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Shahjahanpur News: प्रयास हों तो फिर से बह सकती भैंसी नदी की जलधार

Fri, 06 Jun 2025 12:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jun 2025 12:31 AM IST
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If efforts are made then the water of Bhainsi river can flow again
पुवायां। मानसून से पहले यदि गंभीर प्रयास किए जाएं तो गोमती की सहायक नदी भैंसी फिर से सदानीरा हो सकती है। डीएम ने भैंसी नदी के वर्षों से सूखी होने का संज्ञान लिया है। इसको लेकर जल्द कार्ययोजना बनाए जाने की उम्मीद है।
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पुवायां तहसील में गोमती नदी की तीन सहायक नदियां झुकना, कठिना और भैंसी हैं। भैंसी लगभग 15 वर्ष से सूखी पड़ी है। अथाह प्रदूषण और अवैध कब्जों के कारण नदी दम तोड़ चुकी है। भैंसी नदी शाहजहांपुर और पीलीभीत बॉर्डर पर पूरनपुर तहसील के डंडरौल और शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किमी में फैली भैंसासुर झील से निकली है।
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वहां से प्रवाहित होते हुए भैंसी नदी पुवायां के जसवंतपुर के पास लखीमपुर की सीमा में प्रवेश करती है और 42 किमी का सफर तय कर लखीमपुर के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है। लोकभारती संस्था ने जुलाई 2019 में अभियान चलाकर भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया था।
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इसमें डीएम और सीडीओ सहित तमाम अधिकारियों ने भी सहभागिता की थी। तब भैंसी नदी के उद्गम स्थल भैंसार झील से करीब पांच किमी आगे तक धारा बहने लगी थी, लेकिन बाद में फिर सब कुछ जस का तस हो गया। लोकभारती की ओर से पिछले माह पदयात्रा निकालकर लोगों को भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जागरूक किया गया था।
अब डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने भैंसी नदी के सूखे होने का संज्ञान लेते हुए नदी में फिर से जलधार के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश एसडीएम को दिए हैं। डीएम शनिवार को भैंसी नदी का जायजा ले सकते हैं। गंभीर प्रयास हुए तो भैंसी नदी फिर से पुराने स्वरूप में आकर गोमती को ऑक्सीजन देने का काम करेगी।
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47 गांवों के लोगों को मिलता था लाभ, अब तमाम जगह होता है खनन
कभी पुवायां और लखीमपुर की मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के करीब 47 गांवों के लोगों को भैंसी नदी का लाभ मिलता था। नदी के पानी से फसलों की सिंचाई होती थी। कई अप्रत्यक्ष लाभ भी थे लेकिन बाद में नदी के किनारे बने दो कारखानों ने नदी में अपशिष्ट छोड़कर नदी का पानी जलीय जंतुओं के लिए जहर बना दिया और रही-सही कसर कब्जों ने पूरी कर दी। नदी में 15 वर्ष से धार नहीं बह सकी है। भैंसी नदी में तमाम स्थानों पर लोगों ने पूरी तरह से जुताई कर खेती करनी शुरू कर दी है तो कई स्थानों पर अवैध खनन किया जा रहा है। इससे नदी में गहरे गड्ढे हो गए हैं। कुछ कारखाना स्वामी नदी में गंदा पानी भी प्रवाहित कर रहे हैं। नदी के जलस्रोत रहे तालाबों पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिस कारण नदी को पानी नहीं मिल पाता है। इससे नदी मृतप्राय हो गई है।

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झील के पास किसानों ने मोड़ा पानी का रुख
भैंसी नदी के पुनर्जीवन के लिए कार्य कर रही लोकभारती संस्था ने पदयात्रा के साथ ही अप्रैल में एक रिपोर्ट भी तैयार की थी। रिपोर्ट में जिक्र है कि शारदा नहर से जल रिसाव होकर सिद्धबाबा के पास झाबर में आता है और यहां से पानी नदी में आता था। बाहर से आकर बसे कुछ किसानों ने अपने खेतों को पानी से बचाने के लिए अवैध खोदाई कर जलधार को मोड़ दिया है, इससे नदी में पानी आना बंद हो गया है।
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