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Shahjahanpur News: परीक्षा परिणाम के बाद अभिभावकों का रवैया महत्वपूर्ण, हताश न होने दें

Fri, 24 Apr 2026 01:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:25 AM IST
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Parents' Attitude After Exam Results Is Crucial Do Not Let Them Become Discouraged.
डॉ. अभिनव रस्तोगी, मानसिक रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज। - फोटो : 1
शाहजहांपुर। परीक्षा परिणाम आने के बाद बहुत से विद्यार्थी अपेक्षानुसार अंक न आने पर निराश हो जाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ का मानना है कि ऐसे समय में अभिभावकों का रवैया बहुत महत्वपूर्ण होता है। बच्चे को अपनत्व की जरूरत है। उसे अहसास दिलाएं कि अंकों से ज्यादा वे उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। परिणाम आने के बाद बच्चे पहले से ही घबराए हुए होते हैं, ऐसे में अभिभावकों को उपेक्षापूर्ण रवैया उन्हें हताशा की ओर ले जाता है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर का परिणाम आ गया है। कुछ चेहरों पर मुस्कान है, कुछ आंखें नम हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन इस भागदौड़ में हम एक जरूरी बात अक्सर भूल जाते हैं। परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता। यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता।
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परिणाम मापदंड है, प्रमाणपत्र नहीं। हमारी शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा का एक उद्देश्य होता है। यह जांचना कि आपने क्या सीखा, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि यह तय करें कि आप कितने काबिल हैं, कितने बुद्धिमान हैं, या जीवन में कितने सफल होंगे। परिणाम को एक दर्पण की तरह देखें। हर साल परीक्षा परिणाम के बाद कुछ बच्चे ऐसा कदम उठा लेते हैं जो वापस आने वाला नहीं होता है। यह दुखद सच्चाई हमें झकझोर देती है।
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डॉ. अभिनव ने कहा कि उनको विद्यार्थियों को सलाह है कि वे अगर आज बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहे हैं, उन्हें लग रहा है कि अब कुछ नहीं बचा तो अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। मां, पिता, दोस्त, शिक्षक, या किसी परामर्शदाता से बात कर सकते हैं।
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अभिभावक कुछ जरूरी बातें ध्यान रखें
- बच्चे को यह अहसास दिलाएं कि आप उससे प्यार करते हैं, उसके अंकों से नहीं।
-भाई-बहन और पड़ोसी के बच्चे से तुलना न करें।
-बच्चे को उसे बोलने दें, क्या हुआ? क्यों हुआ? से पहले तुम कैसे हो? पूछें।
-बच्चे का रोना, चुप रहना या उदास होना स्वाभाविक है। इसे नाटक मत कहें।
-एक-दो दिन बाद, जब माहौल ठंडा हो जाए, तब विकल्पों पर बात करें।
-अगर बच्चा खाना छोड़ रहा है, सोना बंद कर दिया है, या बहुत ज्यादा बदला-बदला लग रहा है तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जरूर मिलें।
(जैसा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया)
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