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नहर कटने से सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Thu, 22 Dec 2016 11:14 PM IST
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नहर विभाग की लापरवाही से किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो गई। विकास खंड भावलखेड़ा के ग्राम ग्वारी, जलालपुर, सुजातपुर, ऊट्हा आदि गांवों की नहर कटने से सैकड़ों बीघा गेहूं, सरसों, मसूर आदि बर्बाद हो गई। राष्ट्रीय जल प्रबंधन की नहर दिलावरपुर व देवकली गांवों से होकर निकली है जिसके दिलावरपुर में कट जाने से उसका पानी खेतों में दौड़ पड़ा। उससे लगभग आधा दर्जन गांव पानी की चपेट में आ गए हैं। खेतों में कई फीट पानी भर गया जिससे गेहूं, सरसों व मसूर की फसल डूब गई। खेतों में पानी ज्यादा भर जाने से फसल सड़ गई है। उटहा निवासी कृषक लालता प्रसाद ने बताया कि उन्होंने उधार रुपये लेकर 15 बीघा खेत पर गेहूं की फसल बोई थी जो नहर का पानी भरने से बर्बाद हो गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनको इस नहर से पानी नहीं मिलता है लेकिन उसके कटने का नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ता है। सुजातपुर निवासी कृषक रामगोपाल ने बताया कि उनके गांव से नहर होकर नहीं निकलती है जिसका उन्हें कोई फायदा नही मिलता है। लेकिन जब पानी कटता है तो फसल की बर्बादी उनकी होती है। उन्होंने बताया कि 18 बीघा खेत में गेहूं बोया था और उसमें खाद पानी भी लगा चुके थे। नहर के पानी ने उनको बर्बाद कर दिया। पहले नदी की बाढ़ ने बर्बाद किया। उसके बाद नोटबंदी के कारण बीज आदि मिलना मुश्किल हुआ और अब नहर के पानी ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है। उटहा गांव निवासी श्यामवती ने बताया कि उन्होंने 10 बीघा में गेहूं, सरसों व मसूर की फसल लगाई थी जो नहर का पानी भरने से बर्बाद हो गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का विवाह भी गर्मियों में होना तय हुआ है। फसल बर्बाद हो जाने से अब वो कैसे विवाह कर पाएंगी, इसकी चिंता भी अलग से खाए जा रही है। यह सब कहते हुए महिला की आंखों में पानी भर आया। ग्राम पंचायत ग्वारी निवासी अवधेश ने बताया कि इस समय नहर में पानी नहीं आना चाहिए और जब पानी की जरूरत होती है तब नही आता है। जब नहर में पानी आया तब तक किसान अपने खेतों में पानी लगा चुके थे। साथ ही उन्होंने बताया कि नहर उनके खेतों से चार किमी दूर है। इससे उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता है लेकिन नुकसान जरूर मिलता है। कृषक गया प्रसाद ने बताया कि उनकी भी पांच बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। नोटबंदी के कारण वह ज्यादा फसल नहीं बो पाए थे। घर के खाने के लिए गेहूं बोया था जो बर्बाद हो गया। इससे उन्हें खाने के लिए गेहूं और जानवरों के लिए भूसा मिलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि नहर विभाग के अधिकारियों को फोन द्वारा सूचना दी गई लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ और पिछले 8 दिनों से लगातार पानी बह रहा है और कोई भी कर्मचारी अभी तक देखने नहीं आया है। साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि पिछले माह कुछ मजदूरों द्वारा नहर विभाग के कर्मचारियों ने पानी कटने वाली जगह पर बोरियों में मिट्टी भरकर रखी गई थीं जो पानी के तेज बहाव में बह गई और पानी खेतों की और मुड़ गया जिससे किसानों का सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो गई।
भावलखेड़ा ब्लॉक के बताए जा रहे गांवों से गुजर रही नहर को स्थानीय ग्रामीणों ने ही दस दिन पहले भी काटा था। तब तो बंधवाया गया था। इसके बाद दो दिन पहले रात में फिर किसी ने नहर काट दी। उसे भी बंधवा दिया गया। अब नहर से खेतों में पानी नहीं जा रहा। - उस्मान अली, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना।
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भावलखेड़ा ब्लॉक के बताए जा रहे गांवों से गुजर रही नहर को स्थानीय ग्रामीणों ने ही दस दिन पहले भी काटा था। तब तो बंधवाया गया था। इसके बाद दो दिन पहले रात में फिर किसी ने नहर काट दी। उसे भी बंधवा दिया गया। अब नहर से खेतों में पानी नहीं जा रहा। - उस्मान अली, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना।
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