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जनविरोधी एक्ट थोपने से आईएमए में उबाल
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Wed, 27 Jul 2016 11:09 PM IST
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जनविरोधी एक्ट थोपने से आईएमए में उबाल
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प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सीय सेवा पर दैनिक स्थापना (रजिस्ट्रीकरण और विनिमय) नियमावली थोपे जाने का विरोध शुरू हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बुधवार को प्रेसवार्ता के माध्यम से सरकार के खिलाफ कड़े तेवर दिखाए और एक्ट के विरोध में 30 जुलाई को प्रदेश बंद किए जाने के निर्णय से अवगत कराया।
शहर के एक होटल में आहुत प्रेसवार्ता में आईएमए अध्यक्ष डॉ. सोम शेखर दीक्षित ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी, तब इस जनविरोधी एक्ट को पांच मिनट में बिना किसी रुकावट के पास कर दिया गया, बाद बीएसपी सरकार ने प्रदेश में इसे स्वीकृति दे दी और अब सपा सरकार ने चिकित्सकों तथा आम लोगों की परेशानी समझे बिना इसे लागू करने का फरमान सुना दिया। इसके पीछे कारपोरेट हॉस्पिटल को बढ़ावा देना ही एकमात्र उद्देश्य प्रतीत हो रहा है। सरकार चाहती है कि अन्य चिकित्सक अपने नर्सिंग होम, क्लीनिक आदि बंद कर कहीं नौकरी शुरू कर दें।
सचिव डॉ. संजय पाठक ने कहा कि एक्ट के लागू होने से चिकित्सकों को मरीजों का रिकार्ड आनलाइन करना अनिवार्य होगा। कोई भी किराए के भवन में क्लीनिक नहीं चला पाएगा, मरीजों का इलाज करना भी सरकार बताएगी और किस मर्ज के लिए कौन सी दवा दी जाए, यह भी सरकार तय करेगी। नए एक्ट से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। कोई भी चिकित्सक क्लीनिक से बाहर कैंप नहीं लगा सकता। क्योंकि प्रैक्टिस स्थल का भी पंजीकरण करना अनिवार्य किया जा रहा है। डॉ. पाठक ने बताया कि इससे चिकित्सा की सभी पैथी प्रभावित होंगी।
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इस अवसर पर कोषाध्यक्ष डॉ. रिजवान खान ने बताया कि जनविरोधी एक्ट थोपे जाने से अधिकांश क्लीनिक खास तौर पर एकल क्लीनिक बंद हो जाएंगे। इसका खामियाजा सभी डॉक्टरों को भुगतना होगा। डॉ. पीके अग्रवाल और डॉ. पीएन रस्तोगी ने बताया कि पश्चिमी देशों के मानकों के आधार पर बनाए गए एक्ट में सभी अस्पतालों में मान्यता प्राप्त नर्सों तथा अन्य चिकित्सा सेवा कर्मियों को रखना अनिवार्य किया गया है, जबकि डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 24 लाख नर्सों की कमी है। इससे अधिकांश अस्पताल और नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे।
एक्ट के विरोध में प्रदेश स्तर पर 30 जुलाई को सभी चिकित्सक विरोध दिवस मनाकर एक्ट से होने वाले नुकसानों के बारे में जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा। इस दिन चिकित्सक क्लीनिक, अस्पताल और नर्सिंग होम में विरोध स्वरूप मराजों का इलाज भी नहीं करेंगे। प्रेसवार्ता में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दीपा सक्सेना, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. रेशू अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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शहर के एक होटल में आहुत प्रेसवार्ता में आईएमए अध्यक्ष डॉ. सोम शेखर दीक्षित ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी, तब इस जनविरोधी एक्ट को पांच मिनट में बिना किसी रुकावट के पास कर दिया गया, बाद बीएसपी सरकार ने प्रदेश में इसे स्वीकृति दे दी और अब सपा सरकार ने चिकित्सकों तथा आम लोगों की परेशानी समझे बिना इसे लागू करने का फरमान सुना दिया। इसके पीछे कारपोरेट हॉस्पिटल को बढ़ावा देना ही एकमात्र उद्देश्य प्रतीत हो रहा है। सरकार चाहती है कि अन्य चिकित्सक अपने नर्सिंग होम, क्लीनिक आदि बंद कर कहीं नौकरी शुरू कर दें।
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सचिव डॉ. संजय पाठक ने कहा कि एक्ट के लागू होने से चिकित्सकों को मरीजों का रिकार्ड आनलाइन करना अनिवार्य होगा। कोई भी किराए के भवन में क्लीनिक नहीं चला पाएगा, मरीजों का इलाज करना भी सरकार बताएगी और किस मर्ज के लिए कौन सी दवा दी जाए, यह भी सरकार तय करेगी। नए एक्ट से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। कोई भी चिकित्सक क्लीनिक से बाहर कैंप नहीं लगा सकता। क्योंकि प्रैक्टिस स्थल का भी पंजीकरण करना अनिवार्य किया जा रहा है। डॉ. पाठक ने बताया कि इससे चिकित्सा की सभी पैथी प्रभावित होंगी।
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इस अवसर पर कोषाध्यक्ष डॉ. रिजवान खान ने बताया कि जनविरोधी एक्ट थोपे जाने से अधिकांश क्लीनिक खास तौर पर एकल क्लीनिक बंद हो जाएंगे। इसका खामियाजा सभी डॉक्टरों को भुगतना होगा। डॉ. पीके अग्रवाल और डॉ. पीएन रस्तोगी ने बताया कि पश्चिमी देशों के मानकों के आधार पर बनाए गए एक्ट में सभी अस्पतालों में मान्यता प्राप्त नर्सों तथा अन्य चिकित्सा सेवा कर्मियों को रखना अनिवार्य किया गया है, जबकि डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 24 लाख नर्सों की कमी है। इससे अधिकांश अस्पताल और नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे।
एक्ट के विरोध में प्रदेश स्तर पर 30 जुलाई को सभी चिकित्सक विरोध दिवस मनाकर एक्ट से होने वाले नुकसानों के बारे में जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा। इस दिन चिकित्सक क्लीनिक, अस्पताल और नर्सिंग होम में विरोध स्वरूप मराजों का इलाज भी नहीं करेंगे। प्रेसवार्ता में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दीपा सक्सेना, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. रेशू अग्रवाल आदि मौजूद रहे।