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Shahjahanpur News: कोलाघाट पुल के 27 पिलर की जांची जा चुकी भार वहन क्षमता
Wed, 18 Sep 2024 04:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 18 Sep 2024 04:43 AM IST
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जलालाबाद। रामगंगा नदी में पानी काफी बढ़ जाने के बाद भी कोलाघाट पुल पर भार वहन क्षमता की जांच का कार्य मंगलवार को भी जारी रहा। तीसरे दिन तक पुल के 27 पिलर की जांच का कार्य पूरा कर लिया गया। हालांकि, इस कार्य के लिए प्रशासन से मांगी गई नाव अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाने से जांच टीम के काम में बाधा पड़ने की आशंका है।
बता दें कि पुल में कुल 59 पिलर हैं और इन सभी की लोड टेस्टिंग होनी है। गत रविवार से पुल के तीन-तीन पिलर पर चार-चार घंटे तक गिट्टी-बजरी से लोड 28-28 टन वजनी ट्रक खड़े करके उनकी वजन सहने की क्षमता मापी जा रही है। यह बीएचयू से संबंद्ध आईआईटी की ब्रिज एक्सपर्ट टीम के नेतृत्व में चल रहा है। जांच के दौरान पुल के नीचे पिलर और पियर कैप में पहले तकनीकी कार्य किया जाता है। बाद में पिलर क ऊपर पुल पर वजन रखकर और पिलर के सामने मशीन लगाकर रीडिंग लेने का कार्य किया जा रहा है।
रामगंगा में उफान से पुल के सभी पिलर पानी में डूब जाने के बाद वहां तकनीकी कार्य करने में टीम को दिक्कत आ रही है। इसे देखते जांच टीम ने प्रशासन से नाव उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन वह मंगलवार को भी नहीं पहुंची। जांच टीम में शामिल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर अश्विनी कुमार ने बताया कि पिलर के सामने लगने वाली मशीन की क्षमता करीब एक किमी दूरी से रीडिंग लेने की है। इस कारण आज तक का काम पानी बढ़ने के बाद भी बाधित नहीं हुआ, लेकिन नाव नहीं मिलने और रामगंगा में पानी ज्यादा बढ़ने पर आगे जांच का काम प्रभावित हो सकता है।
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बता दें कि पुल में कुल 59 पिलर हैं और इन सभी की लोड टेस्टिंग होनी है। गत रविवार से पुल के तीन-तीन पिलर पर चार-चार घंटे तक गिट्टी-बजरी से लोड 28-28 टन वजनी ट्रक खड़े करके उनकी वजन सहने की क्षमता मापी जा रही है। यह बीएचयू से संबंद्ध आईआईटी की ब्रिज एक्सपर्ट टीम के नेतृत्व में चल रहा है। जांच के दौरान पुल के नीचे पिलर और पियर कैप में पहले तकनीकी कार्य किया जाता है। बाद में पिलर क ऊपर पुल पर वजन रखकर और पिलर के सामने मशीन लगाकर रीडिंग लेने का कार्य किया जा रहा है।
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रामगंगा में उफान से पुल के सभी पिलर पानी में डूब जाने के बाद वहां तकनीकी कार्य करने में टीम को दिक्कत आ रही है। इसे देखते जांच टीम ने प्रशासन से नाव उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन वह मंगलवार को भी नहीं पहुंची। जांच टीम में शामिल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर अश्विनी कुमार ने बताया कि पिलर के सामने लगने वाली मशीन की क्षमता करीब एक किमी दूरी से रीडिंग लेने की है। इस कारण आज तक का काम पानी बढ़ने के बाद भी बाधित नहीं हुआ, लेकिन नाव नहीं मिलने और रामगंगा में पानी ज्यादा बढ़ने पर आगे जांच का काम प्रभावित हो सकता है।
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