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चीन, इंडोनेशिया के गन्ने के बारे में समझकर लौटी टीम
शाहजहांपुर।
Updated Thu, 05 Feb 2015 11:02 PM IST
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गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा एवं गन्ना आयुक्त सुभाष चंद्र शर्मा, चीनी उद्योग के विशेष सचिव राममोहन सक्सेना और गन्ना समितियों के अध्यक्ष सहित 25 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल 10 दिन की विदेश यात्रा से लौट आया। चीनी परता के सार्थक उत्पादन के लिए प्रतिनिधि मंडल ने चीन और इंडोनेशिया के गन्ना उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया। साथ ही दोनों देशों के चीनी से जुडे़ मुख्य संस्थानों में जाकर विचारों का आदान-प्रदान किया।
चीन और इंडोनेशिया की यात्रा करके लौटे निदेशक डॉ. शर्मा ने बताया कि उन्होंने चीन में ईस्ट एशिया शुगर कंपनी लिमिटेड एवं मिंग वांग शुगर मिल का भ्रमण किया। वहां की चीनी मिलों में अधिकांशत केवल दो गन्ना प्रजातियों का ही प्रचलन पाया गया हैं, जिनकी चीनी रिकवरी (शर्करा) 12 प्रतिशत के करीब है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि उस क्षेत्र के गांवों का रहन-सहन, वैचारिक और बौद्घिक स्तर हमारे प्रदेश के जैसा ही है। कृषि के प्रति जागरूकता एवं परिस्थितियों से लड़ने की जज्बा काफी अच्छा है। यही नहीं, सफाई व्यवस्था काफी प्रभावित करने वाली है। लोग वहां पर सफाई कार्य एक मिशन के तहत करते हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने इंडोनेशिया शुगर रिसर्च इंस्टीट्यूट, पसुरुआन की प्रयोगशालाओं, प्रक्षेत्र प्रयोगों एवं वहां पर चल रहे अनुसंधानों, टिशुकल्चर लेबोरेट्री, रसायनिक विश्लेषण, तकनीकी प्रचार-प्रसार के कार्य को देखा। इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने ईस्ट जावा प्रोविंस कादरी स्थित पीटीपीएन -10 चीनी मिल का भ्रमण करके गन्ने की बुवाई से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया एवं तकनीकी संचालन की कुशलता को समझा। डॉ. शर्मा ने कहा कि वहां जो चीजें समझीं, उनके आधार पर यहां गन्ने में चीनी परता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। यात्रा से वापस लौटे डॉ. शर्मा को गन्ना शोध परिषद के कर्मचारियों ने बधाई दी।
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चीन और इंडोनेशिया की यात्रा करके लौटे निदेशक डॉ. शर्मा ने बताया कि उन्होंने चीन में ईस्ट एशिया शुगर कंपनी लिमिटेड एवं मिंग वांग शुगर मिल का भ्रमण किया। वहां की चीनी मिलों में अधिकांशत केवल दो गन्ना प्रजातियों का ही प्रचलन पाया गया हैं, जिनकी चीनी रिकवरी (शर्करा) 12 प्रतिशत के करीब है।
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डॉ. शर्मा ने बताया कि उस क्षेत्र के गांवों का रहन-सहन, वैचारिक और बौद्घिक स्तर हमारे प्रदेश के जैसा ही है। कृषि के प्रति जागरूकता एवं परिस्थितियों से लड़ने की जज्बा काफी अच्छा है। यही नहीं, सफाई व्यवस्था काफी प्रभावित करने वाली है। लोग वहां पर सफाई कार्य एक मिशन के तहत करते हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने इंडोनेशिया शुगर रिसर्च इंस्टीट्यूट, पसुरुआन की प्रयोगशालाओं, प्रक्षेत्र प्रयोगों एवं वहां पर चल रहे अनुसंधानों, टिशुकल्चर लेबोरेट्री, रसायनिक विश्लेषण, तकनीकी प्रचार-प्रसार के कार्य को देखा। इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने ईस्ट जावा प्रोविंस कादरी स्थित पीटीपीएन -10 चीनी मिल का भ्रमण करके गन्ने की बुवाई से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया एवं तकनीकी संचालन की कुशलता को समझा। डॉ. शर्मा ने कहा कि वहां जो चीजें समझीं, उनके आधार पर यहां गन्ने में चीनी परता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। यात्रा से वापस लौटे डॉ. शर्मा को गन्ना शोध परिषद के कर्मचारियों ने बधाई दी।
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