
वैगन आर, मारुति ऑल्टो आदि छोटी गाड़ियों से सफर किफायती साबित होने लगा है। व्यवसायी सचिन बाथम के अनुसार यह गाड़ियां बेहतर माइलेज देती हैं, पांच लीटर में बरेली, सीतापुर और 10 लीटर में लखनऊ पहुंचाती हैं। लग्जरी गाड़ियां पेट्रोल की ज्यादा खपत करती हैं। निजी वाहनों से यात्रा सस्ती साबित हो रही है।
सिर्फ जेब ढीली करना जानती हैं सरकारें
ऑटो सेक्टर और पेट्रोलियम व्यवसाय के जुड़े शहर के प्रमुख कारोबारी कुलदीप सिंह दुआ भी मानते हैं कि पेट्रोलियम के दाम घटने के बावजूद ट्रेन-रोडवेज बसों का किराया कम नहीं करना लोगों के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम की देखा-देखी प्राइवेट बस के किराए भी कम नहीं हो रहे।
किराया कम होना शासन के निर्णय पर निर्भर
‘डीजल के रेट भले ही गिर रहे हों, रोडवेज बसों का किराया कम होना परिवहन निगम मुख्यालय और शासन स्तर का पॉलिसी मैटर है। अभी किराया संशोधित किए जाने का कोई आदेश नहीं मिला है।’
- रामबहादुर यादव, एआरएम, शाहजहांपुर डिपो
रोडवेज से काफी कम है रेलवे किराया
‘रेलवे की किराया दरें उस वक्त भी स्थिर रहीं जब पेट्रोलियम के दाम बढ़ रहे थे। वर्तमान में भी रोडवेज की तुलना में रेलवे किराया बहुत कम है। यह बड़ौदा हाउस के निर्णय पर निर्भर करता है कि भविष्य में किराया कम होगा या नहीं।’
- एके गौतम, स्टेशन अधीक्षक, उत्तर रेलवे
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गत वर्ष जुलाई मेें पेट्रोल 80.99 रुपये और डीजल 64.48 रुपये प्रति लीटर बिका। तब से कई बार पेट्रोलियम कीमतों का ग्राफ गिर चुका है। अब पेट्रोल 62.97 रुपये और डीजल 50.95 रुपये बिक रहा है। इस तरह पेट्रोल में 22.24 प्रतिशत और डीजल के भाव में 20.98 प्रतिशत की कमी आ गई। अब भी सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर करने वालों को सालभर पुराना किराया ही देना पड़ रहा है।
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पेट्रोलियम की घटती कीमतेें: एक नजर
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दिनांक पेट्रोल डीजल
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31 जुलाई 2014 80.99 64.48
02 अगस्त 2014 79.82 64.48
16 अगस्त 2014 77.57 64.48
31 अगस्त 2014 75.65 64.48
19 अक्तूबर 2014 73.71 60.95
एक नवंबर 2014 71.20 58.58
एक दिसंबर 2014 70.24 57.71
16 दिसंबर 2014 68.16 55.65
17 जनवरी 2015 65.60 53.30
04 फरवरी 2015 62.97 50.95
(कीमतें रुपये प्रति लीटर हैं)
बरेली से सीतापुर तक 100 रुपये की बचत
वैगन आर, मारुति ऑल्टो आदि छोटी गाड़ियों से सफर किफायती साबित होने लगा है। व्यवसायी सचिन बाथम के अनुसार यह गाड़ियां बेहतर माइलेज देती हैं, पांच लीटर में बरेली, सीतापुर और 10 लीटर में लखनऊ पहुंचाती हैं। लग्जरी गाड़ियां पेट्रोल की ज्यादा खपत करती हैं। निजी वाहनों से यात्रा सस्ती साबित हो रही है।
सिर्फ जेब ढीली करना जानती हैं सरकारें
ऑटो सेक्टर और पेट्रोलियम व्यवसाय के जुड़े शहर के प्रमुख कारोबारी कुलदीप सिंह दुआ भी मानते हैं कि पेट्रोलियम के दाम घटने के बावजूद ट्रेन-रोडवेज बसों का किराया कम नहीं करना लोगों के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम की देखा-देखी प्राइवेट बस के किराए भी कम नहीं हो रहे।
किराया कम होना शासन के निर्णय पर निर्भर
‘डीजल के रेट भले ही गिर रहे हों, रोडवेज बसों का किराया कम होना परिवहन निगम मुख्यालय और शासन स्तर का पॉलिसी मैटर है। अभी किराया संशोधित किए जाने का कोई आदेश नहीं मिला है।’
- रामबहादुर यादव, एआरएम, शाहजहांपुर डिपो
रोडवेज से काफी कम है रेलवे किराया
‘रेलवे की किराया दरें उस वक्त भी स्थिर रहीं जब पेट्रोलियम के दाम बढ़ रहे थे। वर्तमान में भी रोडवेज की तुलना में रेलवे किराया बहुत कम है। यह बड़ौदा हाउस के निर्णय पर निर्भर करता है कि भविष्य में किराया कम होगा या नहीं।’
- एके गौतम, स्टेशन अधीक्षक, उत्तर रेलवे