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चुनाव-दर-चुनाव खन्ना की जीत का सफर
अजय अवस्थी/अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Sat, 11 Mar 2017 11:13 PM IST
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प्रत्याशी सुरेश खन्ना
- फोटो : अमर उजाला
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1989 में पहली दफा नवाब सिकंदर अली खां को हराया था
तब से आठ चुनाव जीतने का रिकार्ड कर चुके हैं अपने नाम
जिस रोज से चला हूं मेरी मंजिल पर नजर है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा। ये शेर भारतीय जनता पार्टी के शहर विधानसभा प्रत्याशी सुरेश खन्ना के ऊपर सटीक बैठ रहा है। खन्ना ने वर्ष 1989 में पहली बार नवाब सिकंदर अली खां को पराजित कर जीत का जो सिलसिला शुरू किया था, वह बदस्तूर जारी है। इस बार की उनकी रिकार्ड आठवीं जीत है।
वर्ष 1991 के चुनाव में खन्ना ने जनता दल के प्रत्याशी मोहम्मद इकबाल को पराजित किया और वर्ष 1993 में सपा के अशोक कुमार को पराजित कर जीत की हैट्रिक बनाई। 1996 में एक बार फिर कांग्रेस के नवाब सिकंदर अली खां को पराजित किया। वर्ष 2002 के चुनाव में सपा के प्रदीप पांडेय उनसे पराजित हो गए। वर्ष 2007 में बसपा प्रत्याशी फैजान अली खां ने खन्ना के खिलाफ ताल ठोंकी और नतीजा उन्हें भी पराजय झेल कर ही भुगतना पड़ा।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी के रूप में चेयरमैन तनवीर खां ने भाग्य आजमाया, लेकिन सफलता उन्हें भी नहीं मिली। आठवीं बार भी उनके प्रतिद्वंद्वी के रूप में सपा प्रत्याशी चेयरमैन तनवीर खां ही रहे, लेकिन वह सुरेश खन्ना के विजय रथ को रोकने में एक बार फिर नाकाम रहे।
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यहां यह भी बता दें कि सुरेश खन्ना ने वर्ष 1985 में पहला चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी नवाब सिकंदर अली खां के विरुद्ध लड़ा था, जिसमें नवाब सिकंदर अली खां विजयी रहे थे। वर्ष 1985 के चुनाव में नवाब सिकंदर अली से मिली हार का बदला उन्होंने अगले ही चुनाव यानी वर्ष 1989 में लेते हुए पहली जीत दर्ज की। इसके बाद खन्ना ने जनता के बीच ऐसी पैठ बना ली कि अब तक कोई उनका विजय रथ रोकने में कामयाब नहीं हो सका है।
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तब से आठ चुनाव जीतने का रिकार्ड कर चुके हैं अपने नाम
जिस रोज से चला हूं मेरी मंजिल पर नजर है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा। ये शेर भारतीय जनता पार्टी के शहर विधानसभा प्रत्याशी सुरेश खन्ना के ऊपर सटीक बैठ रहा है। खन्ना ने वर्ष 1989 में पहली बार नवाब सिकंदर अली खां को पराजित कर जीत का जो सिलसिला शुरू किया था, वह बदस्तूर जारी है। इस बार की उनकी रिकार्ड आठवीं जीत है।
वर्ष 1991 के चुनाव में खन्ना ने जनता दल के प्रत्याशी मोहम्मद इकबाल को पराजित किया और वर्ष 1993 में सपा के अशोक कुमार को पराजित कर जीत की हैट्रिक बनाई। 1996 में एक बार फिर कांग्रेस के नवाब सिकंदर अली खां को पराजित किया। वर्ष 2002 के चुनाव में सपा के प्रदीप पांडेय उनसे पराजित हो गए। वर्ष 2007 में बसपा प्रत्याशी फैजान अली खां ने खन्ना के खिलाफ ताल ठोंकी और नतीजा उन्हें भी पराजय झेल कर ही भुगतना पड़ा।
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी के रूप में चेयरमैन तनवीर खां ने भाग्य आजमाया, लेकिन सफलता उन्हें भी नहीं मिली। आठवीं बार भी उनके प्रतिद्वंद्वी के रूप में सपा प्रत्याशी चेयरमैन तनवीर खां ही रहे, लेकिन वह सुरेश खन्ना के विजय रथ को रोकने में एक बार फिर नाकाम रहे।
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यहां यह भी बता दें कि सुरेश खन्ना ने वर्ष 1985 में पहला चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी नवाब सिकंदर अली खां के विरुद्ध लड़ा था, जिसमें नवाब सिकंदर अली खां विजयी रहे थे। वर्ष 1985 के चुनाव में नवाब सिकंदर अली से मिली हार का बदला उन्होंने अगले ही चुनाव यानी वर्ष 1989 में लेते हुए पहली जीत दर्ज की। इसके बाद खन्ना ने जनता के बीच ऐसी पैठ बना ली कि अब तक कोई उनका विजय रथ रोकने में कामयाब नहीं हो सका है।