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Shahjahanpur News: जैतीपुर में नहरें ही प्यासी... सिंचाई की आस अधूरी
Sat, 10 May 2025 01:37 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sat, 10 May 2025 01:37 AM IST
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बरेली से खेड़ाबझेड़ा होते हुए निकली नहर दशकों से बंद पड़ी है। संवाद
जैतीपुर। अतिक्रमण और सफाई न होने से क्षेत्र में शारदा नहर खंड की नहरें प्यासी हैं। इस कारण तमाम गांवों में किसानों की सिंचाई की आस अधूरी है। वे सूख रहीं फसलों को देखकर परेशान हैं।
मीरानपुर कटरा से आईं शारदा की दो सहायक नहरें और बरेली से निकले रजबहा से ताहरपुर, खेड़ा रठ, बझेड़ा भगवानपुर, नौगवां, गोहावर, विक्रमपुर और शिकारपुर गांव की सैकड़ों बीघा फसलों की सिंचाई होती रही है। यह बहगुल नदी में जाकर मिल जाती हैं। इसकी कई वर्ष से सफाई भी नहीं हुई है।
सिंचाई विभाग ने भी नहर से नजरें फेर रखी हैं। इस कारण कई जगह किसानों ने नहर की पटरी जोतकर खेत में मिला लीं। मीरानपुर कटरा से ही निकली एक अन्य शारदा नहर की माइनर बैसरा गांव के पास से करकौर होते हुए पलिहुरा गांव तक गई है, लेकिन करकौर से पलिहुरा के बीच कई जगह नहर पर कब्जे हो चुके हैं।
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इसीलिए माइनर में कभी कभार सफाई होने के बाद पानी छोड़े जाने पर वह पलिहुरा तक कभी नहीं पहुंच पाता। शिकायतें करने के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी नहरों की दशा में सुधार को कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।
कभी 13 किमी लंबी इस नहर से 50 से अधिक गांवों के किसान हजारों एकड़ फसलों की सिंचाई करके अच्छा उत्पादन लेते थे, लेकिन अब लंबे समय से नहरों में पानी नहीं आया है। नहर के कुलाबा और नाली गायब हो रही हैं। बड़ी जोत वाले किसान अपने खेतों में बोरिंग करवाकर पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन लघु एवं सीमांत किसान सिंचाई के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।
जैतीपुर समेत धीमरपुरा, बभियाना, पलिहुरा, करकौर, खिरिया, जुझारपुर, कटहा, बकैनिया, गोरा, बैसरा, बैसरी, खमरिया, नगरिया आदि गांवों में सिंचाई के अन्य कोई सरकारी साधन भी नहीं हैं।
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खेतों की जाेताई के लिए भी पानी की जरूरत
इन दिनों खेताें में गन्ना, मक्का, खरबूज, तरबूज आदि फसलें हो रही हैं। तमाम किसानों ने लौकी, तोरई, भिंडी, अरबी, बैंगन, टमाटर, हरी मिर्च आदि फसलें उगा रखी हैं। किसान ये सभी फसलें निजी बोरिंग से सिंचाई कर बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। कई किसानों ने पशुओं के लिए हरा चारा बो रखा है। यही नहीं, गेहूं की फसल कटने से खाली हुए खेतों को अगली फसल के लिए तैयार किया जाना है। उनमें पलेवा से पहले गहरी जोताई होनी है। इसके लिए खेतों में नमी होनी चाहिए, लेकिन वहां धूल उड़ रही है और किसान मानसून की बारिश के भरोसे हैं। इससे खरीफ सीजन में धान की रोपाई में देरी होगी, क्योंकि मानसून की शुरुआत में अभी एक माह से ज्यादा वक्त बाकी है।
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जैतीपुर क्षेत्र में खेड़ा बझेड़ा और मीरानपुर कटरा की ओर से आने वाली सभी नहरों का नियंत्रण शारदा नहर खंड के बरेली डिवीजन के पास है। यह नहरें जनपद की सीमा के अंदर भले ही आती हों, उनमें पानी की आपूर्ति और मरम्मत आदि सभी कार्य कराने के लिए बरेली डिवीजन उत्तरदायी है।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग (शारदा नहर खंड)
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मीरानपुर कटरा से आईं शारदा की दो सहायक नहरें और बरेली से निकले रजबहा से ताहरपुर, खेड़ा रठ, बझेड़ा भगवानपुर, नौगवां, गोहावर, विक्रमपुर और शिकारपुर गांव की सैकड़ों बीघा फसलों की सिंचाई होती रही है। यह बहगुल नदी में जाकर मिल जाती हैं। इसकी कई वर्ष से सफाई भी नहीं हुई है।
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सिंचाई विभाग ने भी नहर से नजरें फेर रखी हैं। इस कारण कई जगह किसानों ने नहर की पटरी जोतकर खेत में मिला लीं। मीरानपुर कटरा से ही निकली एक अन्य शारदा नहर की माइनर बैसरा गांव के पास से करकौर होते हुए पलिहुरा गांव तक गई है, लेकिन करकौर से पलिहुरा के बीच कई जगह नहर पर कब्जे हो चुके हैं।
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इसीलिए माइनर में कभी कभार सफाई होने के बाद पानी छोड़े जाने पर वह पलिहुरा तक कभी नहीं पहुंच पाता। शिकायतें करने के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी नहरों की दशा में सुधार को कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।
कभी 13 किमी लंबी इस नहर से 50 से अधिक गांवों के किसान हजारों एकड़ फसलों की सिंचाई करके अच्छा उत्पादन लेते थे, लेकिन अब लंबे समय से नहरों में पानी नहीं आया है। नहर के कुलाबा और नाली गायब हो रही हैं। बड़ी जोत वाले किसान अपने खेतों में बोरिंग करवाकर पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन लघु एवं सीमांत किसान सिंचाई के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।
जैतीपुर समेत धीमरपुरा, बभियाना, पलिहुरा, करकौर, खिरिया, जुझारपुर, कटहा, बकैनिया, गोरा, बैसरा, बैसरी, खमरिया, नगरिया आदि गांवों में सिंचाई के अन्य कोई सरकारी साधन भी नहीं हैं।
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खेतों की जाेताई के लिए भी पानी की जरूरत
इन दिनों खेताें में गन्ना, मक्का, खरबूज, तरबूज आदि फसलें हो रही हैं। तमाम किसानों ने लौकी, तोरई, भिंडी, अरबी, बैंगन, टमाटर, हरी मिर्च आदि फसलें उगा रखी हैं। किसान ये सभी फसलें निजी बोरिंग से सिंचाई कर बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। कई किसानों ने पशुओं के लिए हरा चारा बो रखा है। यही नहीं, गेहूं की फसल कटने से खाली हुए खेतों को अगली फसल के लिए तैयार किया जाना है। उनमें पलेवा से पहले गहरी जोताई होनी है। इसके लिए खेतों में नमी होनी चाहिए, लेकिन वहां धूल उड़ रही है और किसान मानसून की बारिश के भरोसे हैं। इससे खरीफ सीजन में धान की रोपाई में देरी होगी, क्योंकि मानसून की शुरुआत में अभी एक माह से ज्यादा वक्त बाकी है।
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जैतीपुर क्षेत्र में खेड़ा बझेड़ा और मीरानपुर कटरा की ओर से आने वाली सभी नहरों का नियंत्रण शारदा नहर खंड के बरेली डिवीजन के पास है। यह नहरें जनपद की सीमा के अंदर भले ही आती हों, उनमें पानी की आपूर्ति और मरम्मत आदि सभी कार्य कराने के लिए बरेली डिवीजन उत्तरदायी है।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग (शारदा नहर खंड)