{"_id":"5d964a4e8ebc3e93d2290b08","slug":"navratra-shahjahanpur-news-bly378767427","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसा मंदिर जहां नवरात्र परायण के बाद खुलते हैं कपाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐसा मंदिर जहां नवरात्र परायण के बाद खुलते हैं कपाट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुर्रिया कलां। गांव स्थित आदि शक्ति मां दुर्गा का लगभग चार सौ साल पुराना मंदिर आसपास के जनपदों में आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। शायद मां दुर्गा का यह पहला मंदिर होगा, जिसके कपाट नवरात्र परायण के बाद मात्र तीन दिन के लिए खोले जाते हैं।
मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर में दस महाविद्याओं की साधना की जा चुकी है। तंत्र-मंत्र के लिए भी मंदिर की महत्ता है। यह मंदिर साल में दो बार शारदीय और वासंतिक नवरात्र के बाद तीन-तीन दिनों के लिए ही खोला जाता है। खास बात यह भी है कि छह माह बाद तीन दिनों के लिए ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और उसके बाद देवी को स्थान छोड़ने का आवाहन किया जाता है। तीसरे दिन मूर्तियों को हटाकर दूसरे स्थान पर रख दिया जाता है। कहा जाता है कि पंडित सहतावन लाल दीक्षित ने मां की प्रतिमाओं की स्थापना तंत्र-मंत्र द्वारा कराई थी। मंदिर में शिवजी की मुस्कुराते हुए भी एक प्रतिमा है, जो अपने आप में अद्भुत है।
मंदिर परिसर में नवरात्र के बाद विशाल मेला लगता है, जिसमें नर्तकियों को नृत्य करने के लिए बुलाया जाता है, यह परंपरा आज भी जारी है। बड़े और बुजुर्ग बताते हैं कि आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि मंदिर के कपाट खुलने के बाद नृत्य न हुआ हो।
विज्ञापन
आठ को खुलेंगे मंदिर के कपाट
मंदिर के पुजारी गुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने बताया कि अति प्राचीन मंदिर की आसपास के कई जनपदों में महत्ता है। प्रतिवर्ष सैकड़ों भक्त मां भगवती के दर्शन के लिए कुर्रियाकलां पहुंचते हैं और माता के दर्शन कर मनौती मांगते हैं। इस बार आठ अक्तूबर को सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे, जो 10 अक्टूबर को दो बजे तक खुले रहेंगे और उसके बाद फिर छह माह के लिए बंद कर दिए जाएंगे। ब्यूरो
या देवि सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता ...
शाहजहांपुर। शारदीय नवरात्र में बृहस्पतिवार को मां भगवती के भक्तों ने मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता का आवाहन कर उनकी पूजा अर्चना की। इधर, शुक्रवार से नगर क्षेत्र समेत आसपास की फैक्ट्रियों में परंपरागत ढंग से मां भगवती के मंडप लगाए गए हैं, जो भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
नवरात्र के दौरान कृभको फर्टिलाइजर, रिलायंस टाउनशिप रोजा, ओसीएफ मंदिर, सदर बाजार अंतर्गत मां कालीबाड़ी मंदिर और लाला रामचरन लाल धर्मशाला में माता रानी का मंडप तैयार हो गया है। बंगाल के कारीगरों ने विशेष प्रकार की मिट्टी से मां का दरबार तैयार किया है। मां की मूर्तियों की दिव्यता और भव्यता देखते ही बनती है। वहीं, गुरुवार को भक्तों ने घरों में स्कंदमाता का आवाहन कर उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने माता रानी को कमल का फूल चढ़ाकर मनौती मांगी। खासतौर पर महिलाओं और युवतियों ने मंदिरों में मां भगवती की आरती कर प्रसाद अर्पित किया और बाद में छंदों और गीतों के माध्यम से माता का गुणगान किया।
विज्ञापन
मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर में दस महाविद्याओं की साधना की जा चुकी है। तंत्र-मंत्र के लिए भी मंदिर की महत्ता है। यह मंदिर साल में दो बार शारदीय और वासंतिक नवरात्र के बाद तीन-तीन दिनों के लिए ही खोला जाता है। खास बात यह भी है कि छह माह बाद तीन दिनों के लिए ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और उसके बाद देवी को स्थान छोड़ने का आवाहन किया जाता है। तीसरे दिन मूर्तियों को हटाकर दूसरे स्थान पर रख दिया जाता है। कहा जाता है कि पंडित सहतावन लाल दीक्षित ने मां की प्रतिमाओं की स्थापना तंत्र-मंत्र द्वारा कराई थी। मंदिर में शिवजी की मुस्कुराते हुए भी एक प्रतिमा है, जो अपने आप में अद्भुत है।
विज्ञापन
मंदिर परिसर में नवरात्र के बाद विशाल मेला लगता है, जिसमें नर्तकियों को नृत्य करने के लिए बुलाया जाता है, यह परंपरा आज भी जारी है। बड़े और बुजुर्ग बताते हैं कि आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि मंदिर के कपाट खुलने के बाद नृत्य न हुआ हो।
विज्ञापन
आठ को खुलेंगे मंदिर के कपाट
मंदिर के पुजारी गुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने बताया कि अति प्राचीन मंदिर की आसपास के कई जनपदों में महत्ता है। प्रतिवर्ष सैकड़ों भक्त मां भगवती के दर्शन के लिए कुर्रियाकलां पहुंचते हैं और माता के दर्शन कर मनौती मांगते हैं। इस बार आठ अक्तूबर को सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे, जो 10 अक्टूबर को दो बजे तक खुले रहेंगे और उसके बाद फिर छह माह के लिए बंद कर दिए जाएंगे। ब्यूरो
या देवि सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता ...
शाहजहांपुर। शारदीय नवरात्र में बृहस्पतिवार को मां भगवती के भक्तों ने मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता का आवाहन कर उनकी पूजा अर्चना की। इधर, शुक्रवार से नगर क्षेत्र समेत आसपास की फैक्ट्रियों में परंपरागत ढंग से मां भगवती के मंडप लगाए गए हैं, जो भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
नवरात्र के दौरान कृभको फर्टिलाइजर, रिलायंस टाउनशिप रोजा, ओसीएफ मंदिर, सदर बाजार अंतर्गत मां कालीबाड़ी मंदिर और लाला रामचरन लाल धर्मशाला में माता रानी का मंडप तैयार हो गया है। बंगाल के कारीगरों ने विशेष प्रकार की मिट्टी से मां का दरबार तैयार किया है। मां की मूर्तियों की दिव्यता और भव्यता देखते ही बनती है। वहीं, गुरुवार को भक्तों ने घरों में स्कंदमाता का आवाहन कर उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने माता रानी को कमल का फूल चढ़ाकर मनौती मांगी। खासतौर पर महिलाओं और युवतियों ने मंदिरों में मां भगवती की आरती कर प्रसाद अर्पित किया और बाद में छंदों और गीतों के माध्यम से माता का गुणगान किया।