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Munawwar Rana: शाहजहांपुर में मुनव्वर राना बोले थे- पीएम मोदी की मोहब्बत का कर्जदार था, तभी मिलने गया था

Mon, 15 Jan 2024 05:34 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 15 Jan 2024 05:34 PM IST
सार

शाहजहांपुर में मुनव्वर राना ने कहा था कि पुरस्कार वापसी करना मेरे गुस्से का इजहार था। लेकिन मेरी मां के इंतकाल पर पीएम मोदी ने अपने हाथ से लिखकर सांत्वना खत भेजा था। उनकी इस मोहब्बत का कर्जदार बन गया।

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Munawwar Rana had said that I was indebted to PM Modi for his love in Shahjahanpur
अंतरराष्ट्रीय शायर मुनव्वर राना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय शायर मुनव्वर राना का रविवार रात इंतकाल हो गया। शाहजहांपुर से भी उनकी यादें जुड़ी हुईं हैं। मुनव्वर राना ओसीएफ रामलीला मैदान व पुवायां में कवि सम्मेलन में शिरकत करने आए थे। केंद्र सरकार से नाराजगी के चलते अवार्ड वापसी का दौर चल रहा था। पुरस्कार वापस करने वालों में मुनव्वर राना भी शामिल थे। 27 मई 2017 को पुवायां में मुशायरे में शिरकत करने मुनव्वर राणा आए थे। 

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अवार्ड वापसी के बाद उन्होंने शाहजहांपुर में एक होटल में कहा था कि पुरस्कार वापसी करना मेरे गुस्से का इजहार था। लेकिन मेरी मां के इंतकाल पर पीएम मोदी ने अपने हाथ से लिखकर सांत्वना खत भेजा था। उनकी इस मोहब्बत का कर्जदार बन गया। तभी पीएम से मिलने के लिए गया था। पुवायां में वर्तमान एमएलसी डॉ. सुधीर गुप्ता के आवास पर आयोजित कवि सम्मेलन में शरीक होने पर उन्होंने अमर उजाला से तमाम मुद्दों पर बातचीत भी की थी। 
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मुनव्वर राना ने देश के हालात को पहले की अपेक्षा खराब बताते हुए कहा था कि साहित्य तक दलित और हिंदू-मुस्लिम में बंट गया है। अपना साहित्य अकादमी सम्मान लौटाने पर उन्होंने कहा था कि देश आजाद है, लेकिन कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं और देश के हालात से क्षुब्ध होकर ही उन्होंने सम्मान लौटाया है। 

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डॉ.सर्वेश अस्थाना के संचालन में पपलू लखनवी, कुंवर जावेद, इकबाल अशहर, विजय तिवारी, निकहत अमरोही आदि के साथ कविता पाठ के दौरान मुनव्वर राना से सुनाया था कि -

मैं इसके नाम उठाता हूं ये ऐसा नहीं करती,
ये मिट्टी मेरा हाथ को मैला नहीं करती।

ये शहीदों की जमीं है जिसे हिंदुस्तान कहते हैं,
ये बंजर होके भी बुजदिल कभी नहीं पैदा करती।


इसके अलावा उन्होंने किसी को घर मिला हिस्से या कोई दुकां आई, मैं सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई। मैंने पोछे थे किसी दिन आंसू, मुद्दतों मां ने धोया नहीं दुपट्टा अपना। इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां गुस्से में होती है तो रो देती है। उन्होंने मां पर कई कविताएं सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही पाई थी।

बोले थे- मर्दों के साथ भी होता है मीटू
ओसीएफ के कवि सम्मेलन में शिरकत करने आने के दौरान राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक मी-टू को लेकर हंगामा मचा था। उस समय मुनव्वर राना ने बेबाक अंदाज में कहा था कि महिलाओं के साथ ही मी-टू नहीं होता, बल्कि मर्दों के साथ भी होता है। वे बोलते नहीं हैं।
 
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