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Shahjahanpur News: बोगस फर्म बनाकर दो करोड़ की कर चोरी करने वाले गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार
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रोजा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी अखिलेश व शिवओम। स्रोत: पुलिस
शाहजहांपुर। बोगस फर्म बनाकर स्क्रैप लदे वाहन पास कराकर दो करोड़ की कर चोरी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को शनिवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सामने आया कि अब तक गिरोह करीब 200 से 250 स्क्रैप की गाड़ियां फर्जी दस्तावेजों से पास करा चुका है। उनके कब्जे से फर्जी दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बरामद किया गया। इनमें सात फोन, 10 बिल्टी बुक, गाड़ियों के विवरण के रजिस्टर व एक कार शामिल है।
पुलिस टीम हथौड़ा चौराहे पर चेकिंग कर रही थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने अटसलिया पुल से पहले घेराबंदी कर एक कार को रोककर उसमें सवार चार व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में रायबरेली के थाना सरैली क्षेत्र के गांव मूसापुर गाजियापुर व वर्तमान में नई दिल्ली की गली नंबर चार बी ब्लॉक स्वरूप नगर निवासी अखिलेश, बदायूं के थाना सिविल लाइन क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर व वर्तमान में गाजियाबाद के थाना नंदग्राम क्षेत्र के एफ ब्लॉक के विपिन, मुजफ्फरनगर के थाना मंसूरपुर क्षेत्र के गांव लच्छैड़ा निवासी शिवओम शर्मा उर्फ सुमित व शामली के थाना बाबरी क्षेत्र के कैडी निवासी राहुल राणा शामिल हैं।
एसपी ने बताया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से भोले-भाले व्यक्तियों को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं फोटो आदि दस्तावेज प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद उनके फर्जी एवं कूटरचित हस्ताक्षर तैयार कर बोगस जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराते थे। फिर इन फर्जी जीएसटी फर्मों के नाम से कूटरचित ई-वे बिल एवं बिल्टी तैयार कर महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर आदि जनपदों से स्क्रैप खरीदते थे तथा मुजफ्फरनगर में अवैध रूप से विक्रय कर फर्जी लेन-देन दर्शाते हुए कर चोरी करते थे।
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बिहार की फर्जी जीएसटी फर्मों को अन्य व्यक्तियों के नाम से कराते थे पंजीकृत
एसओजी, सर्विलांस, गैंगेस्टर सेल व रोजा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद एसपी ने बताया कि पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में जानकारी दी है कि वे बिहार की फर्जी जीएसटी फर्मों को अन्य व्यक्तियों के नाम से पंजीकृत कराते थे। उन्हीं फर्मों के नाम से फर्जी ई-वे बिल एवं बिल्टी तैयार करते थे। विपिन फर्जी बिल्टी पर हस्ताक्षर करता था, राहुल फर्जी ई-वे बिल तैयार कराता था और सुमित उर्फ शिवओम स्क्रैप की गाड़ियों के नंबर उपलब्ध कराता था। फर्जी ई-वे बिल एवं बिल्टी तैयार होने के बाद सुमित व राहुल व्हाट्सएप के माध्यम से उन दस्तावेज को चालकों को उपलब्ध कराता था। अखिलेश और विपिन मोबाइल के माध्यम से चालकों को गाड़ी किस समय एवं किस मार्ग से निकालनी है, इसकी जानकारी देते थे, क्योंकि उन्हें जीएसटी अधिकारियों की चेकिंग के समय की जानकारी रहती थी। इस कार्य के लिए ब्रदर्स लॉजिस्टिक नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें विपिन, अखिलेश एवं राहुल सदस्य थे। कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से कर चोरी कर अवैध धन अर्जित किया जाता था।
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खुलासे के लिए गठित की गई थी एसआईटी
पिछले साल 28 व 29 नवंबर को मोहम्मदी रोड पर जीएसटी के सचल दल प्रभारी हरित कुमार टीम के साथ अवैध रूप से माल सप्लाई करने वाले वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान तीन वाहनों के चालक मेहरबान, केश्वर कुमार व नंदलाल भगत को प्रमोद इंटरप्राइजेज के नाम से संचालित फर्जी जीएसटी फर्म के ई-वे बिल एवं बिल्टी सहित पकड़ा था। जांच के दौरान प्रस्तुत समस्त अभिलेख फर्जी एवं कूटरचित पाए गए थे। सचल दल के कनिष्ठ लिपिक विकास कुमार की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एसपी ने एसआईटी गठित की थी।
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पिछले साल आए थे पकड़ी गई तीन गाड़ियां छुड़वाने
पिछले साल पकड़ी गई तीन गाड़ियाें को छुड़ाने के लिए विपिन व अखिलेश शाहजहांपुर आए थे। कर एवं जुर्माना सुमित उर्फ शिवओम ने अन्य व्यक्ति के माध्यम से चालकों के नाम से जमा कराया था। चालक मेहरबान, केश्वर पटेल एवं नंदलाल भगत पूर्व से उनके संपर्क में थे। कई बार फर्जी जीएसटी फर्म के नाम पर स्क्रैप मुजफ्फरनगर ले जा चुके थे।
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अखिलेश ने किश्तों पर खरीदी कार
आरोपियों ने बताया कि आज वे जिस कार से आ रहे थे। वह अखिलेश ने स्क्रैप से अर्जित धनराशि से किस्तों पर खरीदी थी। सुमित उर्फ शिवओम स्क्रैप खरीदकर विभिन्न फैक्ट्रियों में विक्रय करता था। प्रति टन एक हजार रुपये की दर से राशि अखिलेश, विपिन एवं राहुल को देता था। इसमें 400 रुपये राहुल व विपिन और अखिलेश को तीन-तीन सौ रुपये प्राप्त होते थे।
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गिरोह में एक अनपढ़ व तीन हैं पढ़े-लिखे
पकड़े गए लोगों में शिवओम ने आठवीं तक पढ़ाई की है। उसकी शादी हो चुकी है। उसका कहना है कि वह मजदूरी करता है। विपिन ने बरेली से बीएससी की पढ़ाई की है। उसका कहना है कि वह वर्तमान में जीएसटी विभाग में रेकी करने का काम करता था। अखिलेश ने किसी कारण बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी और निजी काम करने लगा था। वहीं, राहुल का कहना है कि वह अनपढ़ है। उसके पिता ड्राइवरी करते हैं।
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बोगस फर्म के जरिये जीएसटी की कर चोरी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पकड़ा है। आरोपियों ने करीब दो करोड़ की कर चोरी की है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। प्रकाश में आने वाले अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-राजेश द्विवेदी, एसपी, शाहजहांपुर
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पुलिस टीम हथौड़ा चौराहे पर चेकिंग कर रही थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने अटसलिया पुल से पहले घेराबंदी कर एक कार को रोककर उसमें सवार चार व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में रायबरेली के थाना सरैली क्षेत्र के गांव मूसापुर गाजियापुर व वर्तमान में नई दिल्ली की गली नंबर चार बी ब्लॉक स्वरूप नगर निवासी अखिलेश, बदायूं के थाना सिविल लाइन क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर व वर्तमान में गाजियाबाद के थाना नंदग्राम क्षेत्र के एफ ब्लॉक के विपिन, मुजफ्फरनगर के थाना मंसूरपुर क्षेत्र के गांव लच्छैड़ा निवासी शिवओम शर्मा उर्फ सुमित व शामली के थाना बाबरी क्षेत्र के कैडी निवासी राहुल राणा शामिल हैं।
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एसपी ने बताया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से भोले-भाले व्यक्तियों को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं फोटो आदि दस्तावेज प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद उनके फर्जी एवं कूटरचित हस्ताक्षर तैयार कर बोगस जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराते थे। फिर इन फर्जी जीएसटी फर्मों के नाम से कूटरचित ई-वे बिल एवं बिल्टी तैयार कर महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर आदि जनपदों से स्क्रैप खरीदते थे तथा मुजफ्फरनगर में अवैध रूप से विक्रय कर फर्जी लेन-देन दर्शाते हुए कर चोरी करते थे।
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बिहार की फर्जी जीएसटी फर्मों को अन्य व्यक्तियों के नाम से कराते थे पंजीकृत
एसओजी, सर्विलांस, गैंगेस्टर सेल व रोजा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद एसपी ने बताया कि पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में जानकारी दी है कि वे बिहार की फर्जी जीएसटी फर्मों को अन्य व्यक्तियों के नाम से पंजीकृत कराते थे। उन्हीं फर्मों के नाम से फर्जी ई-वे बिल एवं बिल्टी तैयार करते थे। विपिन फर्जी बिल्टी पर हस्ताक्षर करता था, राहुल फर्जी ई-वे बिल तैयार कराता था और सुमित उर्फ शिवओम स्क्रैप की गाड़ियों के नंबर उपलब्ध कराता था। फर्जी ई-वे बिल एवं बिल्टी तैयार होने के बाद सुमित व राहुल व्हाट्सएप के माध्यम से उन दस्तावेज को चालकों को उपलब्ध कराता था। अखिलेश और विपिन मोबाइल के माध्यम से चालकों को गाड़ी किस समय एवं किस मार्ग से निकालनी है, इसकी जानकारी देते थे, क्योंकि उन्हें जीएसटी अधिकारियों की चेकिंग के समय की जानकारी रहती थी। इस कार्य के लिए ब्रदर्स लॉजिस्टिक नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें विपिन, अखिलेश एवं राहुल सदस्य थे। कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से कर चोरी कर अवैध धन अर्जित किया जाता था।
खुलासे के लिए गठित की गई थी एसआईटी
पिछले साल 28 व 29 नवंबर को मोहम्मदी रोड पर जीएसटी के सचल दल प्रभारी हरित कुमार टीम के साथ अवैध रूप से माल सप्लाई करने वाले वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान तीन वाहनों के चालक मेहरबान, केश्वर कुमार व नंदलाल भगत को प्रमोद इंटरप्राइजेज के नाम से संचालित फर्जी जीएसटी फर्म के ई-वे बिल एवं बिल्टी सहित पकड़ा था। जांच के दौरान प्रस्तुत समस्त अभिलेख फर्जी एवं कूटरचित पाए गए थे। सचल दल के कनिष्ठ लिपिक विकास कुमार की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एसपी ने एसआईटी गठित की थी।
पिछले साल आए थे पकड़ी गई तीन गाड़ियां छुड़वाने
पिछले साल पकड़ी गई तीन गाड़ियाें को छुड़ाने के लिए विपिन व अखिलेश शाहजहांपुर आए थे। कर एवं जुर्माना सुमित उर्फ शिवओम ने अन्य व्यक्ति के माध्यम से चालकों के नाम से जमा कराया था। चालक मेहरबान, केश्वर पटेल एवं नंदलाल भगत पूर्व से उनके संपर्क में थे। कई बार फर्जी जीएसटी फर्म के नाम पर स्क्रैप मुजफ्फरनगर ले जा चुके थे।
अखिलेश ने किश्तों पर खरीदी कार
आरोपियों ने बताया कि आज वे जिस कार से आ रहे थे। वह अखिलेश ने स्क्रैप से अर्जित धनराशि से किस्तों पर खरीदी थी। सुमित उर्फ शिवओम स्क्रैप खरीदकर विभिन्न फैक्ट्रियों में विक्रय करता था। प्रति टन एक हजार रुपये की दर से राशि अखिलेश, विपिन एवं राहुल को देता था। इसमें 400 रुपये राहुल व विपिन और अखिलेश को तीन-तीन सौ रुपये प्राप्त होते थे।
गिरोह में एक अनपढ़ व तीन हैं पढ़े-लिखे
पकड़े गए लोगों में शिवओम ने आठवीं तक पढ़ाई की है। उसकी शादी हो चुकी है। उसका कहना है कि वह मजदूरी करता है। विपिन ने बरेली से बीएससी की पढ़ाई की है। उसका कहना है कि वह वर्तमान में जीएसटी विभाग में रेकी करने का काम करता था। अखिलेश ने किसी कारण बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी और निजी काम करने लगा था। वहीं, राहुल का कहना है कि वह अनपढ़ है। उसके पिता ड्राइवरी करते हैं।
बोगस फर्म के जरिये जीएसटी की कर चोरी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पकड़ा है। आरोपियों ने करीब दो करोड़ की कर चोरी की है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। प्रकाश में आने वाले अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-राजेश द्विवेदी, एसपी, शाहजहांपुर

रोजा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी अखिलेश व शिवओम। स्रोत: पुलिस