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Shahjahanpur News: अब बीमा कंपनी करेगी फसल नुकसान का आकलन
Wed, 06 Mar 2024 01:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 06 Mar 2024 01:11 AM IST
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शाहजहांपुर। बारिश और ओलावृष्टि की वजह से किसानों की फसल नष्ट हो गई थी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए थे कि किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए। प्रशासन ने राजस्व, कृषि और बीमा कंपनी से संबंधित टीमें नुकसान का सर्वे करने के लिए लगाई हैं।
मंगलवार को आई रिपोर्ट के मुताबिक कांट, जलालाबाद और कलान तहसील के 27 गांवों में आठ से 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जबकि, बीमा का लाभ 30 फीसदी फसल के नुकसान के बाद दिया जाता है। इधर, नुकसान का सही आकलन करने के लिए बीमा कंपनी की टीमों को भी लगाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जिले में वर्तमान में 4,52,952 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से मात्र 7024 किसानों का कृषि बीमा है। बताया जा रहा है कि जानकारी के अभाव में किसान फसल बीमा नहीं करा पाए। जबकि, कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक किसानों को बीमा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मेले लगाए जाते हैं। गांव-गांव जाकर टीमें किसानों को बीमा का लाभ बताती है। इसके बाद भी किसान बीमा नहीं कराना चाहते, जब किसान क्रॉप लोन लेते हैं तो वह बीमा नहीं लेने का फार्म भरकर जमा कर देते हैं। इससे उनकी फसल का बीमा नहीं हो पाता है।
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यह है बीमा कराने की प्रक्रिया
किसान खतौनी लेकर किसी भी जनसेवा केंद्र, संबंधित बैंक या स्वयं पोर्टल से बीमा के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर किसान क्रेडिट कार्डधारक हैं तो उसके खाते से बीमा की रकम कट जाती है नहीं तो किसान को नकद राशि जमा करनी पड़ती है। गेहूं की फसल का बीमा प्रति हेक्टेयर 1400 रुपये की किस्त एकबार जमा होती है। इसमें संबंधित ग्राम पंचायत में 33 प्रतिशत नुकसान होने पर 93,300 रुपये की बीमा राशि दी जाती है। जबकि, सरसों में प्रति हेक्टेयर पर 1119 रुपये किस्त जमा होती है। 33 प्रतिशत नुकसान होने पर 74,600 रुपये की बीमा राशि दी जाती है।
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फोटो- 22
पांच एकड़ गेहूं की फसल ब्याज पर रकम लेकर बोई थी। मौसम की मार से फसल बर्बाद हो गई। फसल बीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अगर जानकारी होती तो बीमा जरूर करा लेता।
- सहदेव कुमार, कुर्रिया कलां
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फोटो- 24
चार बीघा जमीन बर्बाद हो गई। फसल बीमा के लाभ के बारे में कभी किसी ने बताया ही नहीं। अगर ऐसा होता तो जरूर बीमा कराता। इससे कम से कम लागत तो निकल ही आती।
कमलेश जाटव, नगलाजाजू
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फोटो- 26
10 एकड़ जमीन पर बटाई पर खेती की थी। फसल बीमा खेत मालिक ही करा सकता है। अपने तो पांच हजार बीघा पहले ही खेत मालिक को दे दिए थे। सारी फसल नष्ट हो गई है।
- रानू यादव, पथराखास
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फोेटो- 27
28 बीघा खेती में गेहूं की फसल की थी। बारिश और ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई। पहले बीमा कराया था। इसका लाभ नहीं मिलने पर बीमा कराना बंद कर दिया।
सीपू तिवारी, जसनपुर
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सर्वे चल रहा है जिस किसान की फसल का नुकसान मानक से अधिक होगा। उसको मुआवजा दिलाया जाएगा।
- डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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मंगलवार को आई रिपोर्ट के मुताबिक कांट, जलालाबाद और कलान तहसील के 27 गांवों में आठ से 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जबकि, बीमा का लाभ 30 फीसदी फसल के नुकसान के बाद दिया जाता है। इधर, नुकसान का सही आकलन करने के लिए बीमा कंपनी की टीमों को भी लगाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जिले में वर्तमान में 4,52,952 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से मात्र 7024 किसानों का कृषि बीमा है। बताया जा रहा है कि जानकारी के अभाव में किसान फसल बीमा नहीं करा पाए। जबकि, कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक किसानों को बीमा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मेले लगाए जाते हैं। गांव-गांव जाकर टीमें किसानों को बीमा का लाभ बताती है। इसके बाद भी किसान बीमा नहीं कराना चाहते, जब किसान क्रॉप लोन लेते हैं तो वह बीमा नहीं लेने का फार्म भरकर जमा कर देते हैं। इससे उनकी फसल का बीमा नहीं हो पाता है।
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यह है बीमा कराने की प्रक्रिया
किसान खतौनी लेकर किसी भी जनसेवा केंद्र, संबंधित बैंक या स्वयं पोर्टल से बीमा के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर किसान क्रेडिट कार्डधारक हैं तो उसके खाते से बीमा की रकम कट जाती है नहीं तो किसान को नकद राशि जमा करनी पड़ती है। गेहूं की फसल का बीमा प्रति हेक्टेयर 1400 रुपये की किस्त एकबार जमा होती है। इसमें संबंधित ग्राम पंचायत में 33 प्रतिशत नुकसान होने पर 93,300 रुपये की बीमा राशि दी जाती है। जबकि, सरसों में प्रति हेक्टेयर पर 1119 रुपये किस्त जमा होती है। 33 प्रतिशत नुकसान होने पर 74,600 रुपये की बीमा राशि दी जाती है।
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फोटो- 22
पांच एकड़ गेहूं की फसल ब्याज पर रकम लेकर बोई थी। मौसम की मार से फसल बर्बाद हो गई। फसल बीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अगर जानकारी होती तो बीमा जरूर करा लेता।
- सहदेव कुमार, कुर्रिया कलां
फोटो- 24
चार बीघा जमीन बर्बाद हो गई। फसल बीमा के लाभ के बारे में कभी किसी ने बताया ही नहीं। अगर ऐसा होता तो जरूर बीमा कराता। इससे कम से कम लागत तो निकल ही आती।
कमलेश जाटव, नगलाजाजू
फोटो- 26
10 एकड़ जमीन पर बटाई पर खेती की थी। फसल बीमा खेत मालिक ही करा सकता है। अपने तो पांच हजार बीघा पहले ही खेत मालिक को दे दिए थे। सारी फसल नष्ट हो गई है।
- रानू यादव, पथराखास
फोेटो- 27
28 बीघा खेती में गेहूं की फसल की थी। बारिश और ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई। पहले बीमा कराया था। इसका लाभ नहीं मिलने पर बीमा कराना बंद कर दिया।
सीपू तिवारी, जसनपुर
सर्वे चल रहा है जिस किसान की फसल का नुकसान मानक से अधिक होगा। उसको मुआवजा दिलाया जाएगा।
- डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व