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Shahjahanpur News: अब 100 से अधिक गांवों को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य, स्क्रीनिंग शुरू
Tue, 16 Apr 2024 05:26 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 16 Apr 2024 05:26 AM IST
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शाहजहांपुर। वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त कराने की कवायद के तहत जिले की 51 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं। अब 100 से अधिक गांवों को टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। यहां स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने स्क्रीनिंग शुरू कर दी है।
जिले में टीबी के सक्रिय रोगी करीब 4500 हैं। उन्हें उपचार के साथ ही विभाग से मिलने वाली अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। ओपीडी में दवा लेने आने वाले मरीजों में टीबी जैसे लक्षण मिलने पर तुरंत ही उनके बलगम का नमूना लेकर जांच कराई जाती है। इसके अतिरिक्त गांवों की आशा कार्यकर्ताओं को बुखार, खांसी, बलगम आदि वाले मरीजों की जांच के लिए निर्देशित किया। को-ऑर्डिनेटर रंजीत सक्सेना बताते हैं कि प्रत्येक सीएचसी पर बलगम की जांच की सुविधा उपलब्ध है।
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गांवों में जांच के ये हैं मानक
-हर गांव में एक हजार की आबादी पर 30 लोगों की जांच की जा रही है। इसमें एक भी व्यक्ति टीबी रोग से ग्रस्त नहीं मिलता तब टीबी मुक्त ग्राम पंचायत मानी जाती है। एक से अधिक मरीज मिलने पर टीबी मुक्त ग्राम पंचायत नहीं मानी जाएगी।
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जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार करा रहे
-दो या तीन मरीज गांव में होने पर सुपरवाइजर और ग्राम प्रधान की मदद से गांवों में प्रचार-प्रसार कराया जाता है। टीबी के लक्षण के बारे में जानकारी देकर सचेत करते हैं। जिले की टीबी मुक्त होने वाली 51 ग्राम पंचायतों की निगरानी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। उनका सत्यापन भी पूर्व में किया जा चुका है। हालांकि, वहां के नतीजे सकारात्मक आए हैं।
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-4500 टीबी के सक्रिय रोगी जिले में हैं।
-200 से अधिक लोगों की जांच जिले में रोजाना होती है।
-40 लोगों की जांच पुराना अस्पताल स्थित टीबी केंद्र पर रोज होती है।
-500 रुपये टीबी के रोगी को प्रत्येक माह शासन से दिए जाते हैं।
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बीमारी के लक्षण-
-तीन सप्ताह से अधिक खांसी आना।
-छाती में दर्द, बलगम में खून आना।
-हर समय थकान महसूस होना।
-रात का पसीना, ठंड लगना।
-बुखार, भूख में कमी और वजन घटना।
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टीबी के मरीजों की तलाश के लिए स्क्रीनिंग चल रही है। हर ब्लॉक स्तर पर बलगम जांच केंद्र बनाए गए हैं। इस बार 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य है।
डॉ. आरके गौतम, सीएमओ
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जिले में टीबी के सक्रिय रोगी करीब 4500 हैं। उन्हें उपचार के साथ ही विभाग से मिलने वाली अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। ओपीडी में दवा लेने आने वाले मरीजों में टीबी जैसे लक्षण मिलने पर तुरंत ही उनके बलगम का नमूना लेकर जांच कराई जाती है। इसके अतिरिक्त गांवों की आशा कार्यकर्ताओं को बुखार, खांसी, बलगम आदि वाले मरीजों की जांच के लिए निर्देशित किया। को-ऑर्डिनेटर रंजीत सक्सेना बताते हैं कि प्रत्येक सीएचसी पर बलगम की जांच की सुविधा उपलब्ध है।
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गांवों में जांच के ये हैं मानक
-हर गांव में एक हजार की आबादी पर 30 लोगों की जांच की जा रही है। इसमें एक भी व्यक्ति टीबी रोग से ग्रस्त नहीं मिलता तब टीबी मुक्त ग्राम पंचायत मानी जाती है। एक से अधिक मरीज मिलने पर टीबी मुक्त ग्राम पंचायत नहीं मानी जाएगी।
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जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार करा रहे
-दो या तीन मरीज गांव में होने पर सुपरवाइजर और ग्राम प्रधान की मदद से गांवों में प्रचार-प्रसार कराया जाता है। टीबी के लक्षण के बारे में जानकारी देकर सचेत करते हैं। जिले की टीबी मुक्त होने वाली 51 ग्राम पंचायतों की निगरानी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। उनका सत्यापन भी पूर्व में किया जा चुका है। हालांकि, वहां के नतीजे सकारात्मक आए हैं।
-4500 टीबी के सक्रिय रोगी जिले में हैं।
-200 से अधिक लोगों की जांच जिले में रोजाना होती है।
-40 लोगों की जांच पुराना अस्पताल स्थित टीबी केंद्र पर रोज होती है।
-500 रुपये टीबी के रोगी को प्रत्येक माह शासन से दिए जाते हैं।
बीमारी के लक्षण-
-तीन सप्ताह से अधिक खांसी आना।
-छाती में दर्द, बलगम में खून आना।
-हर समय थकान महसूस होना।
-रात का पसीना, ठंड लगना।
-बुखार, भूख में कमी और वजन घटना।
टीबी के मरीजों की तलाश के लिए स्क्रीनिंग चल रही है। हर ब्लॉक स्तर पर बलगम जांच केंद्र बनाए गए हैं। इस बार 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य है।
डॉ. आरके गौतम, सीएमओ