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‘मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए’
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 06 Apr 2015 11:56 PM IST
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शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन संगोष्ठी एवं स्कूल चलो अभियान के तहत एक संगोष्ठी भावलखेड़ा ब्लाक संसाधन केंद्र पर हुई। संगोष्ठी में शिक्षकों को उनके मूल शिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जागरूक किया गया। शिक्षण कार्य के प्रति लापरवाह शिक्षकों को उनके भविष्य के प्रति चेताया गया। इस दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को पेश करके लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
शिक्षकों को उनके कर्तव्य याद दिलाते हुए एबीआरसी संदीप मिश्रा के निर्देशन दुष्यंत कुमार की कविता को पढ़ा गया, जिसे सभी शिक्षकों ने गाते हुए ‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए...’। इसके जरिए शिक्षकों को बताया गया कि शैक्षिक संगोष्ठी करने का मतलब हंगामा खड़ा करना नहीं है, इसका उद्देश्य है कि शिक्षक बच्चों को मन लगाकर शिक्षित करें, जिससे समाज की तस्वीर को बदला जा सके।
इसमें बीएसए राजेश वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को अपना मानना चाहिए। बताया कि उन्हीं की वजह से उन्हें नौकरी मिली है। यदि ये बच्चे न हों तो शिक्षकों की जरूरत ही क्या है। इसलिए शिक्षकों को पूरे मनोयोग से शिक्षण कार्य करने की जरूरत है। बोले कि सातवें वेतन आयोग में परफार्मेंस के हिसाब से वेतन वृद्घि लगाई जाएगी। इसलिए शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
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इस दौरान एसएस कालेज के प्रवक्ता डॉ. प्रभात शुक्ला, खंड शिक्षा अधिकारी मनोज बोस, नगर शिक्षा अधिकारी मुन्नालाल त्रिवेदी, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री देवेश वाजपेयी आदि ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने बेटियों को बचाने, नारी सशक्तिकरण, प्लास्टिक का प्रयोग न करने और पौधे लगाने के लिए अंग्रेजी में स्पीच दी।
संगोष्ठी के दौरान एक शिक्षक को मोबाइल में व्यस्त देखकर बीएसए ने उसे स्टेज पर बुलाकर संगोष्ठी के संबंध में बोलने के लिए खड़ा कर दिया। इस मौके पर दपिंदर कौर, निकहत परवीन, सुखमीत कौर, राजकुमार तिवारी, मसूद आलम खां, रामसेवक शर्मा, शिक्षामित्र एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष यदवीर सिंह यादव आदि शिक्षक मौजूद रहे।
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शिक्षकों को उनके कर्तव्य याद दिलाते हुए एबीआरसी संदीप मिश्रा के निर्देशन दुष्यंत कुमार की कविता को पढ़ा गया, जिसे सभी शिक्षकों ने गाते हुए ‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए...’। इसके जरिए शिक्षकों को बताया गया कि शैक्षिक संगोष्ठी करने का मतलब हंगामा खड़ा करना नहीं है, इसका उद्देश्य है कि शिक्षक बच्चों को मन लगाकर शिक्षित करें, जिससे समाज की तस्वीर को बदला जा सके।
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इसमें बीएसए राजेश वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को अपना मानना चाहिए। बताया कि उन्हीं की वजह से उन्हें नौकरी मिली है। यदि ये बच्चे न हों तो शिक्षकों की जरूरत ही क्या है। इसलिए शिक्षकों को पूरे मनोयोग से शिक्षण कार्य करने की जरूरत है। बोले कि सातवें वेतन आयोग में परफार्मेंस के हिसाब से वेतन वृद्घि लगाई जाएगी। इसलिए शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
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इस दौरान एसएस कालेज के प्रवक्ता डॉ. प्रभात शुक्ला, खंड शिक्षा अधिकारी मनोज बोस, नगर शिक्षा अधिकारी मुन्नालाल त्रिवेदी, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री देवेश वाजपेयी आदि ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने बेटियों को बचाने, नारी सशक्तिकरण, प्लास्टिक का प्रयोग न करने और पौधे लगाने के लिए अंग्रेजी में स्पीच दी।
संगोष्ठी के दौरान एक शिक्षक को मोबाइल में व्यस्त देखकर बीएसए ने उसे स्टेज पर बुलाकर संगोष्ठी के संबंध में बोलने के लिए खड़ा कर दिया। इस मौके पर दपिंदर कौर, निकहत परवीन, सुखमीत कौर, राजकुमार तिवारी, मसूद आलम खां, रामसेवक शर्मा, शिक्षामित्र एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष यदवीर सिंह यादव आदि शिक्षक मौजूद रहे।