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Shahjahanpur News: लगातार बारिश से खेतों में भीगकर काली पड़ गई मूंगफली की फसल
Mon, 08 Jul 2024 04:34 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 08 Jul 2024 04:34 AM IST
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खेत में सड़ने से बचाने को मूंगफली की खोदाई करते किसान। संवाद
जलालाबाद। लगातार बारिश से खेतों में मूंगफली की फसल काली पड़ने लगी है। इस कारण थोक में इसके दाम भी 50 फीसदी से ज्यादा गिर गए हैं।
बीते साल बैसाखी मूंगफली की अच्छी पैदावार हुई थी। इससे क्षेत्र के काश्तकारों ने इस बार बड़े पैमाने पर मूंगफली बोई थी, लेकिन जैसे ही फसल तैयार हुई बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि जिन काश्तकारों की फसल खुद गई थी, वह घर तक पहुंचाने से पहले खेतों में पानी में भीग गई। यही नहीं, जिन खेतों में तैयार हो चुकी मूंगफली की पानी के कारण खोदाई नहीं हो पा रही है, उसके दाने अंंकुरित होकर दोबारा जमने लगे हैं।
पिछले साल बैसाखी मूंगफली का मूल्य 6500 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल था। एक बीघे में ढाई से तीन क्विंटल मूंगफली की पैदावार होने से लागत निकालकर काश्तकार को एक बीघे में पंद्रह से अठारह हजार रुपये मिल जाते थे। पिछले साल के मुनाफे को देखते हुए अनुमान के मुताबिक इस साल तहसील क्षेत्र में चार सौ हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में मूंगफली बोई गई है।
मूंगफली की स्थानीय मंडी में यहां के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश व गुजरात से आने वाले व्यापारी मूंगफली खरीदकर ले जाते हैं। इस कारण मूंगफली ऊंचे थोक भाव पर हाथों-हाथ बिक जाती है। बरसात से पहले जिनकी मूंगफली खोद ली गई, उन काश्तकारों को इस बार 5500 से 6000 रुपये प्रति क्विंंटल का रेट मिल गया।
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अब ज्यादा बरसात होने से बाहर के व्यापारी नहीं आ रहे हैं। खोदी गई मूंगफली भीगकर काली पड़ जाने से मौजूदा समय उसके थोक दाम 2000 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। इतने कम भाव मिलने पर किसानों को लागत निकालनी भी मुश्किल पड़ रही है।
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बारिश होने से अगर खेत में पानी भर जाता है तो मूंगफली का डूब जाती तो सड़ने की संभावना बढ़ जाती है। अगर खेत में पानी नहीं भरता है तो फसल को कोई खास नुकसान नहीं है। - डॉ. एनसी त्रिपाठी, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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बीते साल बैसाखी मूंगफली की अच्छी पैदावार हुई थी। इससे क्षेत्र के काश्तकारों ने इस बार बड़े पैमाने पर मूंगफली बोई थी, लेकिन जैसे ही फसल तैयार हुई बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि जिन काश्तकारों की फसल खुद गई थी, वह घर तक पहुंचाने से पहले खेतों में पानी में भीग गई। यही नहीं, जिन खेतों में तैयार हो चुकी मूंगफली की पानी के कारण खोदाई नहीं हो पा रही है, उसके दाने अंंकुरित होकर दोबारा जमने लगे हैं।
पिछले साल बैसाखी मूंगफली का मूल्य 6500 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल था। एक बीघे में ढाई से तीन क्विंटल मूंगफली की पैदावार होने से लागत निकालकर काश्तकार को एक बीघे में पंद्रह से अठारह हजार रुपये मिल जाते थे। पिछले साल के मुनाफे को देखते हुए अनुमान के मुताबिक इस साल तहसील क्षेत्र में चार सौ हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में मूंगफली बोई गई है।
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मूंगफली की स्थानीय मंडी में यहां के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश व गुजरात से आने वाले व्यापारी मूंगफली खरीदकर ले जाते हैं। इस कारण मूंगफली ऊंचे थोक भाव पर हाथों-हाथ बिक जाती है। बरसात से पहले जिनकी मूंगफली खोद ली गई, उन काश्तकारों को इस बार 5500 से 6000 रुपये प्रति क्विंंटल का रेट मिल गया।
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अब ज्यादा बरसात होने से बाहर के व्यापारी नहीं आ रहे हैं। खोदी गई मूंगफली भीगकर काली पड़ जाने से मौजूदा समय उसके थोक दाम 2000 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। इतने कम भाव मिलने पर किसानों को लागत निकालनी भी मुश्किल पड़ रही है।
बारिश होने से अगर खेत में पानी भर जाता है तो मूंगफली का डूब जाती तो सड़ने की संभावना बढ़ जाती है। अगर खेत में पानी नहीं भरता है तो फसल को कोई खास नुकसान नहीं है। - डॉ. एनसी त्रिपाठी, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र