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कलयुग में राम नाम से होगा बेड़ा पार : संत विजय कौशल
Wed, 26 Feb 2025 12:53 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 26 Feb 2025 12:53 AM IST
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मुमुक्षु महोत्सव में रामकथा सुनाते व्यास विजय कौशल महाराज। स्रोत : आयोजन समिति
शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव के प्रथम दिन पावन रामकथा का श्रीगणेश हो गया। वृंदावन के प्रख्यात संत कथा व्यास विजय कौशल महाराज ने कहा कि कलयुग में केवल प्रभु श्रीराम का नाम लेकर ही हम सबका बेड़ा पार हो सकता है।
कथा वाचक ने रामकथा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम सभी को पूर्ण ध्यान, मनन एवं चिंतन के साथ प्रभु श्रीराम के चरित्र का अनुकरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब विभीषण प्रभु श्रीराम से मिलने आए तो प्रभु ने उनसे पूछा कि तुम रावण के भाई होकर भी हमारी भक्ति में लीन कैसे हो गए?
इस पर विभीषण ने उत्तर दिया कि उन्होंने हनुमान के मुख से आपकी कथा का श्रवण किया है। सुनकर लगा कि जिसकी कथा इतनी सुंदर है, वह स्वयं कितना सुंदर होगा।कर्णप्रिय संगीतमय भजनों के माध्यम से राम के चरित्र का बखान करते हुए कथाव्यास ने कहा कि मन में लालसा उत्पन्न होने पर जिज्ञासा भी सहजता के साथ शांत हो जाती है। उन्होंने कहा कि जहां भी रामकथा होती है, वहां पर समस्त देवी-देवता कथा के पूर्ण होने तक विश्राम करते हैं।
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इसके उपरांत कथाव्यास ने एक अन्य प्रसंग सुनाते हुए कहा कि शिव जी कुंभज ऋषि के आश्रम में माता सती को प्रभु श्रीराम की कथा सुनाने ले गए। माता सती ने अहंकारवश कथा पर विश्वास नहीं किया। अहंकार का परिणाम यह हुआ कि वे बीमार पड़ गईं।
कथा आरंभ होने से पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद, स्वामी सर्वेश्वरानंद, स्वामी विशोकानंद, स्वामी चिदंबरानंद एवं स्वामी हरिहरानंद ने श्रोताओं को अपना आशीर्वाद दिया। कथा के विश्राम पर आरती श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ के सचिव अशोक अग्रवाल एवं उनकी पत्नी रचना अग्रवाल ने की। इस अवसर पर संजीव बंसल, राकेश मिश्र अनावा, नरेश मेहरोत्रा, त्रिलोकी नाथ पांडेय, एसएस कॉलेज के सचिव डॉ अवनीश मिश्रा, प्राचार्य प्रो आर के आजाद, उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल, डॉ जयशंकर ओझा, डॉ मेघना मेहंदीरत्ता आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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कथा वाचक ने रामकथा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम सभी को पूर्ण ध्यान, मनन एवं चिंतन के साथ प्रभु श्रीराम के चरित्र का अनुकरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब विभीषण प्रभु श्रीराम से मिलने आए तो प्रभु ने उनसे पूछा कि तुम रावण के भाई होकर भी हमारी भक्ति में लीन कैसे हो गए?
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इस पर विभीषण ने उत्तर दिया कि उन्होंने हनुमान के मुख से आपकी कथा का श्रवण किया है। सुनकर लगा कि जिसकी कथा इतनी सुंदर है, वह स्वयं कितना सुंदर होगा।कर्णप्रिय संगीतमय भजनों के माध्यम से राम के चरित्र का बखान करते हुए कथाव्यास ने कहा कि मन में लालसा उत्पन्न होने पर जिज्ञासा भी सहजता के साथ शांत हो जाती है। उन्होंने कहा कि जहां भी रामकथा होती है, वहां पर समस्त देवी-देवता कथा के पूर्ण होने तक विश्राम करते हैं।
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इसके उपरांत कथाव्यास ने एक अन्य प्रसंग सुनाते हुए कहा कि शिव जी कुंभज ऋषि के आश्रम में माता सती को प्रभु श्रीराम की कथा सुनाने ले गए। माता सती ने अहंकारवश कथा पर विश्वास नहीं किया। अहंकार का परिणाम यह हुआ कि वे बीमार पड़ गईं।
कथा आरंभ होने से पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद, स्वामी सर्वेश्वरानंद, स्वामी विशोकानंद, स्वामी चिदंबरानंद एवं स्वामी हरिहरानंद ने श्रोताओं को अपना आशीर्वाद दिया। कथा के विश्राम पर आरती श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ के सचिव अशोक अग्रवाल एवं उनकी पत्नी रचना अग्रवाल ने की। इस अवसर पर संजीव बंसल, राकेश मिश्र अनावा, नरेश मेहरोत्रा, त्रिलोकी नाथ पांडेय, एसएस कॉलेज के सचिव डॉ अवनीश मिश्रा, प्राचार्य प्रो आर के आजाद, उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल, डॉ जयशंकर ओझा, डॉ मेघना मेहंदीरत्ता आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।