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बिजली सप्लाई में रोड़ा बनी मोबाइल ट्रांसफार्मरों की कमी
अनूप वाजपेयी शाहजहांपुर।
Updated Sun, 14 May 2017 11:42 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिले के 34 उपकेंद्रों पर सिर्फ 12 मोबाइल ट्रांसफार्मर उपलब्ध
गर्मी के सीजन में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही ट्रांसफार्मरों के ओवरलोडिंग से हीट होेकर जलने की आशंका बढ़ गई है। इसके बावजूद खराब ट्रांसफार्मर की जगह दूसरा ट्रांसफार्मर लगने तक बिजली सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मोबाइल ट्रांसफार्मरों की पर्याप्त उपलब्धता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नियमत: 33 केवी क्षमता वाले सभी उपकेंद्रों पर एक-एक मोबाइल (ट्राली) ट्रांसफार्मर होना चाहिए। इस लिहाज से शहरी क्षेत्र में आए दिन वीआईपी मूवमेंट को देखते सभी सब स्टेशनों पर मोबाइल ट्रांसफार्मर जुटा लिए गए हैं, लेकिन तिलहर और ग्रामीण डिवीजन के अन्य सब स्टेशनों पर मोबाइल ट्रांसफार्मरों को लेकर एक अनार-सौ बीमार जैसे हालात बने हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सत्ता संभालते ही शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे के अंदर खराब ट्रांसफार्मर बदलने का फरमान जारी किया था। इस आदेश के अनुपालन में संसाधनों की कमी पहले से अवरोध डाल रही है। अब गर्मी के सीजन ने विभागीय अभियंताओं के सामने खराब ट्रांसफार्मर बदले जाने तक प्रभावित क्षेत्र में बिजली की सप्लाई बनाए रखने की नई चुनौती पेश की है।
मंत्रियों के दौरे के मद्देनजर फोकस में शहरी क्षेत्र
बिजली वितरण व्यवस्था के लिहाज से जिले को तीन वितरण खंडों में विभाजित किया गया है। वितरण खंड द्वितीय में शामिल शहरी क्षेत्र में कभी केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णा राज, कभी प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना तोे कभी जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के प्रस्तावित दौरों को ध्यान में रखते हुए अफसर केवल शहरी क्षेत्र को जरूरी संसाधनों से लैस करने पर खास दे रहे हैं। शहरी डिवीजन में 33 केवी क्षमता वाले सात सब स्टेशनों के बीच कुछ समय पहले तक सिर्फ तीन ट्राली ट्रांसफार्मर थे, लेकिन हाल ही में चार नई ट्रालियां मंगा ली गई हैं।
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एक ट्राली के सहारे द्वितीय खंड के 14 उप केंद्र
विद्युत वितरण खंड द्वितीय में सदर और पुवायां तहसील के 14 उप केंद्र शामिल हैं, लेकिन ट्राली ट्रांसफार्मर सिर्फ एक है। स्थिति उस वक्त संभालनी कठिन हो जाती है, जब विभिन्न ब्लॉकों में एक साथ कई ट्रांसफार्मर तकनीकी खराबियों के शिकंजे में आ जाते हैं। ऐसी दशा में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों में बिजली के लिए ट्राली ट्रांसफार्मर की मारामारी शुरू हो जाती है। इसे देखते क्षेत्र के अधिशासी अभियंता अंशुमान यादव ने सर्किल ऑफिस को तीन अतिरिक्त ट्रालियों की डिमांड भेजी है। एक्सईएन के अनुसार मुख्यमंत्री के आदेश को देखते वर्कशॉप से रिपेयर ट्रांसफार्मर मिलने की टाइमिंग में भी सुधार हुआ है।
तिलहर और जलालाबाद के लिए सिर्फ चार ट्रालियां
रूरल एरिया के फर्स्ट डिवीजन के व्यापक क्षेत्रफल को देेखते गत वर्ष तिलहर क्षेत्र को अलग वितरण खंड का दर्जा देकर उसमेें जलालाबाद तहसील के विकास खंडों को समायोजित किया गया। बिजली सप्लाई में सुधार के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई, लेकिन ट्राली ट्रांसफार्मर जैसी प्राथमिक जरूरत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण तिलहर डिवीजन के 13 उप केंद्रों के बीच केवल चार ट्राली ट्रांसफार्मर अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। अधिशासी अभियंता एनपी सिंह के अनुसार इन कमी की भरपाई के लिए चार अतिरिक्त ट्रालियों की उच्चाधिकारियों से मांग की जा चुकी है।
ढुलाई के संसाधन जुटाने को शुरू हुए प्रयास
ट्रांसफार्मर खराब होने पर उसे पुवायां रोड के 132 केवी सब स्टेशन में बने भंडार गृह तक पहुंचाने और वहां से नया ट्रांसफार्मर मौके पर लाकर उसे लाइन स्टाफ से स्थापित कराने तक अवर अभियंता संवर्ग को ढुलाई के संसाधन भी समय से उपलब्ध नहीं हो पाते। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के पूर्व अध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय के अनुसार योगी सरकार की मंशा के अनुुरूप ट्रांसफार्मरों की ढुलाई को वाहनों की उपलब्धता में धीरे-धीरे ही सही, अब सुधार हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लोेड कम होने से वहां ट्राली ट्रांसफार्मरों की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती। इसके बावजूद अधिशासी अभियंताओं के स्तर से हुई डिमांड जल्द पूरी कराई जाएगी। इस बिंदु पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है कि खराब ट्रांसफार्मरों की वर्कशॉप से उपलब्धता समय से हो सके। इसीलिए ट्रांसफार्मर ऑयल की आपूर्ति भी विभाग स्तर से कराई जा रही है।
-आरके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन
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गर्मी के सीजन में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही ट्रांसफार्मरों के ओवरलोडिंग से हीट होेकर जलने की आशंका बढ़ गई है। इसके बावजूद खराब ट्रांसफार्मर की जगह दूसरा ट्रांसफार्मर लगने तक बिजली सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मोबाइल ट्रांसफार्मरों की पर्याप्त उपलब्धता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नियमत: 33 केवी क्षमता वाले सभी उपकेंद्रों पर एक-एक मोबाइल (ट्राली) ट्रांसफार्मर होना चाहिए। इस लिहाज से शहरी क्षेत्र में आए दिन वीआईपी मूवमेंट को देखते सभी सब स्टेशनों पर मोबाइल ट्रांसफार्मर जुटा लिए गए हैं, लेकिन तिलहर और ग्रामीण डिवीजन के अन्य सब स्टेशनों पर मोबाइल ट्रांसफार्मरों को लेकर एक अनार-सौ बीमार जैसे हालात बने हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सत्ता संभालते ही शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे के अंदर खराब ट्रांसफार्मर बदलने का फरमान जारी किया था। इस आदेश के अनुपालन में संसाधनों की कमी पहले से अवरोध डाल रही है। अब गर्मी के सीजन ने विभागीय अभियंताओं के सामने खराब ट्रांसफार्मर बदले जाने तक प्रभावित क्षेत्र में बिजली की सप्लाई बनाए रखने की नई चुनौती पेश की है।
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मंत्रियों के दौरे के मद्देनजर फोकस में शहरी क्षेत्र
बिजली वितरण व्यवस्था के लिहाज से जिले को तीन वितरण खंडों में विभाजित किया गया है। वितरण खंड द्वितीय में शामिल शहरी क्षेत्र में कभी केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णा राज, कभी प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना तोे कभी जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के प्रस्तावित दौरों को ध्यान में रखते हुए अफसर केवल शहरी क्षेत्र को जरूरी संसाधनों से लैस करने पर खास दे रहे हैं। शहरी डिवीजन में 33 केवी क्षमता वाले सात सब स्टेशनों के बीच कुछ समय पहले तक सिर्फ तीन ट्राली ट्रांसफार्मर थे, लेकिन हाल ही में चार नई ट्रालियां मंगा ली गई हैं।
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एक ट्राली के सहारे द्वितीय खंड के 14 उप केंद्र
विद्युत वितरण खंड द्वितीय में सदर और पुवायां तहसील के 14 उप केंद्र शामिल हैं, लेकिन ट्राली ट्रांसफार्मर सिर्फ एक है। स्थिति उस वक्त संभालनी कठिन हो जाती है, जब विभिन्न ब्लॉकों में एक साथ कई ट्रांसफार्मर तकनीकी खराबियों के शिकंजे में आ जाते हैं। ऐसी दशा में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों में बिजली के लिए ट्राली ट्रांसफार्मर की मारामारी शुरू हो जाती है। इसे देखते क्षेत्र के अधिशासी अभियंता अंशुमान यादव ने सर्किल ऑफिस को तीन अतिरिक्त ट्रालियों की डिमांड भेजी है। एक्सईएन के अनुसार मुख्यमंत्री के आदेश को देखते वर्कशॉप से रिपेयर ट्रांसफार्मर मिलने की टाइमिंग में भी सुधार हुआ है।
तिलहर और जलालाबाद के लिए सिर्फ चार ट्रालियां
रूरल एरिया के फर्स्ट डिवीजन के व्यापक क्षेत्रफल को देेखते गत वर्ष तिलहर क्षेत्र को अलग वितरण खंड का दर्जा देकर उसमेें जलालाबाद तहसील के विकास खंडों को समायोजित किया गया। बिजली सप्लाई में सुधार के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई, लेकिन ट्राली ट्रांसफार्मर जैसी प्राथमिक जरूरत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण तिलहर डिवीजन के 13 उप केंद्रों के बीच केवल चार ट्राली ट्रांसफार्मर अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। अधिशासी अभियंता एनपी सिंह के अनुसार इन कमी की भरपाई के लिए चार अतिरिक्त ट्रालियों की उच्चाधिकारियों से मांग की जा चुकी है।
ढुलाई के संसाधन जुटाने को शुरू हुए प्रयास
ट्रांसफार्मर खराब होने पर उसे पुवायां रोड के 132 केवी सब स्टेशन में बने भंडार गृह तक पहुंचाने और वहां से नया ट्रांसफार्मर मौके पर लाकर उसे लाइन स्टाफ से स्थापित कराने तक अवर अभियंता संवर्ग को ढुलाई के संसाधन भी समय से उपलब्ध नहीं हो पाते। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के पूर्व अध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय के अनुसार योगी सरकार की मंशा के अनुुरूप ट्रांसफार्मरों की ढुलाई को वाहनों की उपलब्धता में धीरे-धीरे ही सही, अब सुधार हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लोेड कम होने से वहां ट्राली ट्रांसफार्मरों की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती। इसके बावजूद अधिशासी अभियंताओं के स्तर से हुई डिमांड जल्द पूरी कराई जाएगी। इस बिंदु पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है कि खराब ट्रांसफार्मरों की वर्कशॉप से उपलब्धता समय से हो सके। इसीलिए ट्रांसफार्मर ऑयल की आपूर्ति भी विभाग स्तर से कराई जा रही है।
-आरके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन