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मिलावट के सैकड़ों मामले विभिन्न अदालतों में लंबित, धंधेबाज बेखौफ

Tue, 01 Mar 2022 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 12:17 AM IST
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Hundreds of cases of adulteration pending, businessmen fearless
शाहजहांपुर। खान-पान की वस्तुओं में अखाद्य पदार्थों की मिलावट का खेल पूरे साल चलता है। इसकी रोकथाम के लिए सिर्फ त्योहारों या फिर अन्य खास मौकों पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) के अधिकारियों की टीमें छापे मारकर नमूने लेने का अभियान चलाती हैं। इस दौरान जो नमूने प्रयोगशाला जांच में फेल हो जाते हैं, उनसे संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं, लेकिन गत दो वर्ष से उनकी सुनवाई लंबित है।
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विभाग के न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन के न्यायालय समेत अन्य अदालतों में लगभग 300 मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन पहले कोरोना काल और बाद में चुनाव का सिलसिला शुरू हो जाने से उनकी सुनवाई पर ब्रेक लग गया है। अदालती कार्यवाही में हो रही देरी के कारण मिलावट के धंधेबाज बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं।
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15 दिन में जांच रिपोर्ट मिलने का नियम
आमतौर पर सील किए जो नमूने जांच के लिए राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे जाते हैं, खाद्य सुरक्षा अधिनियम (पीएफए) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएसए) के प्रावधानों के अनुसार उनकी रिपोर्ट 15 दिन में मिल जानी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार एक्ट में ऐसे मामलों में निर्णय की कोई समय सीमा तय नहीं है।
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इन पर विभागीय न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन कोर्ट से जुर्माना होना है या फिर जो नमूने असुरक्षित पाए जाने पर उनसे संबंधित मुकदमे कारावास की सजा के लिए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी और अतिरिक्त जिला जजों के न्यायालय में भेजे जाते है। लेकिन, कार्यवाही की पहली सीढ़ी के तौर पर नमूनों की जांच के लिए अधिकतम दो सप्ताह समय सीमा तय है।
मुकदमे लंबित रहने की अन्य वजहें
पहले मिलावट के सभी मामलों में पीएफए के तहत कार्रवाई होती थी, लेकिन बाद में एफएसएसए लागू होने पर मिलावट के मामले अदालतों तक ले जाने की प्रक्रिया जटिल हो गई। अधिकारियों के तबादले भी न्यायिक प्रक्रिया में बाधक बनते रहे। तारीख पर कभी एफएसओ (खाद्य सुरक्षा अधिकारी) तो कभी प्रतिवादी के उपस्थित नहीं हो पाने से अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती रही।
यही नहीं, प्रतिवादी बनाए आरोपियों की भी यही कोशिश रहती है कि जहां तक संभव हो मुकदमों को लंबा खींचा जाए। वर्तमान में पीएफए और एफएसएसए एक्ट में 146 मुकदमे सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन हैं। इनमें एफएसएसए एक्ट के 46 मामलों में आरोपियों को कारावास की सजा होनी तय मानी जा रही है। यही नहीं, एडीएम कोर्ट में वित्त वर्ष 2017-18 के मिलावट से संबंधित सात वर्ष 18-19 के 86 और वित्त वर्ष 19-20 के 103 मुकदमे लंबित हैं।

चालू वित्त वर्ष में अब तक हुई कार्रवाई
सामान्य सर्वे/निरीक्षण 1376
प्रतिष्ठानों पर छापामारी 210
नमूना संग्रह 210
जांच रिपोर्ट प्राप्त 109
अधोमानक नमूने 36
घातक मिले नमूने 11
मिसब्रांडेड नमूने 12
जुर्माना की कार्रवाई 13
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चालू वित्त वर्ष में मुकदमों की स्थिति
एडीएम कोर्ट में दर्ज मुकदमे 74
एडीएम कोर्ट में निस्तारित मुकदमे 28
एडीएम कोर्ट में वसूला जुर्माना 2,62,500 रुपये
एसीजेएम कोर्ट में दर्ज मुकदमे 10
एसीजेएम कोर्ट में निस्तारित मुकदमे 02
एसीजेएम कोर्ट में वसूला जुर्माना 73000 रुपये
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विभाग का यही प्रयास होता है कि जो मुकदमे अदालतों में दायर किए हैं, उनकी पैरवी कर निस्तारण जल्द कराया जाए, ताकि मिलावट के आरोपियों को अपने बचाव का मौका नहीं मिल सके। बीते दो वर्ष के दौरान कोरोना काल में अदालतें कई माह बंद रहने के बाद खुलीं, लेकिन बाद में भी मुकदमों की सुनवाई नहीं हो सकी। इस अवधि में लोक अदालतों के आयोजन भी बंद रहे। इससे पीएफए और एफएसएसए के तहत लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ गई। बाद में सरकारी तंत्र त्रिस्तरीय पंचायत और विधानसभा चुनाव में व्यस्त हो गया, लेकिन अब हालात सामान्य होने से मुकदमों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना है। -विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी (एफएसडीए)
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