Shahjahanpur News: चाचा की हत्या कर सिर काटने के दोषी तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास
अल्हागंज थाना क्षेत्र में अक्तूबर 2001 में जमीन पर कब्जे को लेकर भतीजों ने अपने चाचा की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उसका सिर काट ले गए थे। 22 साल के बाद हत्याकांड के तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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शाहजहांपुर के तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अहसान हुसैन ने चाचा की हत्या के दोषी तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मुकदमे के एक आरोपी की मृत्यु केस के दौरान हो गई थी।
एडीजीसी विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि अल्हागंज थाना क्षेत्र के गांव कोठा मंझा निवासी नेकराम ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 31 अक्तूबर 2001 की सुबह वह सिंचाई के लिए इंजन चलाने खेत पर गया हुआ था। सेहरामऊ दक्षिणी थाना क्षेत्र के गांव चौहनापुर निवासी मामा रेवती भी साथ में थे।
रेवती की अपने भतीजों से जमीन पर कब्जे को लेकर रंजिश चली थी। सुबह करीब साढ़े सात बजे उसके गांव के हुलासी के साथ रेवती के भतीजे गयाराम, रामसहाय और जवाहर हाथ में बंदूक, तमंचे और गड़ासा लेकर आ गए। उन्हें आता देखकर नेकराम वहां से भाग गया।
हत्या के बाद काट ले गए थे सिर
उन लोगों ने नेकराम पर फायरिंग की, लेकिन वह गन्ने के खेत में छिप गया। तीनों लोगों ने रेवती को इंजन के पास गिराकर गोली मार दी। इसके बाद रेवती का सिर काटकर बहगुल नदी की ओर चले गए थे। वादी की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच की।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने गयाराम, जवाहर और रामसहाय को दोषी माना। तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। गयाराम और जवाहर को आर्म्स एक्ट के तहत पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी हुलासी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।