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जितिन के जाने के बाद जिले में कुनबे को बचाने में जुटी कांग्रेस
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शाहजहांपुर। जिले में कांग्रेस की धुरी समझे जाने वाले कद्दावर नेता जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। जितिन समर्थक कांग्रेसी खुलेआम अपनी खुशी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि देर सवेर कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। हालांकि कांग्रेसी नेतृत्व ऐसी संभावनाओं से इंकार कर रहा है।
बुधवार को जितिन प्रसाद ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। पिता जितेंद्र प्रसाद के बाद जितिन प्रसाद जिले में कांग्रेसियों की ताकत माने जाते रहे हैं। जिले की सियासी गतिविधियों में प्रसाद भवन का हमेशा बड़ा दखल रहा है। तमाम बड़े नेता कोठी में पनाह पाते रहे हैं। ऐसे में जितिन के भाजपाई होने से पार्टी में बड़ी टूट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
बुधवार को ही कांग्रेस के कई पदाधिकारी जितिन प्रसाद के निवास स्थल प्रसाद भवन में मिठाई बांटकर अपने इरादे जता चुके हैं। अधिकतर पदाधिकारी कांग्रेस से ज्यादा जितिन प्रसाद से ज्यादा जुड़े रहे हैं। जितिन के सत्ताधारी दल में जाने से कांग्रेस के कई पदाधिकारियों के उनके साथ हो जाने की अटकल बुधवार से ही तेज हो गईं थीं। हालांकि बृहस्पतिवार को किसी पदाधिकारी ने घोषित तौर पर कांग्रेस छोड़ने से एलान नहीं किया लेकिन उम्मीद है कि जितिन के जाने के बाद बड़ी संख्या में पदाधिकारी इधर से उधर होंगे। सोशल मीडिया में कई लोगों ने पार्टी के विभिन्न पदों से इस्तीफे का एलान कर भी दिया है। हालांकि ऐसा कोई त्यागपत्र अभी पार्टी के पास नहीं पहुंचा है। कांग्रेस का प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व भी शाहजहांपुर में पार्टी की गतिविधियों में नजर रख रहा है।
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पार्टी में बिखराव से 2022 के चुनाव के लिए गलत संदेश जा सकता है। वहीं कई लोगों ने सोशल मीडिया में कांग्रेस में बने रहने का एलान भी किया है।
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पार्टी के सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी पूरी ताकत के साथ कांग्रेस को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रांतीय आह्वान पर कार्यकर्ता पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेंगे। पार्टी में टूट की कोई संभावना नहीं है।
-रजनीश गुप्ता, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
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बुधवार को जितिन प्रसाद ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। पिता जितेंद्र प्रसाद के बाद जितिन प्रसाद जिले में कांग्रेसियों की ताकत माने जाते रहे हैं। जिले की सियासी गतिविधियों में प्रसाद भवन का हमेशा बड़ा दखल रहा है। तमाम बड़े नेता कोठी में पनाह पाते रहे हैं। ऐसे में जितिन के भाजपाई होने से पार्टी में बड़ी टूट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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बुधवार को ही कांग्रेस के कई पदाधिकारी जितिन प्रसाद के निवास स्थल प्रसाद भवन में मिठाई बांटकर अपने इरादे जता चुके हैं। अधिकतर पदाधिकारी कांग्रेस से ज्यादा जितिन प्रसाद से ज्यादा जुड़े रहे हैं। जितिन के सत्ताधारी दल में जाने से कांग्रेस के कई पदाधिकारियों के उनके साथ हो जाने की अटकल बुधवार से ही तेज हो गईं थीं। हालांकि बृहस्पतिवार को किसी पदाधिकारी ने घोषित तौर पर कांग्रेस छोड़ने से एलान नहीं किया लेकिन उम्मीद है कि जितिन के जाने के बाद बड़ी संख्या में पदाधिकारी इधर से उधर होंगे। सोशल मीडिया में कई लोगों ने पार्टी के विभिन्न पदों से इस्तीफे का एलान कर भी दिया है। हालांकि ऐसा कोई त्यागपत्र अभी पार्टी के पास नहीं पहुंचा है। कांग्रेस का प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व भी शाहजहांपुर में पार्टी की गतिविधियों में नजर रख रहा है।
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पार्टी में बिखराव से 2022 के चुनाव के लिए गलत संदेश जा सकता है। वहीं कई लोगों ने सोशल मीडिया में कांग्रेस में बने रहने का एलान भी किया है।
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पार्टी के सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी पूरी ताकत के साथ कांग्रेस को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रांतीय आह्वान पर कार्यकर्ता पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेंगे। पार्टी में टूट की कोई संभावना नहीं है।
-रजनीश गुप्ता, कांग्रेस जिलाध्यक्ष