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नहीं फलता अनीति से कमाया धन
पुवायां।
Updated Fri, 03 Apr 2015 12:20 AM IST
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भागवत कथा मर्मज्ञ अनिल शास्त्री ने कहा कि संत संसार में आए और खुद कष्ट उठाकर संसार को सही रास्ता दिखाया और समाज से कुरीतियों को दूर की। तुलसी, सूर, कबीर आदि ने मानवता की सच्ची सेवा की।
गांव बिलसड़ी में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में उन्होंने बृहस्पतिवार को प्रवचन करते हुए कहा कि धनवान होना गलत नहीं है, लेकिन अनीति से धन कमाना गलत है। कमाए गए धन का कुछ हिस्सा दान जरूर करना चाहिए। जो लोग अनीतिपूर्वक धन और वैभव प्राप्त करते हैं, वह बारह वर्ष के अंदर कुल तक को ले डूबता है। यदि दुर्योधन अनीति पर नहीं होता और अपने पांडव भाइयों को उनका धन और राज्य दे देता तो वह निश्चित रूप से यश को प्राप्त होता, लेकिन उसने अनीति का रास्ता अख्तियार किया। दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र ने भी पुत्रमोह में फंस कर उसे कुछ नहीं कहा और अंत में सब कुछ नष्ट हो गया। सत्य की विजय का उदाहरण देते हुए उन्होंने सुनाया कि युधिष्टर ने भाइयों और माता कुंती सहित तमाम कष्ट उठाए, लेकिन कभी भी धर्म का पथ नहीं छोड़ा जिस कारण उन्हें विजय मिली। सुरेशचंद्र मिश्र ने नारद मोह का प्रसंग सुनाया। यज्ञ के आयोजन में संजय त्रिपाठी, शिवकुमार त्रिवेदी, रामप्रकाश, राजाराम आदि का सहयोग रहा।
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गांव बिलसड़ी में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में उन्होंने बृहस्पतिवार को प्रवचन करते हुए कहा कि धनवान होना गलत नहीं है, लेकिन अनीति से धन कमाना गलत है। कमाए गए धन का कुछ हिस्सा दान जरूर करना चाहिए। जो लोग अनीतिपूर्वक धन और वैभव प्राप्त करते हैं, वह बारह वर्ष के अंदर कुल तक को ले डूबता है। यदि दुर्योधन अनीति पर नहीं होता और अपने पांडव भाइयों को उनका धन और राज्य दे देता तो वह निश्चित रूप से यश को प्राप्त होता, लेकिन उसने अनीति का रास्ता अख्तियार किया। दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र ने भी पुत्रमोह में फंस कर उसे कुछ नहीं कहा और अंत में सब कुछ नष्ट हो गया। सत्य की विजय का उदाहरण देते हुए उन्होंने सुनाया कि युधिष्टर ने भाइयों और माता कुंती सहित तमाम कष्ट उठाए, लेकिन कभी भी धर्म का पथ नहीं छोड़ा जिस कारण उन्हें विजय मिली। सुरेशचंद्र मिश्र ने नारद मोह का प्रसंग सुनाया। यज्ञ के आयोजन में संजय त्रिपाठी, शिवकुमार त्रिवेदी, रामप्रकाश, राजाराम आदि का सहयोग रहा।
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