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आईवीआरआई में होगा ग्रीन बी ईटर चिडिय़ों का पोस्टमार्टम
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शाहजहांपुर। परौरा थाने के पीछे बरगद के पेड़ के नीचे मृत पड़ी मिलीं 14 ग्रीन बी ईटर प्रजाति की चिड़ियाओं की मौत का कारण जानने के लिए उनका बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में पोस्टमार्टम कराया जाएगा। चिड़ियों को जहरीला दाना की आशंका पर सोमवार को वन विभाग के अधिकारियों ने परौरा जाकर छानबीन की। आसपास के लोगों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास किया कि इससे पहले कभी इतनी संख्या में चिड़ियां मरी पाई गईं अथवा नहीं।
परौर थाने के पीछे रविवार शाम 14 ग्रीन बी ईटर चिड़ियां मरी पाई गई थीं। खेत से लौटते समय परौर के ग्रामीण नेत्रपाल सिंह और नईम खां ने चिड़ियों को मृत पड़ा देखा तो सूचना ग्रामीणों को दी थी। इसके बाद सूचना पर वन विभाग के रेंजर केके सागर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने चिड़ियों के शव कब्जे में ले लिए थे। सोमवार को वह चिड़ियों का शव लेकर जलालाबाद के पशु चिकित्सालय पहुंचे। वहां प्रभारी पशु चिकित्सक डॉ. गया प्रसाद ने शवों की आरंभिक जांच की, लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सील करा दिया।
जिला वन अधिकारी आदर्श कुमार ने बताया कि मौत का कारण जानने के लिए आईवीआरआई में चिड़ियों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। डीएफओ का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में ग्रीन बी ईटर के मरने के कई कारण संभव हैं। हो सकता है कि मधुमक्खी के छत्ते पर जिस वक्त चिड़ियों ने हमला किया हो, उस दौरान उनकी संख्या कम रही हो और मधुमक्खियों के डंक से उनकी मौत हो गई हो। यह भी संभव है कि उन्हें कोई बीमारी रही हो या फिर उन्हें जहरीला दाना देकर मारा गया हो। हालांकि आसपास के लोगों से हुई पूछताछ में चिड़ियों को जहर दिए जाने का कोई सबूत नहीं मिला है।
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परौर थाने के पीछे रविवार शाम 14 ग्रीन बी ईटर चिड़ियां मरी पाई गई थीं। खेत से लौटते समय परौर के ग्रामीण नेत्रपाल सिंह और नईम खां ने चिड़ियों को मृत पड़ा देखा तो सूचना ग्रामीणों को दी थी। इसके बाद सूचना पर वन विभाग के रेंजर केके सागर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने चिड़ियों के शव कब्जे में ले लिए थे। सोमवार को वह चिड़ियों का शव लेकर जलालाबाद के पशु चिकित्सालय पहुंचे। वहां प्रभारी पशु चिकित्सक डॉ. गया प्रसाद ने शवों की आरंभिक जांच की, लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सील करा दिया।
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जिला वन अधिकारी आदर्श कुमार ने बताया कि मौत का कारण जानने के लिए आईवीआरआई में चिड़ियों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। डीएफओ का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में ग्रीन बी ईटर के मरने के कई कारण संभव हैं। हो सकता है कि मधुमक्खी के छत्ते पर जिस वक्त चिड़ियों ने हमला किया हो, उस दौरान उनकी संख्या कम रही हो और मधुमक्खियों के डंक से उनकी मौत हो गई हो। यह भी संभव है कि उन्हें कोई बीमारी रही हो या फिर उन्हें जहरीला दाना देकर मारा गया हो। हालांकि आसपास के लोगों से हुई पूछताछ में चिड़ियों को जहर दिए जाने का कोई सबूत नहीं मिला है।
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