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Shahjahanpur News: अब परशुरामपुरी के नाम से जाना जाएगा जलालाबाद, केंद्र से मिली मंजूरी

Thu, 21 Aug 2025 12:49 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 21 Aug 2025 12:49 AM IST
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Jalalabad will now be known as Parshurampuri, approval received from the Centre
जलालाबाद में ​​स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद
जलालाबाद (शाहजहांपुर)। भगवान परशुराम की जन्मस्थली जलालाबाद अब उनके नाम परशुरामपुरी से जाना जाएगा। लंबे समय से चल रही इस मांग के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने अपनी सहमति सहित प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा था। वहां से स्वीकृति पत्र यूपी के मुख्य सचिव को पत्र भेज दिया गया है। अब यूपी कैबिनेट की मुहर लगना बाकी है।
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केंद्रीय गृह सचिव को भेजे गए पत्र में यूपी सरकार की ओर से काफी पैरवी की गई थी। इसमें कहा गया था कि जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। वहां भगवान परशुराम का काफी पुराना ऐतिहासिक मंदिर भी है। इस वजह से जलालाबाद का नाम परशुरामपुरी रखे जाने की मांग की जाती रही है। जनभावनाओं को देखते हुए जलालाबाद नगर पालिका परिषद ने भी मार्च 2018 व सितंबर 2023 में इस मांग का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित किया था।
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डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बोर्ड की बैठक में पारित प्रस्ताव संलग्न कर नाम परिवर्तन के लिए अपनी संस्तुति सहित पत्र बीते अप्रैल में शासन को भेजा था। इसके बाद शासन ने फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी थी। वहां से मिले स्वीकृति पत्र को बुधवार को केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। इसके लिए उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है।
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जलालाबाद का नाम परशुरामपुरी करने के लिए केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद यूपी की कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाएगा। वहां से अंतिम मुहर की औपचारिकता में कुछ समय लग सकता है। शासन से निर्देश मिलने के बाद औपचारिक रूप से नाम बदलने की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी। -धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
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लंबे समय से परशुरामपुरी की हो रही थी मांग, भाजपा सरकार में कवायद में आई तेजी
शाहजहांपुर। भगवान परशुराम की जन्मस्थली के नाम से मशहूर जलालाबाद के नाम परिवर्तन पर लोगों ने हर्ष जताया है। नगर का नाम परशुरामपुरी किए जाने को लेकर भगवान परशुराम जन्मभूमि प्रबंध समिति लंबे समय से मांग करती आ रही थी। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने भी अपने स्तर से प्रयास किए जिसके फलस्वरूप नाम परिवर्तन पर मुहर लग सकी है।
इस मांग को लेकर राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ओर से शासन को संबोधित ज्ञापन हर महीने की पांच तारीख को एक साल तक लगातार एसडीएम को दिया जाता रहा। करीब चार माह पूर्व डीसीबी के पूर्व चेयरमैन भूपेंद्र सिंह भन्नू ने बाबा परशुराम सर्व कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा के साथ दिल्ली जाकर केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात की।
उन्हें मांग संबंधी ज्ञापन सौंपा। जितिन प्रसाद ने अपनी संस्तुति सहित इस पत्र को प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजा। लंबे अरसे से विभिन्न स्तरों पर चल रहे प्रयास के बाद केंद्र सरकार की भी स्वीकृति मिल जाने से पूरे नगर में खुशी का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी लोग सरकार के इस निर्णय की खूब सराहना कर रहे हैं।
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30 करोड़ की धनराशि से जन्मस्थली पर हो रहे हैं विकास कार्य



जन्मस्थली घोषित होने के बाद मंदिर प्रांगण के सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न तरह के कार्य कराने के लिए मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत 19 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार ने मंजूर की थी। इसके अलावा सरकार ने मंदिर के पास स्थित करीब 42 एकड़ के रकबे वाले रामताल के पानी को साफ सुथरा करने, इस पर घाट, सीढ़ियां और पाथ-वे आदि का निर्माण करने, रामताल के किनारे से ही मंदिर तक सीधा व चौड़ा रास्ता तथा नाला निर्माण सहित विभिन्न अन्य तरह के कार्यों के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत 11 करोड़ की धनराशि अलग से मंजूर की है। इस धनराशि से दोनों जगहों पर कार्य चल रहे हैं। कुछ दिन पहले केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने निर्माण कार्यों का जायजा लिया था। वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी निरीक्षण किया था।
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जितिन प्रसाद ने भी किया था प्रयास
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद भाजपा में आने के बाद से ही परशुराम जन्मस्थली के विकास कार्यों को लेकर लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जन भावनाओं के मद्देनजर जलालाबाद का नाम परशुरामपुरी किए जाने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार ने नाम बदलने की अनुशंसा करते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय को अनुमोदन के लिए पत्रावली भेजी थी। जितिन ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में दो अगस्त को मुलाकात कर जलालाबाद का नाम परिवर्तन का अनुरोध किया था। जितिन प्रसाद ने कहा कि भगवान श्री परशुराम की जन्मस्थली के विकास और सुंदरीकरण के साथ ही जलालाबाद का नाम परिवर्तन भी उनकी प्राथमिकता में शामिल था। उन्होंने इस निर्णय को सनातन समाज के लिए गर्व का क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
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करीब 32 वर्ष से मांग की जा रही है लेकिन अन्य सरकारों ने इस मांग पर गौर नहीं किया। जनभावनाओं की कद्र करते हुए प्रदेश तथा केंद्र की भाजपा सरकार ने इस मांग को पूरा किया है। इस पुनीत कार्य में जिन लोगों ने भी संघर्ष किया, उन सभी को साधुवाद।
- सत्यदेव पांडेय, महंत परशुराम मंदिर
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जलालाबाद को परशुरामपुरी घोषित कराने को लेकर राष्ट्रीय बजरंग दल पिछले एक वर्ष से लगातार आंदोलन कर रहा था। आज परशुरामपुरी घोषित हो जाने से प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति हुई। हमारा संघर्ष सफल हुआ।
- अर्पित भामाशाह, प्रांत मंत्री राष्ट्रीय बजरंग के



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आज जलालाबाद ही नहीं बल्कि पूरे जनपद के लोगों के लिए ऐतिहासिक दिन है। परशुरामपुरी नाम घोषित कराने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद, डीएम व केंद्र व प्रदेश सरकार सहित भाजपा के सभी शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हैं।
- भूपेंद्र सिंह भन्नू, पूर्व चेयरमैन डीसीबी

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भगवान परशुराम की जन्मस्थली होने के पौराणिक साक्ष्यों ने की राह आसाना

शाहजहांपुर। इतिहासकार विकास खुराना ने बताया कि देश में अनेक स्थानों पर भगवान परशुराम जन्मस्थली के दावे किए जाते हैं। डॉ. ब्रह्मानंद शुक्ला की पुस्तक भगवान परशुराम महागाथा शोध ग्रंथ में ऐसी दस अनुसूचियां रेखांकित हैं जिससे पता चलता है कि भगवान परशुराम जी का जन्म अपने शाहजहांपुर के जलालाबाद क्षेत्र में ही हुआ था। ऐसे ही कुछ साक्ष्यों ने जलालाबाद का नाम परिवर्तित करने की राह आसान की।
यहां 20 फुट ऊंचे टीले पर भगवान परशुराम जी का मंदिर है। इसके मुख्य द्वार पर फरसा लगा हुआ है। यह फरसा तत्कालीन तहसीलदार प्रभु दयाल को वर्ष 1903 में खोदाई करते समय मिट्टी में दबा मिला था। इसके अतिरिक्त खरोष्ठी भाषा में लिखे दो लेख भी यहां मिले हैं।
संलग्न दरगाह से मिली उर्दू की पुस्तक तस्वीर-ए-मासूम-उल रऊफ रहनुमाये तरीकत बताती है कि जब शाह रहमत उल्लाह अलैह निजाम साबरी मियां जिन्हें राजकुमार मियां भी कहा जाता है, अपने शिष्य मुस्ताक दीवान के साथ इस कस्बे में आए तो आबादी नहीं थी।
उत्तर की और कुछ हिंदू योगी साधु रहते थे। तब भी मंदिर यहीं पर स्थित था। निजाम शबरी का समय 1034 के आसपास का है। पुस्तक के विवरण से स्पष्ट है कि इस स्थान का नाम पहले जोगीखेड़ा था तथा प्रयागराज में इसे परशुरामपुरी के नाम से जाना जाता था।
बाद में यहां शासक रहे हकीम अहमद खान ने अपनी मंझले पुत्र जलालुद्दीन का विवाह यहां कर पूरा क्षेत्र मेहर में अपने पुत्रवधू को दे दिया। इसमें इस क्षेत्र का नाम जलालाबाद चर्चित हुआ। शाहजहांपुर गजेटियर इसके नामकरण को सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी तथा जलालुद्दीन अकबर से जोड़ता है।
भगवान परशुराम मंदिर से थोड़ी दूर महर्षि जमदग्नि तथा माता रेणुका का आश्रम तथा ढकीयाइन देवी का मंदिर है। इसके अलावा भी अन्य पौराणिक साक्ष्य हैं जिनसे यहां पर ही भगवान परशुराम का जन्म लेना स्पष्ट होता है। संवाद
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श्रद्धालुओं ने जताई खुशी, बांटे लड्डू
जलालाबाद। नगर को परशुरामपुरी घोषित किए जाने पर बुधवार शाम नगर तथा आसपास गांव में रहने वाले श्रद्धालुओं ने जमकर खुशी मनाई। मिठाई खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया गया तथा जमकर आतिशबाजी छुड़ाई। डीसीबी के पूर्व चेयरमैन भूपेंद्र सिंह तथा भाजपा नेता अभिषेक सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग नगर के मुख्य चौराहे पर एकत्र हुए और ढोल नगाड़े बजाए।

भगवान परशुराम की जय-जयकार करते हुए जुलूस के रूप में परशुराम मंदिर पहुंचे। परशुराम जन्मभूमि प्रबंध समिति के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या मे पहुंचे लोगों ने भी आतिशबाजी छुड़ाई। इस दौरान अर्पित भामाशाह, जितेंद्र प्रताप सिंह, संजीव गुप्ता, गोपाल द्विवेदी, प्रदीप मिश्रा, गौरव राघव, रामू अग्निहोत्री, जितेंद्र मिश्रा, दिलीप अग्निहोत्री, टीटू आदि मौजूद रहे। भगवान परशुराम की मंगला आरती कर मंदिर पर भंडारे का आयोजन किया गया।

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

जलालाबाद में स्थित भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद

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