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कोलाघाट पुल : दलदली जमीन पर डाली मिट्टी, वाहन चलने से यात्रियों को राहत
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जलालाबाद के कोलाघाट पुल के पास रामगंगा नदी की धार मोडने को पानी मे बोरियां लगाते मजदूर। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
जलालाबाद। लोक निर्माण विभाग द्वारा कोलाघाट पुल के नीचे वैकल्पिक रास्ते की दलदली जमीन पर मिट्टी डालकर समतलीकरण कर देने से अब उस पर सवारी वाहन दौड़ने लगे हैं। हालांकि अभी ये वाहन कुछ दूर तक ही पहुंच रहे हैं, परंतु इनके संचालन से पैदल यात्रियों को थोड़ी राहत मिली है।
बुधवार को विभागीय ठेकेदारों ने नदी पार के इलाके में रास्ता निर्माण का कार्य शुरू किया है। पैंटून पुल का निर्माण का कार्य शुरू न होने से अभी कुछ दिनों तक यात्रियों को नदी पार करने को नाव के सहारे पर ही निर्भर रहना होगा। पहले सवारी वाहन कोला पुल की शुरुआत तक ही जा पाते थे, जिससे पैदल यात्रियों को करीब तीन किलोमीटर का रास्ता पैदल पार करना होता था। समतलीकरण का कार्य हो जाने से बुधवार को थ्री-व्हीलर, ई-रिक्शा, वैन, कार आदि सवारियां लेकर पिलर धंसने वाले स्थान तक सवारियां पहुंचाने लगे हैं।
हालांकि लोहे के पटले पर्याप्त संख्या में न होने से रेतीला रास्ता पार करने में यात्रियों को अब भी पसीने छूट जाते है। राहत की बात यह है कि बुधवार से नदी पार के क्षेत्र में जेसीबी से रास्ते का समतलीकरण होना शुरू हो गया। अभी तक वहां ज्यादा दलदल होने से बाइक को ट्रैक्टर पर लादकर निकलना पड़ता था। हालांकि यहां भी अभी लोहे के पटले नहीं पहुंचे है। बुधवार को रामगंगा नदी से कटी एक अलग धार के बहाव को रोकने के लिए रेत भरी बोरियां लगाने का काम दूसरे दिन भी जारी रहा।
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इस बहाव के आगे कुछ मीटर रेतीला रास्ता है, जिसके बाद नदी की चौड़ाई कम हो जाती है। यहीं पर पैंटून पुल बनाने की योजना है। बोरियां लगने से धार की दिशा नदी की तरफ हो जाएगी और उस पर मिट्टी डालकर रास्ता बना दिया जाएगा। कम चौड़ाई वाली जगह पर पैंटून पुल बनाने में कम समय और सामग्री लगेगी। जबकि अन्य स्थान पर नदी की चौड़ाई काफी ज्यादा है। धार रुकने का कार्य पूरा होने के बाद ही पैंटून पुल निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
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बुधवार को विभागीय ठेकेदारों ने नदी पार के इलाके में रास्ता निर्माण का कार्य शुरू किया है। पैंटून पुल का निर्माण का कार्य शुरू न होने से अभी कुछ दिनों तक यात्रियों को नदी पार करने को नाव के सहारे पर ही निर्भर रहना होगा। पहले सवारी वाहन कोला पुल की शुरुआत तक ही जा पाते थे, जिससे पैदल यात्रियों को करीब तीन किलोमीटर का रास्ता पैदल पार करना होता था। समतलीकरण का कार्य हो जाने से बुधवार को थ्री-व्हीलर, ई-रिक्शा, वैन, कार आदि सवारियां लेकर पिलर धंसने वाले स्थान तक सवारियां पहुंचाने लगे हैं।
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हालांकि लोहे के पटले पर्याप्त संख्या में न होने से रेतीला रास्ता पार करने में यात्रियों को अब भी पसीने छूट जाते है। राहत की बात यह है कि बुधवार से नदी पार के क्षेत्र में जेसीबी से रास्ते का समतलीकरण होना शुरू हो गया। अभी तक वहां ज्यादा दलदल होने से बाइक को ट्रैक्टर पर लादकर निकलना पड़ता था। हालांकि यहां भी अभी लोहे के पटले नहीं पहुंचे है। बुधवार को रामगंगा नदी से कटी एक अलग धार के बहाव को रोकने के लिए रेत भरी बोरियां लगाने का काम दूसरे दिन भी जारी रहा।
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इस बहाव के आगे कुछ मीटर रेतीला रास्ता है, जिसके बाद नदी की चौड़ाई कम हो जाती है। यहीं पर पैंटून पुल बनाने की योजना है। बोरियां लगने से धार की दिशा नदी की तरफ हो जाएगी और उस पर मिट्टी डालकर रास्ता बना दिया जाएगा। कम चौड़ाई वाली जगह पर पैंटून पुल बनाने में कम समय और सामग्री लगेगी। जबकि अन्य स्थान पर नदी की चौड़ाई काफी ज्यादा है। धार रुकने का कार्य पूरा होने के बाद ही पैंटून पुल निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।

जलालाबाद के कोलाघाट पुल के पास सवारी वहां से चढ़ते उतरते यात्री। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR