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जुलाई में पानी कम बरसा तो करनी होगी सूखा राहत की तैयारी

Mon, 11 Jul 2022 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 12:52 AM IST
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If there is less rain in July then preparations will have to be made for drought relief
शाहजहांपुर में रविवार को आसमान छाए बादल बिन बरसे उड़ गए । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। इस वर्ष जून माह में बीते वर्ष की तुलना में 56 मिमी बारिश कम हुई जो माह के औसत वर्षा मानक से भी कम है। मौसम के जानकारों का कहना है कि मानसून की चाल बेढे़गी हुई तो जुलाई माह में भी पानी कम गिर सकता है और ऐसी स्थिति में प्रशासन को सूखा राहत की तैयारी करनी होगी। इस बीच, रविवार को भी सुबह बादल होने से न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस स्थिर रहा, लेकिन बाद में धूप निकली तो गर्मी बढ़ने के साथ अधिकतम तापमान भी 4.5 डिग्री बढ़कर 35.5 डिग्री सेल्सियस हो गया।
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मानसून की शुरुआत जून से मानी जाती है और जुलाई तक झमाझम बारिश होने की संभावना ज्यादा बनी रहती है, लेकिन इन्हीं दोनों माह में औसत वर्षा में कमी आ रही है। बारिश में कमी की शुरुआत बीते जून से हो चुकी है। इस वर्ष जून में केवल 81 मिमी बरसात हुई जो बीते वर्ष की तुलना में करीब 24 प्रतिशत कम है। अब एक तिहाई जुलाई बीत चुकी है, लेकिन माह के शुरुआती दस दिन में सिर्फ 21 मिमी पानी गिरा जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में 34 मिमी बारिश हुई थी। यही नहीं, बारिश के लिहाज से जून-जुलाई को जोड़कर देखें तो भी बारिश में कमी आ रही है।
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गन्ना शोध परिषद के मौसम अनुभाग के अनुसार वर्ष 2020 के जून व जुलाई माह में 460 मिमी वर्षा हुई, लेकिन बीते वर्ष इन्हीं दोनों माह में बारिश 422 मिमी तक सीमित रही। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार वर्ष 2008 से अभी तक तीन बार ऐसा हुआ जब केवल जून माह में बारिश 200 मिमी से अधिक हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008, 2010 और 2013 को छोड़कर हर साल जून में बारिश 50 से 60 मिमी पर सिमट रही है, जबकि जून 2014 में सिर्फ नौ मिमी बारिश हो सकी। मानसूनी बारिश में निरंतर आ रही कमी कृषि क्षेत्र के लिए निराशाजनक स्थिति पैदा कर सकती है।
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हालांकि, उनका कहना है कि बारिश की संभावना अक्तूबर के पहले सप्ताह तक बनी रहेगी क्योंकि बीते वर्ष अक्तूबर के दूसरे सप्ताह तक बारिश का दौर जारी रहा और 19 अक्तूबर को 115 मिमी पानी बरस गया था। डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण रात के तापमान में गिरावट नहीं आ रही और इसीलिए दिन में गर्मी के साथ उमस बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बैरोमीटर सूचकांक सामान्य बिंदु के आसपास है। इसलिए सोमवार को भारी वर्षा के आसार बन रहे हैं।

मानसून सीजन में माहवार वर्षा मानक (मिमी)
माह वर्षा मानक
जून 107
जुलाई 327
अगस्त 179
सितंबर 188
सूखा प्रभावित किसानों को मुफ्त मिलेगा बीज
खरीफ सीजन में 2.43 लाख हेक्टेयर मेें फसलों की बुवाई का लक्ष्य तय किया गया। इनमें धान की विभिन्न किस्मों के लिए 2.07 लाख हेक्टेयर रकबा निर्धारित है, लेकिन गत जून में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से अभी बमुश्किल 70 हजार हेक्टेयर मेें धान की रोपाई हो सकी। इसके लिए भी किसानों को नलकूपों का सहारा लेना पड़ा। पानी कम बरसने की स्थिति में धान का काफी रकबा खाली रहने की आशंका है और इसे देखते कृषि विभाग ने विकल्प के तौर पर मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि का बीज पर्याप्त मात्रा में राजकीय बीज भंडारों पर पहुंचा दिया गया है जो कि बाढ़ और सूखा प्रभावित किसानों को मुफ्त दिया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के अनुसार हर साल की तरह इस बार भी विभाग ने बाढ़ के साथ सूखा से निपटने की तैयारी कर ली है।
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