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रातभर ऊंघते रहे, नहीं आई काशी विश्वनाथ
Updated Fri, 06 Oct 2017 12:09 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
शाहजहांपुर।
दिल्ली से लखनऊ की ओर जाने वाली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस ट्रेन 12 घंटा देर से पहुुंची। पूछताछ केंद्र से लेट लतीफी का सही समय पता नहीं चलने पर अधिकांश यात्रियों की रात ट्रेन के इंतजार में ऊंघते हुए बीत गई। सुबह छह बजे ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, तब यात्री रवाना हुए।
काशी विश्वनाथ ट्रेन लखनऊ, रायबरेली से प्रतापगढ़ होते हुए वाराणसी तक जाती है। इस ट्रेन को बुधवार शाम छह बजे यहां प्लेटफार्म नंबर एक पर आना था लेकिन ट्रेन निश्चित समय पर नहीं आई। जिन लोगों के पास नेट वाले मोबाइल थे, उन लोगों ने तो मोबाइल से ट्रेन की लोकेशन पता करके अपना सफर दूसरे साधनों से तय कर लिया, लेकिन सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हुई जो केवल रेलवे की पूछताछ खिड़की पर ही आश्रित थे, यहां से भी इन्हें ट्रेन के आने का निश्चित समय नहीं मिल पाया। लिहाजा उनकी पूरी रात ट्रेन के आने के इंतजार में ऊंघते हुए बीत गई। इन यात्रियों में छोटे बच्चों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह लगभग 6:04 बजे ट्रेन जब स्टेशन पर आई तब फिर लोग उसमें बैठ कर अपने सफर के लिए रवाना हुए।
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दिल्ली से लखनऊ की ओर जाने वाली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस ट्रेन 12 घंटा देर से पहुुंची। पूछताछ केंद्र से लेट लतीफी का सही समय पता नहीं चलने पर अधिकांश यात्रियों की रात ट्रेन के इंतजार में ऊंघते हुए बीत गई। सुबह छह बजे ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, तब यात्री रवाना हुए।
काशी विश्वनाथ ट्रेन लखनऊ, रायबरेली से प्रतापगढ़ होते हुए वाराणसी तक जाती है। इस ट्रेन को बुधवार शाम छह बजे यहां प्लेटफार्म नंबर एक पर आना था लेकिन ट्रेन निश्चित समय पर नहीं आई। जिन लोगों के पास नेट वाले मोबाइल थे, उन लोगों ने तो मोबाइल से ट्रेन की लोकेशन पता करके अपना सफर दूसरे साधनों से तय कर लिया, लेकिन सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हुई जो केवल रेलवे की पूछताछ खिड़की पर ही आश्रित थे, यहां से भी इन्हें ट्रेन के आने का निश्चित समय नहीं मिल पाया। लिहाजा उनकी पूरी रात ट्रेन के आने के इंतजार में ऊंघते हुए बीत गई। इन यात्रियों में छोटे बच्चों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह लगभग 6:04 बजे ट्रेन जब स्टेशन पर आई तब फिर लोग उसमें बैठ कर अपने सफर के लिए रवाना हुए।
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